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दाम बढऩे से 24 प्रतिशत लोगों ने कम किया तेल खाना

Last Updated- December 11, 2022 | 8:01 PM IST

महंगे खाद्य तेल ने लोगों के बजट पर असर डाला है। एक सर्वे में शामिल करीब 24 प्रतिशत परिवारों ने कहा है कि खुदरा दरें बढऩे से उन्हें खाद्य तेल की खपत घटाने पर बाध्य होना पड़ा है। वहींं 29 प्रतिशत ने कहा कि उन्होंने खाद्य तेल का स्तर घटाया है और कीमतों में बढ़ोतरी के कारण तेल के सस्ते विकल्पों का इस्तेमाल कर रहे हैं।
लोकलसर्किल द्वारा कराए गए सर्वे में देश के 359 जिलों के करीब 36,000 ग्राहकों से राय ली गई। इसे बिजनेस स्टैंडर्ड सहित कुछ चुनिंदा मीडिया संस्थानों के साथ साझा किया गया है।
इसमें यह भी पाया गया है कि प्रतिक्रिया देने वाले 77 प्रतिशत लोगों ने खाद्य तेल के दाम ज्यादा होने की वजह से अन्य क्षेत्रों में व्यय कम किया है, जिससे तेल खरीद सकें। इस सर्वे में शामिल लोगों में 63 प्रतिशत पुरुष और 37 प्रतिशत महिलाएं थीं।
वैश्विक बाजारों में खाद्य तेल की कीमत ज्यादा होने की वजह से पिछले कई महीनों में सभी किस्म के खाद्य तेल की कीमत में तेजी आई है।
भारत अपने कुल खाद्य तेल की खपत का 55 से 60 प्रतिशत आयात करता है, क्योंकि घरेलू तिलहन उत्पादन कम है और अंतरराष्ट्रीय दाम बहुत ज्यादा होने से इस पर असर पड़ रहा है।
केंद्र सरकार ने खाद्य तेल के दाम काबू में लाने के लिए धीरे धीरे कच्चे तेल पर आयात शुल्क करीब शून्य कर दिया है। वहीं रिफाइंड तेलों के मामले में कर बहुत मामूली है। इन कदमों से नवंबर 2021 से खाद्य तेल के दाम कम होने लगे, लेकिन रूस-यूक्रेन संकट के साथ प्रमुख खाद्य तेल उत्पादक देशों जैसे इंडोनेशिया से निर्यात कम होने के कारण एक बार फिर फरवरी 2022 से खाद्य तेल की कीमत बढ़ रही है। भारत में आयातित सूरजमुखी के तेल में 80 प्रतिशत से ज्यादा करीब 25 से 27 लाख टन आयात रूस और यूक्रेन से होता है। उपभोक्ता मामलों के विभाग से मिले हाल के आंकड़ों के मुताबिक ज्यादातर खाद्य तेलों के दाम अपने शीर्ष स्तर से कम हुए हैं, लेकिन कीमत अभी भी पिछले साल की समान अवधि की तुलना में ज्यादा है।

First Published - April 11, 2022 | 10:58 PM IST

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