एलआईसी का लाभांश भुगतान आईपीओ के बाद संभव
भारतीय जीवन बीमा निगम (एलआईसी) ने पिछले तीन साल से कोई लाभांश भुगतान नहीं किया है। जानकारों का कहना है कि इससे बीमा कंपनी को अपने आरंभिक सार्वजनिक निर्गम (आईपीओ) से पहले शुद्ध हैसियत बढ़ाने में मदद मिलेगी। इसलिए एलआईसी अपने आईपीओ के बाद लाभांश भुगतान को सुचारु कर सकती है। चालू वित्त वर्ष के […]
अस्थिर बाजार में हाइब्रिड फंडों से मिल सकती है मदद
अमेरिकी फेडरल रिजर्व (यूएस फेड) द्वारा ब्याज दरों में भावी वृद्धि और भू-राजनीतिक तनाव के कारण भारतीय इक्विटी बाजारों में काफी अस्थिरता देखी जा रही है। इस पृष्ठभूमि में म्युचुअल फंड (एमएफ) कंपनियां इस बात की सलाह दे रही हैं कि निवेशक हाइब्रिड फंडों से जुड़े रहें क्योंकि शुद्ध इक्विटी फंड की तुलना में उनमें […]
विवादों के बीच एनएसई पर ज्यादा प्रभाव नहीं
नैशनल स्टॉक एक्सचेंज (एनएसई) ने करीब एक दशक से विवादों में रहा है, लेकिन इसका उसके परिचालन और वित्तीय प्रदर्शन पर ज्यादा प्रभाव नहीं पड़ा है। उसे अपने पुराने प्रतिस्पर्धी बीएसई से बाजार भागीदारी हासिल करने में लगातार सफलता मिली है। 31 दिसंबर तक समाप्त 12 महीनों के दौरान बीएसई और एनएसई के संयुक्त राजस्व […]
एलआईसी आईपीओ को फंडों से मिलेगी मदद
म्युचुअल फंड भारतीय जीवन बीमा निगम (एलआर्ईसी) में निवेश के लिए अपनी तैयारी कर रहे हैं। यह निर्गम अगले महीने बाजार में आ सकता है। म्युचुअल फंड इस निर्गम के लिए अपनी पूंजी सुरक्षित रखने की कोशिश कर रहे हैं। उद्योग के अधिकारियों का मानना है कि कुछ लार्ज- कैप और फ्लैक्सी-कैप योजनाएं नए पूंजी […]
सेबी सख्त, अंतरराष्ट्रीय फंड अनिश्चितता में
बाजार नियामक सेबी ने म्युचुअल फंडों द्वारा वैश्विक निवेश को प्रतिबंधित कर दिया है जिससे अंतरराष्ट्रीय पेशकशों पर विराम लग गया है। अधिकारियों का कहना है कि परिसंपत्ति प्रबंधन कंपनियां कम से कम एक दर्जन अंतरराष्ट्रीय योजनाओं के लिए योजना दस्तावेज पेश करने की प्रक्रिया में थीं, लेकिन भारतीय रिजर्व बैंक और सेबी से स्थिति […]
गिरावट के दौर में कैसा होगा एलआईसी आईपीओ
मार्च में प्रस्तावित जीवन बीमा निगम (एलआईसी) के आईपीओ को लेकर पैदा हुए उत्साह के बावजूद बाजार विश्लेषकों का मानना है कि ताजा अनिश्चितताओं ने भारत समेत सभी वैश्विक वित्तीय बाजारों में भारी गिरावट को बढ़ावा दिया है। बड़े आकार को देखते हुए भारत को ‘सऊदी अरामको घटनाक्रम’ के तौर पर देखते हुए सरकार […]
विवेकपूर्ण सार्वजनिक व्यय प्रबंधन या मूल्य स्थिरता?
निजी क्षेत्र के निवेश में सुधार की अनुपस्थिति के स्पष्ट प्रमाणों के बीच ताजा बजट में यह नीति अपनायी गई है कि महामारी के बाद के वृद्धि चक्र को सरकार के पूंजीगत व्यय के बल पर गति प्रदान की जाए। माना जा रहा है कि मध्यम अवधि में इसकी बदौलत निजी निवेश भी आएगा। इस […]
कृषि पर वैश्विक समझौते में सुधार की जरूरत
वैश्विक स्तर पर कृषि क्षेत्र से संबंधित एग्रीमेंट ऑन एग्रीकल्चर (एओए) पर हस्ताक्षर हुए ढाई दशक से अधिक समय हो गया है और द्विवार्षिक मंत्री-स्तरीय सम्मेलनों में इसमें कई संशोधन भी हो चुके हैं। मगर इतनी लंबी अवधि बीतने के बाद भी विकसित और विकासशील देशों के बीच कृषि क्षेत्र में समानता का घोर अभाव […]
यूक्रेन मामला: सीमित विकल्प
रूस के राष्ट्रपति व्लादीमिर पुतिन ने मंगलवार को एक बड़ा कदम उठाते हुए पूर्वी यूक्रेन के दो अलग हुए हिस्सों को मान्यता दे दी और वहां बतौर ‘शांतिरक्षक’ रूसी सेनाएं भेजने की बात कही। भारत की दृष्टि से यह प्रकरण एकदम गलत समय पर हुआ। इसका सीधा असर तेल कीमतों पर पड़ेगा और उनमें उछाल […]
उत्तर प्रदेश में चौथे चरण में 60 फीसदी मतदान
राजनीतिक दलों और चुनाव आयोग से लेकर सामाजिक संगठनों की तमाम अपीलों के बाद भी उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनावों के चौथे चरण में मतदान पहले का रिकॉर्ड नहीं तोड़ सका। इस चरण में नौ जिलों की 59 सीटों पर करीब 60 फीसदी मतदान हुआ है। चुनाव आयोग की ओर से जारी आंकड़ों के मुताबिक शाम […]
