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एल्युमीनियम पर अदाणी का बड़ा दांव

Last Updated- December 11, 2022 | 4:35 PM IST

अदाणी समूह ने अभी तो बड़ी एल्युमिना रिफाइनरी स्थापित करने की घोषणा की है मगर मूल धातु के क्षेत्र में उसके और भी बड़े इरादे हो सकते हैं। इस दिग्गज कंपनी और ओडिशा सरकार के बीच चल रही बातचीत को इशारा मानें तो समूह एल्युमीनियम उत्पादन में उतरने की संभावनाएं खंगाल रहा है। इस्पात के बाद दुनिया में सबसे ज्यादा इस्तेमाल होने वाली धातु एल्युमीनियम ही है। 
अदाणी समूह ने पिछले गुरुवार को घोषणा की थी कि नवीन पटनायक की अगुआई वाली ओडिशा सरकार के एक उच्च स्तरीय मंजूरी प्राधिकरण ने उसकी दो परियोजनाओं को मंजूरी दे दी है। इनमें सालाना 40 लाख टन क्षमता की एकीकृत एल्युमिना रिफाइनरी भी शामिल है। यह परियोजना रायगढ़ जिले के काशीपुर में स्थापित होगी, जिस पर 41,653 करोड़ रुपये का निवेश होगा। मगर एल्युमीमियम की योजनाएं किसी अन्य जगह पर आकार ले सकती हैं। 
ओडिशा के उद्योग विभाग के प्रधान सचिव हेमंत शर्मा ने बिज़नेस स्टैंडर्ड को बताया कि एल्युमिना से एल्युमीनियम बनाने पर अदाणी समूह के साथ बातचीत चल रही है। उन्होंने कहा, ‘एल्युमीनियम में बिजली की बहुत खपत होती है, इसलिए इसके संयंत्र की स्थापना वहां किया जाता है, जहां कोयला या पानी पास ही मिले। यह कहीं 
और लगेगा।’
अदाणी ने बिज़नेस स्टैंडर्ड के ईमेल का जवाब नहीं दिया। मगर 41,653 करोड़ रुपये के जिस निवेश की घोषणा की गई है, उसमें सालाना 40 लाख टन क्षमता की एक एल्युमिना रिफाइनरी और समूह के इस्तेमाल के लिए 175 मेगावाट का एक बिजली संयंत्र ही शामिल है। 
एल्युमीनियम उत्पादन की प्रक्रिया में एल्युमिना इस्तेमाल होता है। इस परियोजना की घोषणा के समय जारी समूह के बयान में कहा गया है कि यह एकीकृत एल्युमिना रिफाइनरी संभावित बॉक्साइट भंडारों या पहले से चालू खदानों के नजदीक स्थापित होगी। इसमें स्मेलटर-ग्रेड (धातु ग्रेड) के एल्युमिना का उत्पादन होगा, जो भारत को आयात का विकल्प तैयार करने की दिशा में आगे बढ़ने में मदद देगा। 
भारत एल्युमिना का शुद्ध आयातक है, लेकिन अदाणी रिफाइनरी लगने के बाद देश शुद्ध निर्यातक बन सकता है। क्रिसिल रिसर्च की निदेशक हेतल गांधी ने कहा, ‘अदाणी समूह के एल्युमिना कारोबार में उतरने से सरप्लस सालाना 40 लाख टन बढ़ने के आसार हैं, जिससे भारत एल्युमिना का शुद्ध निर्यातक बन जाएगा।’अगर समूह एल्युमीनियम के उत्पादन में उतरता है तो बहुत कम कंपनियों की मौजूदगी वाले उद्योग में प्रतिस्पर्द्धा बढ़ जाएगी।
इस उद्योग पर केवल तीन कंपनियों- वेदांत, हिंडाल्को और सरकारी कंपनी नालको का नियंत्रण है। वेदांत सालाना 22.7 लाख टन, हिंडाल्को 13 लाख टन और नालको 4.6 लाख टन एल्युमीनियम का उत्पादन करती हैं। उत्पादकों को 1 टन एल्युमीनियम बनाने के लिए 2 टन एल्युमिना की जरूरत होती है। अदाणी समूह सालाना 40 लाख टन क्षमता की एल्युमिना रिफाइनरी से उसी तरह एल्युमीनियम क्षेत्र में बड़ा खिलाड़ी बन सकता है, जैसे सीमेंट क्षेत्र में बना है।  लेकिन इसके लिए उसका तरीका अलग होगा। समूह हाल ही में भारत में होल्सिम के कारोबार का अधिग्रहण कर एक ही झटके में सीमेंट क्षेत्र में दूसरा सबसे बड़ा उत्पादक बन गया है। लेकिन एल्युमीनियम में नया कारोबार खड़ा किया जा रहा है, जिसमें समय लग सकता है। 

First Published - August 17, 2022 | 10:45 AM IST

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