IT Stocks to Buy: अगर आपको लग रहा है कि आईटी सेक्टर में नौकरियां कम हो रही हैं, तो तस्वीर आधी सही है। सच यह है कि कंपनियां अब बड़ी संख्या में लोगों को नौकरी देने के बजाय चुनिंदा और हाई-स्किल प्रोफेशनल्स की तलाश में हैं। खासकर आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI), मशीन लर्निंग (ML), डेटा इंजीनियरिंग, क्लाउड और साइबर सिक्योरिटी जैसे क्षेत्रों में मांग लगातार मजबूत बनी हुई है। मई 2026 के हायरिंग आंकड़े बताते हैं कि भारतीय टेक्नोलॉजी जॉब मार्केट किसी सामान्य सुस्ती से नहीं गुजर रहा, बल्कि एक बड़े बदलाव के दौर में है। कंपनियां अब संख्या नहीं, बल्कि विशेषज्ञता को प्राथमिकता दे रही हैं।
नौकरी डॉट कॉम के मई 2026 के आंकड़ों के मुताबिक, देश में कुल व्हाइट-कॉलर हायरिंग सालाना आधार पर सिर्फ 1 फीसदी बढ़ी। वहीं आईटी सेक्टर में भर्ती 7 फीसदी घट गई। हालांकि यह कमजोरी मुख्य रूप से एंट्री-लेवल और कम स्किल वाली नौकरियों में देखने को मिली है। यानी सबसे ज्यादा दबाव उन लोगों पर है जो करियर की शुरुआत कर रहे हैं या सामान्य टेक्निकल रोल में काम करते हैं।
दूसरी ओर AI, मशीन लर्निंग, डेटा इंजीनियरिंग, क्लाउड कंप्यूटिंग, साइबर सिक्योरिटी और प्लेटफॉर्म इंजीनियरिंग जैसे क्षेत्रों में विशेषज्ञ कर्मचारियों की मांग मजबूत बनी हुई है। रिपोर्ट के मुताबिक, कंपनियां अब ऐसे लोगों की तलाश कर रही हैं जो सीधे बिजनेस पर असर डाल सकें, ऑटोमेशन को बढ़ावा दें और AI आधारित प्रोजेक्ट्स को आगे बढ़ा सकें।
हायरिंग ट्रेंड्स में सबसे दिलचस्प बात वेतन के स्तर पर दिख रही है। 20 लाख रुपये सालाना से अधिक वेतन वाली नौकरियों में मई के दौरान 11 फीसदी की बढ़ोतरी दर्ज की गई। इसके उलट मिड-लेवल और एंट्री-लेवल हायरिंग में गिरावट देखने को मिली। इससे साफ संकेत मिलता है कि कंपनियां कम लोगों को भर्ती कर रही हैं, लेकिन बेहतर स्किल वाले कर्मचारियों पर ज्यादा निवेश कर रही हैं।
फरवरी में रिकॉर्ड स्तर पर पहुंचने के बाद AI और मशीन लर्निंग से जुड़ी नौकरियों की मांग में कुछ नरमी जरूर आई है, लेकिन यह अभी भी बाकी बाजार से कहीं बेहतर प्रदर्शन कर रही है। मई 2026 में AI/ML से जुड़ी हायरिंग सालाना आधार पर 22 फीसदी बढ़ी, जो कुल जॉब मार्केट की तुलना में काफी मजबूत वृद्धि है।
इस ट्रेंड पर टिप्पणी करते हुए ब्रोकरेज फर्म चॉइस ब्रोकिंग ने कहा कि कंपनियां अब टेक्नोलॉजी खर्च को ज्यादा असरदार और परिणाम देने वाली भूमिकाओं की तरफ मोड़ रही हैं। रिपोर्ट के मुताबिक, आईटी सेक्टर का पारंपरिक “पिरामिड मॉडल” धीरे-धीरे बदल रहा है। पहले कंपनियों में बड़ी संख्या में जूनियर कर्मचारी और कम संख्या में अनुभवी कर्मचारी होते थे। अब यह ढांचा “डायमंड मॉडल” की तरफ बढ़ रहा है, जहां अनुभवी और विशेषज्ञ कर्मचारियों की हिस्सेदारी ज्यादा होगी।
चॉइस ब्रोकिंग का मानना है कि यह बदलाव उन आईटी कंपनियों के लिए फायदेमंद साबित हो सकता है, जिनकी AI, डिजिटल इंजीनियरिंग और इंजीनियरिंग रिसर्च एंड डेवलपमेंट (ER&D) में मजबूत मौजूदगी है। ब्रोकरेज ने लंबी अवधि के लिए कोफोर्ज, पर्सिस्टेंट सिस्टम्स, हैप्पीएस्ट माइंड्स और केपीआईटी टेक्नोलॉजीज को अपनी पसंदीदा कंपनियों में शामिल किया है।
(डिस्क्लेमर: यहां दी गई राय ब्रोकरेज की है। बिज़नेस स्टैंडर्ड इन विचारों से सहमत होना जरूरी नहीं समझता और निवेश से पहले पाठकों को अपनी समझ से फैसला करने की सलाह देता है।)