facebookmetapixel
Advertisement
राज्य की प्रतिक्रिया और अभिव्यक्ति की सीमाएं testtestभारत का डिफेंस प्रोडक्शन ऑल-टाइम हाई पर, FY26 में15.6% बढ़कर ₹1.78 लाख करोड़ पर पहुंचाHCL Tech के नतीजों की तारीख तय, 13 जुलाई को आएगा रिपोर्ट कार्ड; डिविडेंड पर भी होगा फैसलारिटर्न कहीं और, निवेश कहीं और! क्या सही फंड चुन रहे हैं निवेशक? एक्सपर्ट से समझेंAI के दम पर नई छलांग की तैयारी में Coforge? शेयर में 50% तक तेजी की उम्मीद, एक्सपर्ट्स बुलिशकच्चा तेल सस्ता हो रहा है, फिर पेट्रोल-डीजल क्यों नहीं?20 लाख रुपये से ज्यादा पैकेज वाली नौकरियों में उछाल, ब्रोकरेज ने बताए 4 पसंदीदा IT स्टॉक्सJio IPO का इंतजार खत्म! ₹4 अरब के मेगा IPO की तैयारी तेज, जल्द दाखिल होंगे ड्राफ्ट पेपरसरकार के आदेश के खिलाफ Telegram का पलटवार, Delhi HC पहुंची याचिकाब्राजील में पेट्रोल से 70% सस्ता, भारत में सिर्फ 20%: क्या फ्लेक्स-फ्यूल बनेगा हिट? बता रहे एक्सपर्ट

चीन पर इलेक्ट्रॉनिक बैन का फायदा नहीं उठा पाया भारत, एक्सपोर्ट में पिछड़ा

Advertisement
Last Updated- May 15, 2023 | 11:20 PM IST
India far behind in race for electronics exports to US

चीन के इलेक्ट्रॉनिक उत्पादों पर अमेरिका के बाजार में प्रतिबंध लगने के बाद इस बाजार पर कब्जे की दौड़ में भारत पिछड़ गया है। अमेरिका ने 2018 के अंत में चीन के इलेक्ट्रानिक उत्पादों पर 25 फीसदी दंडात्मक शुल्क लगा दिया था। इसके बाद प्रतिस्पर्धी देशों वियतनाम, मलेशिया और मेक्सिको का अमेरिका को निर्यात तेजी से बढ़ा।

दंडात्मक शुल्क लगाने के बाद चीन के अमेरिका को होने वाले इलेक्ट्रानिक उत्पादों के निर्यात में बीते चार वर्षों के दौरान 29 अरब डॉलर की गिरावट आई। इसका सीधा असर यह हुआ कि अन्य प्रतिस्पर्धी देशों को अमेरिका के बाजार में पांव जमाने का मौका मिल गया। इंडियन सेल्यूलर इलेक्ट्रॉनिक एसोसिएशन (आईसीईए) के भारत सरकार को भेजे गए नोट के मुताबिक इस अवधि के दौरान भारत का अमेरिका को होने वाले निर्यात में केवल 3.2 अरब डॉलर की बढ़ोतरी हुई। वर्ष 2018 में भारत का अमेरिका को इस मद में निर्यात 1.3 अरब डॉलर था जो 2022 में बढ़कर 4.5 अरब डॉलर हो गया।

भारत की तुलना में वियतनाम का निर्यात कहीं तेजी से बढ़ा। इन चार वर्षों के दौरान वियतनाम को अमेरिका को किए जाने वाले इलेक्ट्रॉनिक उत्पादों के निर्यात में 39.3 अरब डॉलर का इजाफा हुआ। हालांकि इस आलोच्य अवधि के दौरान मलेशिया के निर्यात में 7.9 अरब डॉलर और मेक्सिको के निर्यात में 20.4 अरब डॉलर का इजाफा हुआ।

यदि ताइवान को देखा जाए तो इन चार वर्षों में उसके निर्यात में 30.5 अरब डॉलर का इजाफा हुआ। अमेरिका में मिले अवसर का भारत फायदा उठाने में विफल रहा है। यह इस तथ्य से भी प्रमाणित होता है कि अमेरिका को आयात हुए इलेक्ट्रॉनिक उत्पादों में भारत की 2022 में नगण्य 0.8 फीसदी हिस्सेदारी थी।

आईसीईए के मुताबिक अमेरिका को निर्यात किए जाने वाले इलेक्ट्रॉनिक उत्पादों में 350 फीसदी का इजाफा हुआ है लेकिन जब भारत के निर्यात की तुलना प्रतिस्पर्धी देशों से की जाती है तो अपर्याप्त नजर आता है। वाशिंगटन और न्यूयार्क में 15 मई को तीन दिवसीय भारत – अमेरिका के सूचना और संचार प्रौद्योगिकी का संवाद होने के मद्देनजर आईसीईए का आकलन महत्त्वपूर्ण हो जाता है। इस संवाद में 40 से अधिक अमेरिकी कंपनियां हिस्सा लेंगी और वे दोनों देशों के बीच कारोबार की संभावनाओं को तलाशेंगी।

आईसीईएने इलेक्ट्रॉनिक्स व सूचना प्रौद्योगिकी और दूरसंचार विभाग को बताया कि अमेरिका और चीन के तनावपूर्ण संबंध भारत को अमेरिका में कारोबार बढ़ाने का स्वर्णिम अवसर मुहैया करवाते हैं। चीन पर लगाए गए शुल्क के मद्देनजर आईसीईए ने विश्लेषण किया है। इसके मुताबिक भारत को फ्लैट पैनल टीवी, संचार में इस्तेमाल होने वाले सेट टॉप बॉक्स, वायरलेस कम्युनिकेशन उपकरणों और साइटोस्कोप व अन्य चिकित्सकीय यंत्रों में इस्तेमाल होने वाले ग्लास इनवलप वाले लैम्प के निर्माण व निर्यात की संभावनाओं को तलाशना चाहिए।

Advertisement
First Published - May 15, 2023 | 11:20 PM IST

संबंधित पोस्ट

Advertisement
Advertisement
Advertisement