मंदी ने फीकी की हीरे की चमक
हीरा है सदा के लिए-यह कहावत हीरे की चमक और बढ़ा देती है, लेकिन मंदी के इस दौर में हीरे जैसे बहुमूल्य रत्न की चमक भी फीकी हो चली है। हालत यह है कि पिछले तीन दिनों में हीरे में करीब 15 फीसदी की गिरावट हो चुकी है। दिल्ली के हीरा व्यापारी सुरेश वर्मा ने […]
हर गिरावट में खरीदारी में है समझदारी
आर्थिक भविष्यवक्ता खर्चों में कटौती और अनुमानों में कमी की अपनी पहले की बातों से बदल रहे हैं। यहां तक कि राजनीतिक भी सार्वजनिक तौर पर अगले कुछ वर्षों के लिए विकास दर कम होने की बात स्वीकार कर रहे हैं। भारत का सकल घरेलू उत्पाद (जीडीपी) विकास दर 2008-09 के लिए लगभग 6.5 प्रतिशत […]
क्रेडिट कार्ड में बीमे के लाभ
एक बार जब आप क्रेडिट कार्ड के मालिक हो जाते हैं तो आप बीमा के कुछ लाभ भी उठा सकते हैं। क्यों हैरत में पड़ गए? ऐसा होना लाजिमी भी है। एक बार आप जब नए-नए जारी हुए क्रेडिट कार्ड के साथ मिलने वाली सर्विस गाइड ध्यान से पढ़ेंगे तो उसमें आपको एक बीमादाता कंपनी […]
शिक्षा की लागत
जब आप शैक्षिक ऋण के लिए आवेदन करते हैं तो बैंक पाठयक्रम की अवधि, फीस, पाठयक्रम सामग्री और अन्य खर्च पर नजर डालता है। इसी के हिसाब से बैंक यह बताता है कि आपको कितनी राशि मंजूर की जानी चाहिए। बैंक द्वारा यह पाठयक्रम शुल्क सीधे तौर पर कॉलेज या संस्थान को दे दिया जाता […]
बीएस की क्लास
1. ….. अमेरिका का संस्थान है जिसने हाल में खुद को एक व्यावसायिक बैंक में तब्दील किया है।क. अमेरिकन एक्सप्रेसख. मॉर्गन स्टैनलीग. गोल्डमैन सैक्सघ. फैनी मे 2. आर्थिक प्रोत्साहन मुहैया कराने के लिए …. को एक मौद्रिक उपाय से ज्यादा एक वित्तीय उपाय समझा जाता है।क. नकद आरक्षी अनुपात में कमीख. रेपो रेट में कमीग. […]
व्यापार गोष्ठी: किस दल की आर्थिक नीति बचा सकती है मंदी से?
राजनीतिक नीतियां प्रासंगिक नहींश्रवण कुमार ठाकुरभोपाल मुझे नहीं लगता है कि मंदी से निपटने में राजनीतिक दलों की आर्थिक नीतियों की कोई प्रासंगिकता है क्योंकि नब्बे के दशक में भूमंडलीकरण ने सभी देशों की भौगोलिक सीमाओं को खत्म कर दिया है। विकासशील और अल्पविकसित देशों की आर्थिक नीतियों में विकसित देशों द्वारा मनमानी शर्तें थोपी […]
बुरे दौर को बनाएं सुहाना
इस वक्त हर कोई यही मानकर चल रहा है मंदी की हालत में ऑटो उद्योग की हालत बेहद पतली है। इसका मतलब यह नहीं कि हम हाथ पर हाथ धरे बैठे रहें और आपको बेहतरीन कार और बाइक के बारे में जानकारी ही देना बंद कर दें। हम आपको पांच शानदार मशीनों के बारे में […]
तीन ‘खानों’ से क्या भर पाएगा बॉलीवुड का ‘खजाना’?
बॉलीवुड, इस गुजरते साल के आखिरी महीने से बड़ी उम्मीदें लगाए बैठा है। उम्मीदें लगाए भी क्यों न, आखिरकार बॉलीवुड की बेहद चर्चित ‘खान त्रिमूर्ति’ की फिल्में इस सर्द महीने में 70 एम.एम. की स्क्रीन पर दस्तक जो देने वाली हैं। दरअसल शाहरुख खान की ‘रब ने बना दी जोड़ी’, आमिर खान की ‘गजनी’ और […]
गलत निशाने पर तीर
आखिरकार यह पता चल ही गया कि विदेशी संस्थागत निवेशकों की ओर से शॉर्ट सेलिंग, शेयर बाजार में तेज गिरावट की असल वजह नहीं थी। सरकारी आंकड़ों की मानें तो आठ अक्टूबर तक बाजार में मौजूद 224 कंपनियों के 10000 करोड़ शेयरों में से केवल 19.2 करोड़ शेयर ही उन्होंने बेचे थे। यह कुल बाजार […]
तेल के खेल में सरकार चल रही उल्टी चाल
अंबानी बंधुओं के मामले (रिलायंस इंडस्ट्रीज बनाम रिलायंस नैचुरल रिसोर्सेज ) में सरकार का ताजा हलफनामा एक नया हंगामा खड़ा कर सकता है। दरअसल, इस हलफनामे की वजह से गैस व तेल के कुएं हासिल करने वाली कंपनियों और सरकार के बीच होने वाले प्रोडक्शन शेयरिंग कॉन्ट्रैक्ट (पीएससी) का पूरा का पूरा नजरिया ही बदल […]
