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38 डिस्कॉम को मिलेगी रकम

Last Updated- December 11, 2022 | 5:41 PM IST

राज्य सरकारों की बिजली वितरण कंपनियों (डिस्कॉम) की सेहत दुरुस्त करने के लिए भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) सरकार द्वारा लाई गई दूसरी सुधार योजना की शुरुआत 38 डिस्कॉम के साथ होगी। इन 38 डिस्कॉम को पात्रता मानदंड पूरा करने के कारण वित्तपोषण की मंजूरी मिल गई है। अधिकारियों ने कहा कि रिवैंप्ड डिस्ट्रीब्यूशन सेक्टर स्कीम (आरडीएसएस) के तहत 3 लाख करोड़ रुपये राशि में से 65 प्रतिशत के करीब राशि इन डिस्कॉम के हिस्से आई है।
उपरोक्त उल्लिखित डिस्कॉम में राजस्थान, बिहार, उत्तर प्रदेश, हरियाणा, तमिलनाडु, आंध्र प्रदेश, असम, जम्मू कश्मीर, मध्य प्रदेश, केरल, मिजोरम, झारखंड और छत्तीसगढ़ की बिजली वितरण कंपनियां शामिल हैं। बिजली मंत्रालय द्वारा जुलाई 2021 में योजना को अधिसूचित करने के बाद पिछले साल दिसंबर में 52 डिस्कॉम ने विस्तृत परियोजना रिपोर्ट (डीपीआर) सौंपी थी। आरडीएसएस की घोषणा  पिछले साल बजट में की गई थी।
डिस्कॉम के लिए स्वीकृत 1.9 लाख करोड़ रुपये में से करीब 92,000 करोड़ रुपये हानि कम करने के बुनियादी ढांचा तैयार करने के लिए दिए जाएंगे। वहीं 10,000 करोड़ रुपये स्मार्ट मीटर लगाने के लिए आवंटित किए गए हैं। शेष राशि राज्य विशेष के लिए परियोजनाओं हेतु है, जिससे उनके डीपीआर के लक्ष्य को हासिल किया जा सके।
एक वरिष्ठ अधिकारी ने कहा कि पहले चरण में डिस्कॉम घाटा कम करने की पहल पर ध्यान देंगी और दूसरे चरण में वे व्यवस्था मजबूत करने पर ध्यान देंगी। केंद्रीय बिजली सचिव आलोक कुमार ने बिजनेस स्टैंडर्ड के साथ एक साक्षात्कार में कहा था कि आरडीएसएस के तहत मंत्रालय की प्राथमिकता हानि कम करने पर है।
कुमार ने कहा था, ‘हमने राज्यों से कहा था कि पहले चरण में डीपीआर का 50 प्रतिशत लोड घटाने के निवेश जैसे एरियल बंच केबलिंग, फीडर मजबूत करने, स्मार्ट मीटर लगाने आदि पर ध्यान होना चाहिए।’
बहरहाल गुजरात जैसी लाभ में चल रही डिस्कॉम के लिए बिजली मंत्रालय ने नई पहल जैसे एससीएडीए (रिमोट ग्रिड मॉनीटरिंग), आईटी इन्फ्रास्ट्रक्चर आदि के लिए धन जारी किया है।
अधिकारियों ने कहा कि पात्रता मानदंड पूरा करने वाले राज्य/डिस्कॉम को स्टेटमेंट आफ पर्पज (एसओपी)  में हानि कम करने व बुनीयादी ढांचे के सृजन को लेकर अनुमान की प्रतिबद्धता जतानी होगी। अधिकारी ने कहा, ‘पूर्व पात्रता मानदंड में इन डिस्कॉम के लिए अनिवार्य किया गया है कि वे लागत प्रभावी शुल्क, तकनीकी व वाणिज्यिक हानि में कमी, मीटर वाले कनेक्शन, लागत राजस्व अंतर को पूरा करने और बिजली उत्पादन कंपनियों का अपना बकाया कम करने की प्रतिबद्धता जताएं।’
जिस राज्य सरकार की डिस्कॉम है, उसे राज्य के विभागों के डिस्कॉम के बकाये को कम करने, नियामकीय संपत्ति कम करने और राज्य बिजली नियामक आयोगों (एसईआरसी) के साथ मिलकर नियमित रूप से बिजली की दरों में बदलाव का काम सुनिश्चित करना होगा।
इस अखबार ने पहले खबर दी थी कि डिस्कॉम की प्रगति की जांच के लिए सालाना अप्रेजल किया जाएगा और उसके मुताबिक वित्तपोषण होगा। अधिकारियों ने कहा कि अगर डिस्कॉम लक्ष्य पूरा करने में असफल रहती हैं तो उन्हें आगे कोई वित्तपोषण नहीं किया जाएगा और उन्हें इस योजना के लिए शुरुआत से आवेदन करना होगा।
अधिकारियों ने कहा कि इसके बारे में फैसला करने का सबसे अहम मानदंड कुल तकनीकी व वाणिज्यिक (एटीऐंजसी) हानि कम करना, एसीएस-एएआर (लागत-राजस्व) में अंतर और नियामकीय संपत्ति होंगे।
बिजली मंत्रालय के एक वरिष्ठ अधिकारी ने कहा, ‘सभी डीपीआर और डिस्कॉम की प्रगति को जल्द ही एक सार्वजनिक प्लेटफॉर्म पर अपलोड कर दिया जाएगा और इसे समय समय पर अद्यतन किया जाएगा।’

First Published - July 10, 2022 | 11:45 PM IST

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