ऊंची कीमतों के चलते वैश्विक मांग में कमी से मौजूदा तेल विपणन वर्ष (अक्टूबर 2021-सितंबर 2022) के शुरुआती 10 महीनों के दौरान भारत से सोया खली का निर्यात 69 प्रतिशत घटकर 5.86 लाख टन पर सिमट गया। पिछले विपणन वर्ष में अक्टूबर से जुलाई के बीच देश से 18.98 लाख टन सोया खली का निर्यात किया गया था। प्रसंस्करणकर्ताओं के इंदौर स्थित संगठन सोयाबीन प्रोसेसर्स एसोसिएशन ऑफ इंडिया (सोपा) के एक अधिकारी ने बुधवार को यह जानकारी दी।
जानकारों ने बताया कि मौजूदा तेल विपणन वर्ष के दौरान भी अंतरराष्ट्रीय बाजार में भारतीय सोया खली के भाव अमेरिका, ब्राजील और अर्जेंटीना के इस उत्पाद के मुकाबले ऊंचे बने हुए हैं और भारतीय सोया खली की मांग में गिरावट का सबसे बड़ा कारण यही है। गौरतलब है कि अमेरिका, ब्राजील और अर्जेंटीना की गिनती दुनिया के सबसे बड़े सोयाबीन उत्पादकों के रूप में होती है और ये देश सोया खली की मूल्य प्रतिस्पर्धा में आगे रहते हैं। प्रसंस्करण कारखानों में सोयाबीन का तेल निकाल लेने के बाद बचने वाले उत्पाद को सोया खली कहते हैं। यह उत्पाद प्रोटीन का बड़ा स्रोत है। इससे सोया आटा और सोया बड़ी जैसे खाद्य पदार्थों के साथ पशु आहार तथा मुर्गियों का दाना भी तैयार किया जाता है।