नकदी नहीं, तो खरीद कैसी
बाजार की हालत तो इस समय खराब ही नजर आ रही है। दरअसल मंदी ने बैंकों को जो मार लगाई है, उसका असर लक्जरी वस्तुएं मसलन कंज्यूमर डयूरेबल्स पर ज्यादा पड़ रहा है। फाइनैंस मुश्किल है, महंगे उत्पाद खरीदे नहीं जा रहे हैं। यह दिक्कत अगले साल भी बरकरार रहेगी। इसे भूल जाएं, तब भी […]
..चालू हो गई सबसे बड़ी रिफाइनरी
रिलायंस इंडस्ट्रीज लिमिटेड की सहायक कंपनी रिलायंस पेट्रोलियम लिमिटेड (आरपीएल) ने गुरुवार को गुजरात के जामनगर में अपनी रिफाइनरी चालू की। इस रिफाइनरी के जरिए देश की कुल कच्चे तेल की रिफाइनिंग क्षमता में 20 फीसदी का इजाफा होगा। जामनगर की 25,000 करोड़ रुपये की यह रिफाइनरी दुनिया की छठी सबसे बड़ी रिफाइनरी है, जिसकी […]
विश्व बैंक पर बिफर पड़ी सत्यम
विवादों का सबब बनी सॉफ्टवेयर कंपनी सत्यम कंप्यूटर सर्विसेज ने विश्व बैंक को गलत बयान देने के लिए आड़े हाथों लिया है और माफी मांगने को कहा है। कंपनी ने बैंक पर बिफरते हुए कहा कि उसके प्रतिनिधियों ने कंपनी के बारे में ‘अनुचित बयान’ दिए हैं।देश की चौथीा सबसे बड़ी सॉफ्टवेयर सेवा कंपनी सत्यम […]
बोर्ड बैठक में पेच
विवादों में घिरी और उन्हीं की वजह से चर्चा में आई नामी गिरामी सॉफ्टवेयर कंपनी सत्यम कंप्यूटर सर्विसेज के निदेशक मंडल की सोमवार को होने वाली बैठक में खासी गहमागहमी रहने की आशंका है। माना जा रहा है कि कंपनी के शेयरों के बायबैक के अलावा इसमें विश्व बैंक की सख्ती, चेयरमैन बी रामलिंग राजू […]
मुनाफा देख तेल कंपनियां खोलेंगी नए पेट्रोल पंप
सरकारी तेल कंपनियां एक बार फिर अपने पेट्रोल पंप नेटवर्क के विस्तार की योजना बना रही हैं। अंतरराष्ट्रीय बाजारों में कच्चे तेल की कीमतों के कारण इन कंपनियों को पेट्रोलियम उत्पादों की बिक्री पर मुनाफा होने लगा है। जुलाई, 2008 में सरकार ने तीन प्रमुख सरकारी तेल कंपनियों- इंडियन ऑयल कॉरपोरेशन (आईओसी), भारत पेट्रोलियम कॉरपोरेशन […]
अब मॉल्स के भीतर मंदी से मुकाबला
देश भर में मौजूदा मॉल को अब ढर्रे से हटकर सोचना पड़ रहा है, ताकि मॉल में आने वाले ग्राहकों की संख्या में इजाफा हो सके। वैश्विक वित्तीय संकट और आर्थिक मंदी के चलते ग्राहाकों के खर्च में कमी, मॉल के किरायों में मोल-भाव ने जहां मॉल मालिकों की नींद उड़ाई है, वहीं हाल में […]
केमिकल उद्योग सस्ते आयात से परेशान
मौजूदा वैश्विक मंदी से भारतीय रसायन उद्योग को एक अनोखी चुनौती मिल रही है। भारतीय कंपनियों को वैश्विक रसायन आपूर्तिकर्ताओं से कड़ी टक्कर मिल रही है । जो इस विकासशील भारतीय बाजार में बड़ी मात्रा में मौजूद संभावनाओं को भुना रहे हैं। भारतीय उद्योग को यह शिकायत है कि सस्ते आयात के कारण पॉलिमर, पेट्रोकेमिकल […]
कंपनियों को पसंद सस्ते अधिग्रहण
डॉ. रेड्डीज लैबोरेटरीज, निकोलस पीरामल और दूसरी भारतीय दवा निर्माता कंपनियां वैश्विक मंदी के चलते विकास की अपनी रफ्तार को बनाए रखने के लिए अब सस्ते अधिग्रहणों के बारे में सोच रही हैं। पिछले कुछ समय में बड़े अधिग्रहणों में हासिल हुई नाकामयाबी के बाद दवा निर्माता कंपनियां छोटे अधिग्रहणों से मुनाफा कमाने के बारे […]
दौड़ में आगे निकलने को तैयार ग्लेनमार्क
भारत की 11वीं सबसे बड़ी दवा निर्माता कंपनी ग्लेनमार्क फार्मास्युटिकल्स हो सकता है कि उद्योग की बड़ी-बड़ी प्रतिद्वंद्वी कंपनियों रैनबैक्सी, डॉ. रेड्डीज और निकोल्स पीरामल 2010 तक मूल दवाओं या नवीन रसायन संस्था (एनसीई) की बिक्री के मामले में आगे निकल जाए। कंपनी का कहना है कि ग्लेनमार्क की योजना अपनी अतिसार रोधी दवा क्रोफेलमर […]
स्टील के फिर से ‘फौलाद’ बनने का यकीन
अंतरराष्ट्रीय बाजार में स्टील की कीमतें दरकते हुए अपनी बुलंदियों से 60 फीसदी लुढ़क चुकी है और घरेलू बाजार में भी यह 25 फीसदी फिसला है। ऐसे में आने वाले साल में स्टील इंडस्ट्री में मार्जिन का स्तर कमोबेश उसी तरह रहने के आसार हैं, जैसा उस समय था, जब इसकी कीमतें सातवें आसमान पर […]
