मीडिया मंत्र: बदलाव की तरंग बदलेगी रेडियो राजस्व की ध्वनि
क्या रेडियो के लिए कोई उम्मीद बाकी है? पिछले साल रेडियो ऑपरेटरों ने 2,100 करोड़ रुपये का राजस्व कमाया मगर यह समूचे मीडिया और एंटरटेनमेंट उद्योग के वर्ष 2022 में कमाए 2.1 लाख करोड़ रुपये के राजस्व का रत्ती भर भी नहीं है। सीधी सी बात है, मीडिया प्लानर रेडियो को महत्त्वपूर्ण माध्यम के रुप […]
मीडिया मंत्र: भारतीय सिनेमा का बढ़ता बाजार
एटली की फिल्म जवान एक ऐसे सतर्क जेलर के बारे में है जो राजनीतिक और सामाजिक बुराइयों को दूर करना चाहता है। शाहरुख खान ने जेलर आजाद और उसके पिता विक्रम राठौर की दोहरी भूमिका बहुत जोशीले ढंग से निभाई है। सात सितंबर को रिलीज हुई फिल्म हमें अमिताभ बच्चन की दीवार और हम जैसी […]
मीडिया मंत्र: Sony-Zee मर्जर और मीडिया की नई वास्तविकता
इस साल सितंबर के अंत तक भारत में मीडिया खंड में एक नई कंपनी का उदय होगा। सोनी-ज़ी विलय के बाद अस्तित्व में आई 14,851 करोड़ रुपये हैसियत वाली कंपनी भारत में गूगल, मेटा और डिज्नी-स्टार के बाद चौथी सबसे बड़ी कंपनी बन जाएगी। इस नई कंपनी का नाम क्या होगा इस बार अभी कोई […]
मीडिया मंत्र: भारत में डिज्नी को करना पड़ रहा काफी संघर्ष
यह विरोधाभासों से भरा महीना रहा है। डिज्नी को भारत में आए हुए 30 साल हो चुके हैं और अब करीब 83 अरब डॉलर हैसियत वाली यह कंपनी अपने कारोबार को बेचने या दूसरी कंपनी के साथ गठजोड़ करने के बारे में सोच रही है। इस बीच, पहले सोनी पिक्चर्स नेटवर्क्स के नाम से जाने […]
थियेटर से टेलीविजन और अब स्ट्रीमिंग मंचों तक की विकास गाथा
हंसल मेहता और मृणमयी लागू वायकुल की नेटफ्लिक्स सीरीज ‘स्कूप’, चर्चित पत्रकार जिग्ना वोरा की ‘बिहाइंड बार्स इन भायखलाः माई डेज इन प्रिजन’ किताब पर आधारित है और यह सीरीज देखने लायक है। वोरा ‘दि एशियन एज’ में डिप्टी ब्यूरो चीफ थीं और उनका नाम ‘मिड-डे’ के क्राइम रिपोर्टर ज्योतिर्मय दे (या जे दे) की […]
भारतीय सिनेमा की वापसी की रफ्तार धीमी
अभिषेक पाठक की ‘दृश्यम 2’, मलयालम की हिट फिल्म का आधिकारिक हिंदी रीमेक है जो बेहद मनोरंजक फिल्म है। इस फिल्म का मुख्य किरदार, विजय सलगांवकर अपने परिवार को एक आकस्मिक हत्या से पैदा हुई स्थितियों से बचाने की कोशिश करता है। इस कहानी में आने वाले मोड़ आपको हैरान करते हैं। कथित तौर पर […]
फिक्की-फ्रेम्स: चुनौतियों के लिए कारगर
कोविड महामारी की वजह से तीन साल तक फिक्की-फ्रेम्स का आयोजन नहीं हो पाया था, लंबे अंतराल के बाद इसकी शुरुआत शानदार रही। इस कार्यक्रम में नियामक ने जहां एक ओर धैर्य बरतने के बारे में बात की, वहीं उद्योग ने सरकार के समर्थन का उल्लेख किया। गौर करने वाली बात है कि कारोबार ने […]
मीडिया में स्मार्ट बदलाव के बनते आसार
क्या स्मार्टफोन गरीब आदमी का टेलीविजन बन रहा है? और क्या स्मार्ट टीवी अमीर आदमी का स्मार्टफोन बन रहा है? सामग्री की खपत, स्मार्टफोन और अन्य उपकरणों के बढ़ते दायरे से जुड़े अधिकांश शोध और यहां तक कि कई अन्य साक्ष्य भी इस बात की तस्दीक कर रहे हैं कि कुछ मौलिक बदलाव हो रहे […]
स्थानीय मीडिया के लिए बढ़ता आकर्षण
यह बात करीब 20 साल पहले की है जब फरवरी 2001 में मशहूर अखबार दैनिक भास्कर ने हरियाणा के उन शहरों में सौ से अधिक डीलरों के लिए कार्यशालाएं आयोजित कीं जहां उसने अखबार के नए संस्करण लॉन्च किए थे। यह कार्यशाला मूल रूप से टेलीविजन, वाहनों और उनके कलपुर्जों के डीलरों को यह समझाने […]
पठान, फैन क्लब और सिंगल स्क्रीन सिनेमाघर
क्या पठान ने फिल्मों के विपणन की पूरी दलील को उलट कर रख दिया है? क्या इससे सिंगल स्क्रीन सिनेमाघरों का उद्धार होगा? गत 25 जनवरी को रिलीज हुई सिद्धार्थ आनंद (यशराज फिल्म्स) की फिल्म पठान की सफलता से ये दो प्रश्न उत्पन्न हुए हैं। शाहरुख खान अभिनीत यह फिल्म अब भारतीय सिनेमा की सबसे […]







