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लेखक : टी टी राम मोहन

आज का अखबार, लेख

क्या वित्तीय संकट आने वाला है? ध्यान रखें अमेरिकी नियमन पर

अमेरिका के राष्ट्रपति डॉनल्ड ट्रंप ने शुल्कों की ऐसी जंग शुरू की है, जो 2025 में पूरी दुनिया की आर्थिक वृद्धि दर को हर हाल में धीमा कर देगी। धीमी वृद्धि दर तो बरदाश्त की जा सकती है मगर चिंता इस बात की है कि इसके साथ वैश्विक बाजारों में उथलपुथल भी शुरू हो गई […]

आज का अखबार, लेख

वैश्विक अर्थव्यवस्था में बड़ी उथल-पुथल के आसार नहीं

अमेरिका के राष्ट्रपति डॉनल्ड ट्रंप ने 2  अप्रैल को ‘लिबरेशन डे’ घोषित किया जिसके बाद से ही हमें बताया जा रहा है कि वैश्विक अर्थव्यवस्था एक बड़े झटके की स्थिति की ओर बढ़ रही है और बाजारों में भारी गिरावट आने वाली है। ट्रंप ने लगभग 180  देशों और क्षेत्रों में एकतरफा टैरिफ (सीमा शुल्क) […]

आज का अखबार, लेख

टैरिफ पर ट्रंप की बुनियादी सोच रहेगी बरकरार

अमेरिका के राष्ट्रपति डॉनल्ड ट्रंप की टैरिफ नीति ने दुनिया भर के शेयर बाजारों पर विपरीत असर डाला और वैश्विक राजनीतिक राजधानियों को भी हतप्रभ करने वाले झटके दिए। टीकाकारों ने अमेरिका में मुद्रास्फीतिजनित मंदी और वैश्विक आर्थिक वृद्धि के ढह जाने की चेतावनी दी। उसके बाद ट्रंप ने चीन को छोड़कर बाकी देशों पर […]

आज का अखबार, लेख

हड़बड़ी में दिख रहे हैं अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रंप

डॉनल्ड ट्रंप की कितनी भी बुराई कर ली जाए मगर इस बात से कोई इनकार नहीं कर सकता कि वह कुछ न कुछ करते रहते हैं। टैरिफ, आप्रवासन, यूक्रेन युद्ध, फिलस्तीन का संघर्ष, सरकारी नौकरियों में कटौती – तूफानी रफ्तार के साथ वह कदम उठा रहे हैं और कार्यकारी आदेश जारी कर रहे हैं। अमेरिकी […]

आज का अखबार, लेख

नई विश्व व्यवस्था में भारत के कदम

अर्थशास्त्री यह ध्यान दिलाने से कभी नहीं चूकते कि निर्यात में मजबूत तेजी के बगैर कोई भी अर्थव्यवस्था 7 फीसदी से अधिक की वृद्धि दर बरकरार रखने में कामयाब नहीं रही है। मगर यह वैश्वीकरण के दौर की बात है जब विश्व व्यापार पूरे उफान पर था। वह दौर अब बीत चुका है। 2024-25 की […]

अंतरराष्ट्रीय, आज का अखबार, लेख

ट्रंप का नया कार्यकाल और बजट निर्माण

आर्थिक नीति बनाते समय अनिश्चितता को हमेशा ध्यान में रखना चाहिए। कई बार ऐसे मौके भी आते हैं जब अनिश्चितता बहुत अधिक होती है। हाल के वर्षों में कोविड-19 महामारी सबसे बड़ी चुनौती बनकर सामने आई। यह कहना मुश्किल था कि यह कब तक बनी रहेगी। इस पर नीतिगत प्रतिक्रिया एकदम स्पष्ट थी – राजकोषीय […]

आज का अखबार, लेख

डॉनल्ड ट्रंप लिखेंगे 2025 की इबारत

हाल फिलहाल के अतीत में तो याद नहीं आता कि नए साल की देहरी पर खड़ी दुनिया का भाग्य किसी एक व्यक्ति पर इतना निर्भर रहा हो, जितना आज है। पिछले कुछ हफ्तों में ऐसा लगा है मानो तमाम देशों के प्रमुख राजनीतिक और आर्थिक फैसले अगली जनवरी तक के लिए रोक दिए गए हैं, […]

आज का अखबार, लेख

आखिरकार कामयाब हुए केंद्रीय बैंक…

अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष (IMF) के ताजा आर्थिक पूर्वानुमान के अनुसार वर्ष 2024 और 2025 में विश्व अर्थव्यवस्था 3.2 फीसदी की गति से विकसित होगी। यह 3.6 फीसदी की उस वृद्धि दर से भी कम है जो 2006 से 2015 के बीच देखने को मिली। इसके बावजूद वृद्धि अनुमानों को लेकर राहत देखी जा सकती है। […]

आज का अखबार, लेख

भारत के लिए दो बड़े जोखिम एवं दो बड़ी चुनौतियां…

भारत अपनी अंदरूनी आर्थिक अस्थिरता से निपटने में सफल रहा है मगर अब बाहरी कारक इसकी आर्थिक तरक्की में खलल डाल सकते हैं। चर्चा कर रहे हैं टी टी राममोहन वित्त मंत्रालय ने विश्वास जताया है कि भारतीय अर्थव्यवस्था वित्त वर्ष 2025 में 6.5 से 7.0 प्रतिशत वृद्धि दर हासिल कर लेगी, जिसका अनुमान 2023-24 […]

आज का अखबार, लेख

उचित है जमा वृद्धि पर रिजर्व बैंक की चिंता, ऋण और जमा के बीच संतुलन बनाना अनिवार्य

भारतीय रिजर्व बैंक के गवर्नर ने बैंकों से जमा में वृद्धि की गति बढ़ाने को कहा है। उनके इस आह्वान की आलोचना हुई है और कुछ लोगों ने तो इसका मखौल तक उड़ाया है। कुछ विश्लेषकों का कहना है कि जमा की दिक्कत पूरी तरह काल्पनिक है और ऋण देते समय बैंकों के पास जमा […]

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