facebookmetapixel
Advertisement
M&M का EV प्लान! सिर्फ नई कार नहीं, पूरी फैक्ट्री बदल रही कंपनीराज्य की प्रतिक्रिया और अभिव्यक्ति की सीमाएं testtestभारत का डिफेंस प्रोडक्शन ऑल-टाइम हाई पर, FY26 में15.6% बढ़कर ₹1.78 लाख करोड़ पर पहुंचाHCL Tech के नतीजों की तारीख तय, 13 जुलाई को आएगा रिपोर्ट कार्ड; डिविडेंड पर भी होगा फैसलारिटर्न कहीं और, निवेश कहीं और! क्या सही फंड चुन रहे हैं निवेशक? एक्सपर्ट से समझेंAI के दम पर नई छलांग की तैयारी में Coforge? शेयर में 50% तक तेजी की उम्मीद, एक्सपर्ट्स बुलिशकच्चा तेल सस्ता हो रहा है, फिर पेट्रोल-डीजल क्यों नहीं?20 लाख रुपये से ज्यादा पैकेज वाली नौकरियों में उछाल, ब्रोकरेज ने बताए 4 पसंदीदा IT स्टॉक्सJio IPO का इंतजार खत्म! ₹4 अरब के मेगा IPO की तैयारी तेज, जल्द दाखिल होंगे ड्राफ्ट पेपरसरकार के आदेश के खिलाफ Telegram का पलटवार, Delhi HC पहुंची याचिका

लेखक : बीएस संवाददाता

कमोडिटी

तापमान वृद्धि से तबाह हुए अमरूद और इसके किसान

वैश्विक तापमान में वृद्धि की मार अब उत्तर प्रदेश के अमरूद किसानों और थोक कारोबारियों पर पड़ने लगी है। कानपुर और आसपास के 10 हजार से अधिक किसानों को इस साल अमरूद के समय से पहले पकने से खासा नुकसान हुआ है। ईश्वरीगंज और प्रतापपुर में हजारों एकड़ में फैली अमरूद की खेती गर्मी बढ़ने […]

लेख

बदले अमेरिकी सितारे, तो बदलेगी हमारी कुंडली!

दुनिया की अर्थव्यवस्था के 26 फीसदी जीडीपी वाले देश अमेरिका में एक अश्वेत के राष्ट्रपति पद पर काबिज होने की खुशी से पूरी दुनिया झूम रही है। सभी कह रहे हैं कि यह बदलाव की शुरुआत है। भारत भी इस जश्न में खुद को शामिल कर रहा है। हालांकि यहां इस बात पर ध्यान देना […]

लेख

कहां हैं निगाहें, कहां है निशाना

भारत, एशिया और यूरोप सबकी निगाहें नए राष्ट्रपति पर टिकी हैं। चुनाव जीतने के बाद बराक ओबामा की पहली प्रेस कॉन्फ्रेंस से पता चलता है कि ओबामा मध्यवर्ग को तरजीह देंगे। इसके अलावा, ओबामा के सामने मुख्य रूप से तीन चुनौतियां- इराक, अफगानिस्तान और आर्थिक मंदी हैं। जाहिर है, इससे निपटने के लिए उनकी ओर […]

लेख

कोई भी हो, बीपीओ तो अहम रहेगा – समीर चोपड़ा, बीपीओ गुरु, अध्यक्ष, बिजनेस प्रोसेस इंडस्ट्रीज एसोसिएशन ऑफ इंडिया

बराक ओबामा की पहली प्राथमिकता अमेरिकी अर्थव्यवस्था को मजबूत करना, अमेरिका में रोजगार के ज्यादा से ज्यादा अवसर पैदा करना और बेहतर वित्तीय अनुशासन को बरकरार रखना है। इस लिहाज से आउटसोर्सिंग इन सारे लक्ष्यों को प्राप्त करने का एक अच्छा जरिया है। इसके जरिये उत्पादों और नई सेवाओं का सृजन किया जाता है और […]

लेख

आईटी पर गाज का प्रश्न ही नहीं – एन. आर. नारायणमूर्ति, अध्यक्ष, इंफोसिस टेक्नोलॉजिज

बराक ओबामा का अमेरिकी राष्ट्रपति चुना जाना ऐतिहासिक है, लेकिन दुनिया की तमाम आईटी कंपनियों की निगाहें ओबामा की नीतियों को जानने के लिए बेताब हैं। ओबामा करिश्माई नेता हैं और वे इस बात को अच्छी तरह समझते हैं कि अमेरिका सहित पूरी दुनिया के उद्योगों के लिए प्रतिस्पद्र्धा कितनी जरूरी है। वैसे भी, ओबामा […]

लेख

अतीत अच्छा, भविष्य पर संशय – यशवंत सिन्हा, पूर्व वित्त मंत्री व भाजपा नेता

जब तक ओबामा सरकार की आर्थिक नीतियों की घोषणा नहीं होती है तब तक निष्कर्ष निकालना जल्दबाजी होगी। जहां तक वहां की नई डेमोक्रेट सरकार की बात है तो जार्ज बुश (रिपब्लिकन पार्टी) से पहले क्लिंटन (जोकि डेमोक्रेटिक पार्टी) के शासन काल में भारत से आर्थिक गठजोड़ काफी अच्छे थे।वास्तव में भारत और अमेरिका के […]

लेख

भारतीय जेनेरिक दवा कंपनियों की सेहत में आएगा और सुधार – दिलीप संघवी, प्रबंध निदेशक, सन फार्मा

अमेरिकी चुनाव में जो परिणाम आया, उसे हमलोग बहुत ही सकारात्मक तरीके से ले रहे हैं। हम उम्मीद करते हैं कि अमेरिका के नए राष्ट्रपति बराक ओबामा सस्ती दवाओं को प्रोत्साहन देते रहेंगे और उससे जुड़ी नीतियों के बारे में न्यायसंगत रवैया ही अपनाएंगे। हम अपने व्यापार के विस्तार के बारे में अभी भी आशान्वित […]

लेख

बुश से बेहतर ही होंगे बराक – सुबोध कांत सहाय, केंद्रीय खाद्य प्रसंस्करण राज्यमंत्री

हमें यह नहीं भूलना चाहिए कि आर्थिक मंदी की आग में दुनियाभर के देश जल रहे हैं, लेकिन इसके बावजूद भारत अभी भी इससे बहुत ज्यादा प्रभावित नहीं हुआ है। यहां कि अर्थव्यवस्था स्थायी बनी हुई है। इससे स्पष्ट है कि भारत की जो आर्थिक नीतियां हैं, वह बेहद मजबूत है। इसमें कोई शक नहीं […]

लेख

अमेरिकी पूंजीवादी नीतियां बेड़ा गर्क कर देंगी भारत का – गुरुदास दासगुप्ता

बुश प्रशासन में जो अमेरिका की आर्थिक नीतियां थीं, वही बराक ओबामा की सरकार में भी देखने को मिलेंगी। लिहाजा नई अमेरिकी सरकार की नीतियों में कोई बदलाव नहीं देखने को मिलेगा और स्थितियां वैसी ही गंभीर बनी रहेंगी। अमेरिकी पूंजीवादी आर्थिक नीतियां कभी भारत जैसे विकासशील देश के लिए उचित नहीं हो सकती हैं। […]

कंपनियां

पहली से ज्यादा खराब रही दूसरी तिमाही

सितंबर 2008 को खत्म हुई इस साल की दूसरी तिमाही में कंपनियों की शुध्द बिक्री में हुए सबसे ज्यादा इजाफे के बावजूद कंपनियों का प्रदर्शन इस दौरान सबसे खराब रहा है। भले ही वह मार्क टु मार्केट नुकसान की प्रोवीजनिंग करने के बाद हो या उसके बिना लेकिन कंपनियों का शुध्द मुनाफा इस बार गिरा […]

1 … 3,587 3,588 3,589 3,590 3,591 … 4,560
Advertisement
Advertisement