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पारेषण परियोजनाओं की मंजूरी होगी तेज

Last Updated- December 11, 2022 | 11:55 PM IST

बिजली मंत्रालय ने पारेषण की राष्ट्रीय समिति (एनसीटी) और केंद्रीय पारेषण इकाई (सीटीयू) को शक्ति देने का फैसला किया है, जिससे बिजली पारेषण परियोजनाओं की योजना में तेजी लाई जा सके।
एक राज्य से दूसरे राज्य में पारेषण व्यवस्था (आईएसटीएस) की मंजूरी तेज करने के लिए 100 करोड़ रुपये तक की आईएसटीएस परियोजनाओं के विस्तार के प्रस्ताव को सीटीयू मंजूरी देगी और 100 करोड़ और 500 करोड़ रुपये के बीच की परियोजनाओं को एनसीटी मंजूरी देगा। बिजली मंत्रालय 500 करोड़ रुपये से ऊपर के  प्रस्तावों को मंजूरी देगा।
अधिकारियों ने कहा कि सरकारी बिजली पारेषण कंपनी पावर ग्रिड कॉर्पोरेशन आफ इंडिया का हिस्सा रही सीटीयू को इससे हटा दिया गया है और मार्च के अंत तक एक अलग कंपनी होगी। अब तक सभी प्रस्तावों को एनसीटी की सिफारिशों के बाद बिजली मंत्रालय द्वारा मंजूरी दी जाती थी।
केंद्र सरकार ने क्षेत्रीय बिजली समितियों को भंग करने व उनके कामकाज में बदलाव करने का फैसला किया है। आईएसटीएस परियोजनाओं की मंजूरी की प्रक्रिया में दो क्षेत्रीय समितियां क्षेत्रीय बिजली समिति (आरपीसी) और क्षेत्रीय बिजली समिति-पारेषण योजना (आरपीसी-टीपी) से अलग अलग परामर्श किया जाता है। मंत्रालय का कहना है कि इससे प्रक्रिया में देरी होती है।
बिजली मंत्रालय ने एक बयान में कहा है, ‘क्षेत्रीय परामर्श में दोहरीकरण से बचने और योजना की प्रक्रिया में लगने वाले वक्त में कमी लाने के लिए आरपीसी-टीपी को भंग कर दिया गया है और आरपीसी के अधिकार क्षेत्र में बदलाव किया जाएगा, जिससे आईएसटीएस की योजना और मंजूरी की प्रक्रिया में क्षेत्रीय परामर्श सुविधाजनक हो सके। 500 करोड़ रुपये तक के प्रस्ताव में आरपीसी से पहले परामर्श करने की जरूरत नहीं होगी।’
मंत्रालय ने कहा है कि ये कदम देश में अक्षय ऊर्जा परियोजनाओं की वृद्धि को गति देने की दिशा में हैं। मंत्रालय ने कहा कि अक्षय ऊर्जा (आरई) क्षमता में वृद्धि को गति देने के लिए सौर/पवन ऊर्जा की ज्यादा क्षमता वाले क्षेत्रों को आईएसटीएस से जोड़े जाने की जरूरत है, जिससे कि आरई क्षमता में बढ़ोतरी हो सके।
मंत्रालय ने कहा, ‘यह हमारे ऊर्जा क्षेत्र में बदलाव के लक्ष्य के रूप में राष्ट्रीय मिशन का हिस्सा है। एनसीटी के कार्य क्षेत्र में बलाव करने से जरूरी आईएसटीएस व्यवस्था के समय से विकास में मदद मिलेगी, जिससे कि 2030 तक 450 गीगावॉट अक्षय ऊर्जा उत्पादन का लक्ष्य हासिल किया जा सके।’
केंद्र सरकार जल्द ही 44 नई बिजली पारेषण परियोजनाओं को मंजूरी देगी, जिसकी अनुमानित लागत 41,369 करोड़ रुपये है। इनमें से ज्यादातर परियोजनाएं हरित ऊर्जा गलियारा (जीईसी) योजना के तहत हैं, जिसकी जानकारी हाल में बिजनेस स्टैंडर्ड ने दी थी। इन परियोजनाओं से 38 गीगावॉट अक्षय ऊर्जा का पारेषण पश्चिमी इलाकों से उत्तरी इलाकों में किया जा सकेगा। इस तरह बड़े पैमाने पर पारेषण परियोजनाओं की पेशकश कम से कम 3 साल के अंतराल के बाद की जाने वाली है।
परंपरागत बिजली उत्पादन के विपरीत, जिसमें लंबा वक्त लगता है, आरई उत्पादन संयंत्र लगाने में करीब 18 महीने की जरूरत होती है, जबकि पारेषण व्यवस्था के लिए 18 से 24 महीने लगते हैं। मंत्रालय ने कहा है कि पारेषण योजना और मंजूरी की प्रक्रिया में तेजी लाए जाने से आईएसटीएस चालू करने व आरई परियोजना चालू करने के बीच लगने वाले वक्त का अंतर कम हो जाएगा। 

First Published - October 28, 2021 | 10:53 PM IST

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