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उपकरण मरम्मत के अधिकार पर समिति

Last Updated- December 11, 2022 | 5:33 PM IST

कारों, मोबाइलों और अन्य उपभोक्ता वस्तुओं की मरम्मत और कलपुर्जों के बाजार पर एकाधिकार से चिंतित सरकार ने इन कंपनियों को ग्राहकों के साथ उत्पाद का ब्योरा साझा करना अनिवार्य किए जाने की योजना बनाई है, जिससे वे खुद या थर्ड पार्टी से मरम्मत करा सकें।
उपभोक्ता मामलों के मंत्रालय ने गुरुवार को एक बयान में कहा कि उसने अतिरिक्त सचिव निधि खरे की अध्यक्षता में एक समिति का गठन किया है, जिससे ‘राइट टु रिपेयर’ पर एक समग्र ढांचा विकसित किया जा सके।
समिति ने अपनी पहली बैठक 13 जुलाई, 2022 को की, जिसमें मरम्मत के अधिकार से जुड़े महत्त्वपूर्ण सेक्टरों को चिह्नित किया गया। जिन क्षेत्रों को चिह्नित किया गया है, उसमें कृषि उपकरण, मोबाइल फोन और टैबलेट, उपभोक्ता वस्तुएं और ऑटोमोबाइल और ऑटोमोबाइल उपकरण शामिल हैं। राइट टु रिपेयर फ्रेमवर्क को लेकर लोकल सर्किल द्वारा कराए गए एक सर्वे में पाया गया कि भारत में 43 प्रतिशत परिवारों के पास घर में 3 या इससे ज्यादा उपकरण होते हैं और 5 साल से कम ही समय में उनके मरम्मत की जरूरत पड़ जाती है। सामान्यतया यह पाया गया है कि कलपुर्जों पर विनिर्माताओं का प्रोपराइटी कंट्रोल होता है, जिसमें उसकी डिजाइन भी शामिल है। सरकार का मानना है कि मरम्मत को लेकर इस तरह के एकाधिकार से ग्राहकों के चयन के अधिकार का हनन होता है।
डॉक्टरों की पर्ची पर ही ऑनलाइन आयुर्वेदिक दवा
केंद्रीय उपभोक्ता संरक्षण प्राधिकरण (इसकी प्रमुख भी निधि खरे हैं) ने ई-कॉमर्स कंपनियों के  लिए परामर्श जारी कर निर्देश दिया है कि वे अपने प्लेटफॉर्म पर आयुर्वेदिक, सिद्ध या यूनानी दवाओं की बिक्री तभी करें, जब पंजीकृत चिकित्सकों की लिखी वैध पर्ची प्रस्तुत की जाए और उपयोगकर्ता उसे अपलोड करे।
बयान में कहा गया है कि मेडिकल निगरानी के बगैर ऐसी दवाओं के इस्तेमाल से स्वास्थ्य संबंधी गंभीर समस्याएं आ सकती हैं। उपभोक्ता संरक्षण अधिनियम के तहत सीसीपीए को ग्राहकों के संरक्षण प्रोत्साहन और अधिकारों के प्रवर्तन का  और उपभोक्ताओं के अधिकार के उल्लंघन को रोकने की शक्ति दी गई है।

First Published - July 15, 2022 | 12:01 AM IST

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