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25 प्रतिशत बिजली अक्षय ऊर्जा से

Last Updated- December 11, 2022 | 5:20 PM IST

नई ‘अक्षय ऊर्जा खरीद बाध्यता (आरपीओ)’ के तहत राज्य सरकारों को अपनी बिजली की कुल मांग का एक चौथाई अक्षय ऊर्जा (आरई) स्रोतों से पूरा करना होगा और  इस दशक के अंत तक इसे बढ़ाकर 43 प्रतिशत करना होगा। नए लक्ष्यों में सौर, पवन, पनबिजली शामिल है। साथ ही पहली बार राज्यों के लिए ऊर्जा भंडारण भी अनिवार्य खरीद में शामिल होगा।
भारत ने पिछले साल ग्लासगो में हुए सीओपी26 जलवायु सम्मेलन में 2040 तक अक्षय ऊर्जा की हिस्सेदारी 500 गीगावॉट (जीडब्ल्यू) करने की महत्त्वाकांक्षी  प्रतिबद्धता जताई थी, जिसे देखते हुए यह लक्ष्य आया है। साथ ही मसौदा बिजली विधेयक, 2021 इस मॉनसून सत्र में संसद में पेश किया जा सकता है, इसमें भी आरपीओ लक्ष्य न पूरा करने वाले राज्यों के लिए दंड का प्रावधान किया गया है।
2023 से 2030 के मौजूदा लक्ष्यों के तहत कुल आरपीओ की सीमा 24.61 से 43.33 प्रतिशत है। इसमें पवन आरपीओ 0.81 से 6.94 प्रतिशत है। दो साल पहले पेश हाइड्रो आरपीओ 0.35 से 2.82 प्रतिशत के बीच और अन्य आरपीओ, जिसमें ज्यादा हिस्सेदारी सौर ऊर्जा की होगी, की हिस्सेदारी 23.44 से 33.57 प्रतिशत के बीच होगी।
ऊर्जा भंडारण के लिए, जिसे पहली बार प्रस्तुत किया गया है, इस दशक का लक्ष्य 1 से 4 प्रतिशत के बीच है। इसे ऊर्जा भंडारण के साथ सौर और पवन ऊर्जा परियोजनाओं के माध्यम से पूरा किया जाएगा। राज्यों को अब एक डिजाइन तैयार करने की जरूरत होगी, जिसमें केंद्र द्वारा निर्धारित सीमा के भीतर आरपीओ लक्ष्यों को हासिल करने का अनुमान देना होगा। जिन राज्यों में आरई उत्पादन कम होता है, वे अतिरिक्त उत्पादक राज्यों या पावर ट्रेडिंग प्लेटफॉर्म से से आरई प्रमाणपत्र खरीद सकते हैं। केंद्रीय बिजली नियामक आयोग (सीईआरसी) की ओर से सालाना आरईसी की कीमत जारी की जाएगी।
पिछले 3 साल के दौरान आरपीओ लक्ष्य 17 प्रतिशत, 19 प्रतिशत और 21 प्रतिशत था। इस मसले पर लोकसभा की एक रिपोर्ट के मुताबिक 2020 तक 5 राज्यों को छोड़कर किसी ने भी अपना आरपीओ पूरा नहीं किया। आरपीओ लक्ष्य पूरा करने वाले राज्यों में गुजरात, कर्नाटक, राजस्थान, आंध्र प्रदेश  व तमिलनाडु शामिल हैं।

First Published - July 25, 2022 | 1:08 AM IST

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