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खरीद घटने से गेहूं निर्यात पर अनिश्चितता के बादल

Last Updated- December 11, 2022 | 7:25 PM IST

व्यापार से जुड़े सूत्रों का कहना है कि भारत गेहूं के बड़े पैमाने पर निर्यात की योजना पर पुनर्विचार कर सकता है। उनके मुताबिक आटे की कीमतों में तेज बढ़ोतरी को रोकने के लिए इसकी जरूरत होगी, क्योंकि गेहूं की खरीद में कमी आई है और पहले के अनुमान की तुलना में उत्पादन कम रहने की संभावना है।
आधिकारिक आंकड़ों के मुताबिक 2022-23 विपणन वर्ष में 24 अप्रैल तक गेहूं खरीद 136.9 लाख टन रही है, जो पिछले साल की समान अवधि की तुलना में 35 प्रतिशत कम है। इस दौरान मंडियों में गेहूं की आवक पिछले साल की समान अवधि की तुलना में करीब 20 प्रतिशत कम रही है।
संशोधित निर्यात अनुमान मार्च में लगाए गए रिकॉर्ड निर्यात के अनुमान के विपरीत है, जो फसल पर गर्म हवाओं के असर और आधिकारिक खरीद में कमी के आंकड़े सामने आने के पहले लगाया गया था।
कुछ बाजार हिस्सेदारों का अनुमान था कि वित्त वर्ष 23 में गेहूं का निर्यात करीब 210 लाख टन पहुंच जाएगा। बहरहाल व्यापार से जुड़े सूत्रों के मुताबिक वित्त वर्ष 23 (अप्रैल-जून) के पहले तीन महीनों के दौरान भारत से 35 से 40 लाख टन निर्यात के सौदे हुए। इसमें से करीब 10 लाख टन भेजा जा चुका है, जिसमें ज्यादातर गेहूं बांग्लादेश और नेपाल गया है।
इसके अलावा व्यापार से जुड़े सूत्रों का अनुमान है कि जुलाई-सितंबर के दौरान भारत 17.5 से 20 लाख टन गेहूं का निर्यात और कर सकता है क्योंकि मॉनसून के दौरान ढुलाई में समस्या आती है।  
व्यापार से जुड़े एक वरिष्ठ अधिकारी ने कहा, ‘सरकार को इस पर फैसला करना है कि क्या वह निर्यात का विकल्प खुला रखती है या इससे इतर फैसला करती है। यह खरीद के अंतिम आंकड़ों और मांग के परिदृश्य पर निर्भर होगा।’
उन्होंने कहा कि सितंबर तक केंद्र सरकार की प्रधानमंत्री गरीब कल्याण अन्न योजना या पीएमजीकेएवाई खत्म हो जाएगी, जो मु त अनाज वितरण की योजना है।
एक व्यापारी ने कहा, ‘उ मीद है कि वैश्विक बाजार भी बहुत ज्यादा अनुकूल नहीं होगा, क्योंकि रूस जून में अपना गेहूं निर्यात बहाल कर देगा।’
हालांकि खरीद को लेकर व्यापार के सूत्र इस बात से सहमत हैं कि वित्त वर्ष 23 में गेहूं की आधिकारिक खरीद 250 लाख टन से ज्यादा नहीं होगी, जो रखे गए लक्ष्य से 194 लाख टन कम है।
व्यापार से जुड़े एक और अधिकारी ने कहा, ‘अगले 15 दिन में देश भर की मंडियों में करीब 10 लाख टन गेहूं आएगा। इससे यह सुनिश्चित होगा कि खरीद 220 से 250 लाख टन पहुंच जाएगी। लेकिन अगर आवक में आगे और गिरावट आती है तो खरीद में और गिरावट आ सकती है।’
अधिकारियों ने कहा कि अगर खरीद घटकर 250 लाख टन रह जाती है और उसमें 190 लाख टन पुराने स्टॉक को जोड़ लें तो इस साल कुल करीब 440 लाख टन गेहूं उपलब्ध होगा।
इसमें करीब 250 लाख टन सार्वजनिक वितरण प्रणाली के लिए मांग होती है, जबकि पीएमजीकेएवाई और खुले बाजार में बिक्री के लिए 160 लाख टन गेहूं की और जरूरत होगी।
इससे विपणन वर्ष के अंत में स्टॉक (क्लोजिंग स्टॉक) अधिशेष के रूप में बहुत कम रह जाएगा, जब तक कि सरकार मु त अनाज वितरण कम करने या निर्यात पर रोक लगाने का फैसला नहीं करती है।
उत्पादन के बारे में ज्यादातर विशेषज्ञों का कहना है कि वित्त वर्ष 23 में भारत का गेहूं उत्पादन 1110 लाख टन के पहले के अनुमान से कम रह सकता है और यह 1,020 से 1,030 लाख टन रह सकता है।
बहरहाल खरीद बढ़ाने के लिए भारतीय खाद्य निगम (एफसीआई) ने गेहूं के सूखे दानों का अनुपात बढ़ाकर आठ प्रतिशत करने का फैसला किया है, जबकि पहले यह स्तर छह प्रतिशत रखा गया था। गर्म हवाओं के थपेड़ों के कारण फसल को हुए नुकसान को देखते हुए यह ढील दिए जाने का फैसला किया गया है।

First Published - April 30, 2022 | 12:57 AM IST

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