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इस्पात फर्मों को कोयले का झटका

Last Updated- December 12, 2022 | 12:18 AM IST

लौह एवं गैर-लौह धातुओं के विनिर्माण में इस्तेमाल होने वाले कोकिंग कोल एवं तापीय कोयले की कीमतों में हो रही लगातार वृद्धि का असर वित्त वर्ष 2021-22 की दूसरी तिमाही यानी जुलाई से सितंबर की अवधि में धातु कंपनियों के मार्जिन पर दिख सकता है। ब्रोकरेज फर्मों का कहना है कि इस्पात कंपनियों के मार्जिन को इसका तगड़ा झटका लग सकता है जबकि बेस फर्मों को फायदा होने के आसार हैं।
चूंकि धातु एक चक्रीय क्षेत्र है और ऐसे में सालाना आधार पर आय की तुलना करने से तस्वीर कहीं अधिक स्पष्ट होगी। हालांकि मौजूदा कोविड-19 वैश्विक महामारी और पिछले साल के कमजोर आधार के कारण मूल्य निर्धारण एवं मात्रात्मक बिक्री के रुझानों पर गौर करने के लिए क्रमिक आधार पर तुलना को भी ध्यान में रखा गया है। कोकिंग कोल इस्पात बनाने में इस्तेमाल होने वाला एक प्रमुख कच्चा माल है। इसकी कीमतों में क्रमिक आधार पर 25 से 30 डॉलर प्रति टन की बढ़ोतरी हुई है। इसके अलावा अन्य कच्चे माल के दाम भी बढ़े हैं। ब्रोकरेज फर्मों का कहना है कि इस्पात कंपनियों के मार्जिन पर अलग-अलग प्रभाव दिख सकता है जो कोयले की खपत के उनके पैटर्न (घरेलू और अंतरराष्ट्रीय) और कैप्टिव संसाधनों के हिस्से पर आधारित होगा। जहां तक इस्पात बनाने वाली देश की सबसे बड़ी कंपनी टाटा स्टील का सवाल है तो उसके घरेलू कारोबार पर कोकिंग कोल की लागत में वृद्धि का आंशिक प्रभाव दिखेगा। यहां तक कि एडलवाइस की रिपोर्ट में कहा गया है कि घरेलू प्राप्तियों में 2,000 रुपये प्रति टन वृद्धि होने की संभावना है। कंपनी के पास 25 से 30 फीसदी तक कोकिंग कोल का कैप्टिव स्रोत है जिससे उसकी प्राप्तियों को सहारा मिलता है।
जहां तक नवीन जिंदल के नेतृत्व वाली कंपनी जिंदल स्टील ऐंड पावर (जेएसपीएल) का सवाल है तो मात्रात्मक बिक्री में तेजी के बावजूद दूसरी तिमाही के दौरान उसके एबिटा को कोकिंग कोल और लौह अयस्क की कीमतों में तेजी का झटका लग सकता है। रिपोर्ट में कहा गया है कि प्राप्तियों के मोर्चे पर स्टील लॉन्ग में क्रमिक आधार पर 2,000 रुपये की कमी आई है जिससे एबिटा को रफ्तार मिलेगी। दूसरी तिमाही के दौरान जेएसपीएल के इस्पात की मात्रात्मक बिक्री क्रमिक आधार पर 32 फीसदी और सालाना आधार पर 10 फीसदी की वृद्धि के साथ रिकॉर्ड 21.3 लाख टन तक पहुंच गई। कंपनी ने अपनी हालिया रिपोर्ट में कहा है कि वित्त वर्ष 2022 की दूसरी तिमाही में जेएसपीएल की इस्पात बिक्री पहली बार 20 लाख टन के पार पहुंच गई।
सिस्टमैटिक्स इंस्टीट्यूशनल इक्विटी (एसआईई) का कहना है कि घरेलू इस्पात की कीमतों में तेजी को रोका गया है और फ्लैट एवं लॉन्ग उत्पाद की कीमतों में एक अंतर रहा है। दूसरी तिमाही आमतौर पर एक कमजोर तिमाही होती है और इसलिए घरेलू बाजार में मांग की रफ्तार सुस्त पड़ गई है। ऐसे में कंपनियां निर्यात पर जोर दे रही हैं। इससे बिक्री को निर्यात से रफ्तार मिल रही है और निर्यात की हिस्सेदारी दूसरी तिमाही में बढ़कर 40 फीसदी तक पहुंच गई जो पहली तिमाही में 34 फीसदी थी।
अनिल अग्रवाल की कंपनी वेदांत के एबिटा में समीक्षाधीन तिमाही के दौरान सालाना आधार पर 58 फीसदी और क्रमिक आधारपर 4 फीसदी की बढ़ोतरी हुई। वेदांत को कच्च्चे तेल की कीमतों में तेजी का भी फायदा मिल सकता है। हिंडाल्को इंडस्ट्रीज के एबिटा में सालाना आधार पर 36 फीसदी और क्रमिक आधार पर 5 फरीसदी की वृद्धि दर्ज की गई है।

First Published - October 12, 2021 | 11:36 PM IST

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