कर्नाटक उच्च न्यायालय ने तंबाकू और तंबाकू उत्पादों पर केंद्रीय उत्पाद शुल्क, राष्ट्रीय आपदा आकस्मिक शुल्क (एनसीसीडी) को वस्तु एवं सेवाकर (जीएसटी) के साथ लागू किए जाने की संवैधानिक वैधता बरकरार रखी है।
न्यायमूर्ति आलोक अराधे और न्यायमूर्ति एस विश्वजीत शेट्टी के खंडपीठ ने दरअसल न्यायालय के पहले का आदेश बरकरार रखा है, जो इस सिलसिले में एकल पीठ ने दिया था।
न्यायालय ने कहा है कि तंबाकू और तंबाकू उत्पादों के विनिर्माण पर उत्पाद शुल्क होगा और जीएसटी तंबाकू और तंबाकू उत्पादों की आपूर्ति पर है।
तंबाकू और तंबाकू उत्पाद बनाने वाली फर्म वीएस प्रोडक्ट्स ने 1 जुलाई, 2017 से जीएसटी लागू होने के बाद भी उत्पाद शुल्क और एनसीसीडी जारी रखने को चुनौती दी थी। इस समय तंबाकू पर उत्पाद शुल्क 0.5 प्रतिशत औऱ और एनसीसीडी 25 प्रतिशत लगाया जाता है। हालांकि 55 प्रतिशत छूट दी गई है, जिसका मतलब है कि प्रभावी दर 11.475 प्रतिशत है। तंबाकू उत्पादों की आपूर्ति पर 28 प्रतिशत जीएसटी लगता है और तंबाकू के पत्ते पर 5 प्रतिशत जीएसटी लगता है। इसके अलावा विभिन्न दरों से मुआवजा उपकर भी लगाया जाता है।
कंपनी ने कहा था कि तंबाकू और तंबाकू उत्पादों पर जीएसटी के साथ उत्पाद शुल्क लगाया जाना अनुच्छेद 14 का उल्लंन करता है और यह विभेदकारी है। कंपनी ने कहा था कि तंबाकू और तंबाकू उत्पाद ही एकमात्र जिंस है, जिसके मामले में अप्रत्यक्ष कर प्रणाली में भेदभाव किया जा रहा है।
बहरहाल न्यायालय ने कहा कि मानव खपत वाली एल्कोहलिक लिकर, पेट्रोलियम औऱ पेट्रोलियम उत्पादों, स्टांप शुल्क, तंबाकू और तंबाकू उत्पादों व अफीम को छोड़कर सभी वस्तुओं पर सिर्फ जीएसटी लगता है।