ये हैं मौजूदा दौर के नायाब नमूने
जिन लोगों को गैजेट्स से प्यार होता है उनके लिए गैजेट्स का लुक उतना ही मायने रखता है जितना कि उनके फंक्शन। कई लोग तो आपसे तर्क कर सकते हैं कि एपल के उत्पादों की सफलता में उनकी उपयोगिता से ज्यादा उनकी स्लीक डिजाइन की भूमिका ज्यादा अहम रही। डिजाइन और फंक्शन पसंद करने वाले […]
‘नया काम शुरू करने के लिए बुरा नहीं है वक्त’
डीएलएफ को रिटेल में उतरने और नई कंपनी बनाने की जरूरत क्यों महसूस हुई? हमें इस क्षेत्र में विशाल संभावनाएं दिखाई दीं, बशर्ते इसे ठीक से किया जाए। भारतीय उपभोक्ता के दिमाग में यह बात बैठी हुई है कि जो भी अंतरराष्ट्रीय ब्रांड आते हैं, वे अपनी पूरी रेंज नहीं लाते और उनके उत्पाद भी […]
खर्च करने में तो चुस्ती दिखाओ
वित्त मंत्रालय ने मंगलवार को अर्थव्यवस्था की मध्यावाधि समीक्षा पेश की। असल में, राजकोषीय उत्तरदायित्व एवं बजट प्रबंधन (एफआर बीएम), कानून के तहत ऐसा करना अब जरूरी बना दिया गया है, ताकि लोगों को सरकारी खजाने की स्थिति के बारे में जानकारी मिल सके। इस समीक्षा के मुताबिक इस साल हमारा देश सात फीसदी या […]
साल भर काम हुआ कम और हंगामा बरपा ज्यादा
साल खत्म होने को आ रहा है, लेकिन अदालतों के लिए इसे किसी भी तरह से बेहतर साल नहीं माना जा सकता। वित्तीय अनियमितताओं के आरोपों ने कई उच्च न्यायालयों के न्यायाधीशों को घेरे रखा। इस वजह से कुछ न्यायाधीशों का स्थानांतरण भी किया गया। विशेष न्यायाधिकरण जैसे प्रतिस्पध्र्दा आयोग, नैशनल कंपनी लॉ ट्रिब्यूनल और […]
क्या अब लड़खड़ा रहे हैं भारत समेत ब्रिक देश?
अलग रहने यानी डीकपलिंग के सिध्दांत में विकासशील देशों के लिए कहा जाता था कि वे खुद के दम पर स्वायत्तता के साथ तेजी से आर्थिक विकास कर सकते हैं। इन पर औद्योगिक दुनिया में आने वाली मंदी का कोई प्रभाव नहीं पड़ेगा। ऐसा इसलिए कहा जा सकता था, क्योंकि उनकी स्वतंत्र सत्ता थी। यह […]
मंदी से शहर हुए बेजार, पर गांव की गलियां ‘गुलजार’
राजधानी दिल्ली समेत तमाम शहरों में मंदी पांव पसारने लगी है। बड़ी-बड़ी कंपनियों के शोरूम सूने पड़े हैं, खरीदारों का टोटा है, जो आ भी रहे हैं, दाम की तफ्तीश कर चले जा रहे हैं। लेकिन : * उत्तर प्रदेश में बरेली जिले के मीरपुर कस्बे में महेश प्रसाद की बांछें खिली हुई हैं। पूरे […]
चौपाल से बाजार
समाज सेवा के साथ बाजार तलाशना कंपनियों की नई रणनीति बन गई है। हिंदुस्तान यूनिलीवर लिमिटेड (एचयूएल) के लिए तो यह रणनीति काफी फायदा भी पहुंचा रही है। कंपनी ने शक्ति नाम से परियोजना शुरू की है, जो गांवों में खरीदारों की तलाश में अहम भूमिका निभा रही है। कोई बहुराष्ट्रीय कंपनी बड़ी परियोजना वहीं […]
‘हरियाली’ के बीच मंदी की कालिख का क्या काम?
आर्थिक मंदी ने दो महीने पहले अपना कहर बरपाना शुरू किया और रायपुर के पास गांव में सुखीराम ने भी अपना मकान बनवाना दो महीने पहले ही शुरू किया। मंदी शहरों में मकान बिकवा रही है और सुखीराम का मकान पूरी रफ्तार के साथ बन रहा है। मजे की बात है कि सुखीराम इसका श्रेय […]
छोटी कंपनियां भी पगडंडी पर..
भले ही तमाम क्षेत्रों की कंपनियां मंदी से परेशान हैं, लेकिन कोलकाता में छोटी और मझोली दूरसंचार एवं सूचना प्रौद्योगिकी कंपनियों को गांवों और कस्बों से उम्मीद नजर आ रही है। इसीलिए वे विस्तार की योजनाओं पर भी काम कर रही हैं।जीपी इन्फोटेक और जेनिटिस समूह शहर में मझोले आकार की इलेक्ट्रॉनिक और दूरसंचार कंपनियां […]
मंदी के दौर में नौकरियों की बरसात..हां भई हां!
उम्मीद की किरण तो किसी भी कोने से आ सकती है। अब मंदी को ही लीजिए, दुनिया भर के हुक्मरान और उद्योगपति मंदी से बचने के लिए लागत घटा रहे हैं और कर्मचारियों को बाहर का रास्ता दिखा रहे हैं, लेकिन उत्तर प्रदेश के छोटे शहरों में रोजगार के नए मौके सामने आ रहे हैं। […]
