दीपावली के त्योहार में खाद्य तेल की कीमतों में असामान्य वृद्धि पर लगाम लगाने के लिए देश के 18 राज्य तिलहन और खाद्य तेल की स्टॉक सीमा तय करने की तैयारी कर रहे हैं। केंद्र सरकार ने उन्हें ऐसा करने की ताकत दी है।
इन राज्यों में उत्तर प्रदेश ने पहले ही खाद्य तेल पर स्टॉक सीमा लगा दी है। उत्तर प्रदेश ने इसकी जानकारी केंद्र की ओर से आज आयोजित एक बैठक में दी, जिसमें 23 राज्य शामिल हुए। यह बैठक खाद्य तेल की कीमतों पर आगे और लगाम लगाने की चर्चा करने के लिए आयोजित की गई थी। स्टाक सीमा लगाने की तैयारी कर रहे राज्यों में उत्तर प्रदेश के अलावा राजस्थान, गुजरात, महाराष्ट्र, ओडिशा, केरल, झारखंड, छत्तीसगढ़, आंध्र प्रदेश, तमिलनाडु, त्रिपुरा और केंद्र शासित प्रदेश चंडीगढ़ शामिल हैं।
बैठक में केंद्र सरकार के प्रतिनिधियों ने राज्यों को खाद्य तेल की कीमतों पर काबू पाने के लिए केंद्र की ओर से उठाए गए विभिन्न कदमों के बारे में सूचित किया। केंद्र ने राज्यों से अनुरोध किा कि वे यह सुनिश्चित करने के लिए कार्रवाई करें कि आगे कीमतों में तेजी न आए।
कुछ दिन पहले राज्यों को लिखे पत्र में केंद्र सरकार ने अनुरोध किया था कि स्टॉक सीमा तय करने के लिए केंद्र द्वारा दी गई शक्तियों का वे इस्तेमाल करें और इस पर नजर रखें कि खुदरा कारोबारी, थोक कारोबारी या व्यापारी सहित मूल्य शृंखला के सभी हिस्सेदार अपने भंडारण क्षमता में 2 महीने से ज्यादा स्टॉक न रखने पाएं।
इसके पहले इस महीने सरकार ने फरवरी, 2021 के बाद से छठी बार खाद्य तेल पर आयात शुल्क कम किया था। अक्टूबर की शुरुआत में की गई पिछली कमी के बाद कच्ची किस्म के पाम तेल, सोयाबीन और सूरजमुखी तेल पर बुनियादी सीमा शुल्क खत्म कर दिया है। साथ ही मार्च, 2022 तक के लिए कृषि उपकर भी खत्म कर दिया गया है। बुनियादी सीमा शुल्क खत्म करने का फैसला राज्यों को तिलहन और तेल का स्टॉक सीमा तय करने का अधिकार दिए जाने के महज कुछ दिन बाद लिया गया था और राज्यों को निर्देश दिया गया था कि वे 2 महीने की जरूरत से ज्यादा स्टॉक न रखें।
इन कदमों का कुल मिलाकर असर यह हुआ है कि खाद्य तेल के खुदरा दाम पिछले एक महीने के दौरान 21 अक्टूबर तक के आंकड़ों के मुताबिक 1 से 3 प्रतिशत तक कम हुए हैं। लेकिन अगर पिछले साल के आंकड़ों से तुलना करें तो आधिकारिक आंकड़ों के मुताबिक कीमतें अभी भी बहुत ज्यादा हैं। अगर उपभोक्ता मामलों के मंत्रालय से लिए गए पिछले साल के आंकड़ों से तुलना की जाए तो पता चलता है कि मूंगफली तेल अभी 19 प्रतिशत, सरसों तेल 44 प्रतिशत, वनस्पति 46 प्रतिशत, सोयाबीन तेल 49 प्रतिशत,सूरजमुखी तेल 38 प्रतिशत और आरबीडी पामोलीन 62 प्रतिशत महंगा है।
इसके बावजूद केंद्र सरकार को उम्मीद है कि कीमतों में आगे और कमी आएगी क्योंकि अभी आयातित माल खुदरा बाजार में नहीं पहुंचा है और घरेलू खरीफ के तिलहन की कटार्ई जोरों पर है। वहीं कारोबारियों का कहना है कि जब तक खाद्य तेल के वैश्विक दाम में कमी नहीं आती है, इसके घरेलू दाम में जल्द कोई कमी आने की संभावना नहीं है।