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Akshaya Tritiya 2026 : सोने और चांदी की रिकॉर्ड कीमतों के बाद ₹20,000 करोड़ के कारोबार का अनुमान

अक्षय तृतीया पर रिकॉर्ड कीमतों के बावजूद 20,000 करोड़ रुपये के कारोबार का अनुमान है। ज्वैलर्स का कहना है क भारी गहनों की जगह अब लोग हल्के आभूषण और डिजिटल गोल्ड पसंद कर रहे हैं

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ऋषभ राज   
Last Updated- April 19, 2026 | 4:38 PM IST

अक्षय तृतीया को भारतीय परंपरा में कभी न खत्म होने वाली ‘समृद्धि’ का प्रतीक माना जाता है। साल 2026 की यह अक्षय तृतीया अपनी भारी-भरकम कीमतों के कारण इतिहास के पन्नों में दर्ज होने जा रही है। सोने और चांदी के भाव आसमान छू रहे हैं, लेकिन फिर भी लोगों की आस्था कम नहीं हुई है।

कॉन्फेडरेशन ऑफ ऑल इंडिया ट्रेडर्स (CAIT) के मुताबिक, इस साल देश भर में लगभग 20,000 करोड़ रुपये के व्यापार का अनुमान है, जो पिछले साल के 16,000 करोड़ रुपये के मुकाबले एक बड़ी उछाल है। अकेले देश की राजधानी दिल्ली में करीब 6 हजार करोड़ रुपये का कारोबार होने की उम्मीद जताई गई है।

सोने-चांदी की रिकॉर्ड कीमतें और बाजार का बदला मिजाज

चांदनी चौक से सांसद और कैट के राष्ट्रीय महामंत्री प्रवीन खंडेलवाल का कहना है कि अक्षय तृतीया हमेशा से सोना खरीदने का सबसे शुभ मुहूर्त रहा है। ऐसी मान्यता है कि आज के दिन किया गया निवेश कभी घटता नहीं है। हालांकि, इस बार कीमतों ने सबको चौंका दिया है।

पिछले साल सोना जहां 1,00,000 रुपये प्रति 10 ग्राम के आसपास था, वहीं इस साल यह उछलकर लगभग 1.58 लाख रुपये तक पहुंच गया है। चांदी की स्थिति और भी हैरान करने वाली है; यह 85,000 रुपये प्रति किलो से बढ़कर 2.55 लाख रुपये प्रति किलो के ऐतिहासिक स्तर पर है।

खंडेलवाल के मुताबिक, इन ऊंची कीमतों ने ग्राहकों के खरीदने के तरीके को बदल दिया है। लोग अब अंधाधुंध खरीदारी के बजाय बहुत सोच-समझकर और बजट को ध्यान में रखकर निवेश कर रहे हैं। बाजार में मांग तो मजबूत है, लेकिन खरीदारी का स्वरूप अब मूल्य-आधारित (Value-based) हो गया है।

ज्वैलर्स की नई रणनीति: हल्के गहने और लुभावने ऑफर्स

बाजार के बदलते रुख को देखते हुए देशभर के सर्राफा व्यापारियों ने भी अपनी तैयारी बदल ली है। कैट के राष्ट्रीय अध्यक्ष श्री बी. सी. भरतिया ने बताया कि ज्वैलर्स अब भारी आभूषणों के बजाय हल्के वजन वाले गहनों पर ज्यादा ध्यान दे रहे हैं। मिडिल क्लास बजट को ध्यान में रखते हुए चांदी और हीरे के ऐसे उत्पाद तैयार किए गए हैं जो रोजमर्रा में पहने जा सकें।

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भरतिया ने कहा, “ग्राहकों को आकर्षित करने के लिए मेकिंग चार्ज में अच्छी-खासी छूट दी जा रही है और छोटे-छोटे सोने के सिक्कों जैसे ऑफर भी खूब चलाए जा रहे हैं।”

उन्होंने यह भी कहा कि पहली नजर में कारोबार का कुल पैसा बढ़ता हुआ दिखता है, लेकिन अगर इसे वजन या मात्रा के हिसाब से देखें, तो असली तस्वीर कुछ अलग ही दिखाई देती है।

क्या कहते हैं आंकड़े: प्रति ज्वैलर कितनी हो रही बिक्री?

ऑल इंडिया ज्वैलर्स एंड गोल्डस्मिथ फेडरेशन (AIJGF) के राष्ट्रीय अध्यक्ष पंकज अरोड़ा ने आंकड़ों के जरिए बाजार की असली तस्वीर समझाई। उनके मुताबिक, 16,000 करोड़ रुपये के सोने के कारोबार का मतलब आज की कीमतों के हिसाब से करीब 10,000 किलो (यानी 10 टन) सोने की बिक्री है। अगर इसे देशभर के करीब 2 से 4 लाख ज्वैलर्स में बांटें, तो हर ज्वैलर के हिस्से में औसतन सिर्फ 25 से 50 ग्राम सोना ही आता है।

चांदी का भी कुछ ऐसा ही हाल है। 4,000 करोड़ रुपये की चांदी की बिक्री का मतलब करीब 157 टन चांदी बिकना है। इस हिसाब से हर ज्वैलर औसतन सिर्फ 400 से 800 ग्राम चांदी ही बेच पा रहा है। अरोड़ा के मुताबिक ये आंकड़े साफ दिखाते हैं कि कीमतें बहुत ज्यादा बढ़ने से कारोबार की रकम तो बढ़ गई है, लेकिन असल में लोग कम सोना-चांदी खरीद रहे हैं। यही वजह है कि इस बार छोटे सिक्कों और हल्के गहनों की मांग सबसे ज्यादा है।

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व्यापारियों का कहना है कि इस समय सबसे बड़ी परेशानी स्टॉक संभालने की है, क्योंकि कीमतें लगातार बदल रही हैं। साथ ही लोग अब पारंपरिक खरीदारी के साथ-साथ डिजिटल गोल्ड, सॉवरेन गोल्ड बॉन्ड (SGB) और गोल्ड ETF जैसे विकल्पों की तरफ भी बढ़ रहे हैं, जो एक नई चुनौती बनकर सामने आ रहा है।

First Published : April 19, 2026 | 4:16 PM IST