भारत में कोयले के घरेलू उत्पादन और आयातित कोयले के आंकड़ों से पता चलता है कि आपूर्ति में कमी की वजह से कोयले का संकट पैदा हुआ है, न कि ज्यादा मांग की वजह से। दशकों में पहली बार ऐसा हुआ है, जब कोयले की आपूर्ति (घरेलू और आयातित) लगातार 4 साल तक 2017 से 2020 के दौरान खपत की तुलना में कम रही है। इसकी वजह से पूरी आपूर्ति शृंखला में भंडार कम हो गया है।
बीपी ग्लोबल एनर्जी स्टैटिक्स के आंकड़ों के मुताबिक कैलेंडर वर्ष 2020 में भारत में कोयले की कुल आपूर्ति घटकर 5 साल के निचले स्तर 16.9 एक्साजोल्स (ईजे) कोयले के बराबर रही है जबकि खपत 17.54 ईजे कोयले के बराबर रही है।
कैलेंडर वर्ष 2020 में कोयले की आपूर्ति में कमी कोल इंडिया के 2020-21 में 4 सप्ताह के उत्पादन के बराबर रही है। सीआईएल की भारत के कुल कोयला उत्पादन में हिस्सेदारी करीब 80 प्रतिशत है।
बहरहाल हाल के वर्षों में औद्योगिक वृद्धि कम होने और एनर्जी मिक्स में अक्षय ऊर्जा की हिस्सेदारी बढऩे के कारण कोयले की मांग क म रही है। कुल मिलाकर कैलेंडर वर्ष 2020 में कोयले की खपत 5.7 प्रतिशत घटी, जो 3 साल का निचला स्तर है।
जेएम फाइनैंशियल इंस्टीट्यूशनल सिक्योरिटीज के प्रबंध निदेशक और मुख्य रणनीतिकार धनंजय सिन्हा ने कहा, ‘आंकड़ों से हाल के वर्षों में कोयले की आपूर्ति में कमी का पता चलता है। बिजली उत्पादन में मांग घटने और औद्योगिक गतिविधियां कम होने के बावजूद ऐसा हुआ है।’
एक ईजे पिछले 5 साल के औसत के हिसाब से करीब 593 लाख टन कोयले के बराबर होता है। वित्त वर्ष 21 में कोल इंडिया का कोयला उत्पादन 5,962 लाख टन रहा है, जो 10.1 ईजे कोयले के बराबर है।
कैलेंडर वर्ष 21 में भी स्थिति में कुछ बदलाव नहीं हुआ है। सीआईएल का कुल उत्पादन पिछले साल की समान अवधि की तुलना में जनवरी सितंबर के दौरान 2.3 प्रतिशत कम रहा है, जबकि उठान पिछले साल की तुलना में 0.1 प्रतिशत अधिक रही है।
कैलेंडर वर्ष 21 के पहले 9 महीनों के दौरान सीआईएल ने 4,532 लाख टन कोयले का उत्पादन किया है, जो कैलेंडर वर्ष 2020 की समान अवधि में 4,635 लाख टन था। इसकी तुलना में खननकर्ताओं ने जनवरी सितंबर के दौरान 4,726 लाख टन कोयले की लगान की है, जो पिछले साल के 4,720 लाख टन की तुलना में मामूली ज्यादा है।
आपूर्ति के मामले में सबसे बड़ा झटका पिछले 5 साल के दौरान कोयले के आयात में तेज कटौती की वजह से लगा है। कैलेंडर वर्ष 2020 में कोयले का आयात पिछले साल की तुलना में 10.2 प्रतिशत कम हुआ है। पिछले साल कोयले का आयात पिछले 7 साल के निचले स्तर पर था।