Crude Oil Outlook: पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव के बीच कच्चे तेल की कीमतों में जोरदार उछाल देखने को मिला है। 18 मार्च 2026 को ब्रेंट क्रूड करीब 112 डॉलर प्रति बैरल तक पहुंच गया, जो एक दिन पहले के मुकाबले करीब 9 प्रतिशत ज्यादा है। यह तेजी ईरान के साउथ पार्स गैस फील्ड पर हमले के बाद आई है, जो दुनिया के सबसे बड़े गैस भंडारों में से एक है। दुबई क्रूड की कीमत भी रिकॉर्ड स्तर पर पहुंच गई है। 17 मार्च को यह 157.66 डॉलर प्रति बैरल तक पहुंच गई, जो 2008 के पुराने रिकॉर्ड से भी ज्यादा है। वहीं ओमान क्रूड भी 152 डॉलर प्रति बैरल के ऊपर चला गया है।
तेल की कीमतें बढ़ने के साथ रिफाइनिंग कंपनियों पर दबाव बढ़ा है। सिंगापुर में रिफाइनिंग मार्जिन इस हफ्ते निगेटिव हो गए हैं। इसकी वजह कच्चे माल की कमी है, जिससे उत्पादन कम हुआ और मुनाफे पर असर पड़ा।
चॉइस ब्रोकरेज का मानना है कि मौजूदा कीमतों में अभी पूरी तरह से जोखिम शामिल नहीं हुआ है। अगर हालात ऐसे ही बने रहे और होर्मुज जलडमरूमध्य को लेकर तनाव जारी रहा, तो तेल की कीमतें और बढ़ सकती हैं। रिपोर्ट के मुताबिक, आने वाले हफ्तों में ब्रेंट क्रूड 130 डॉलर प्रति बैरल तक पहुंच सकता है।
डब्ल्यूटीआई क्रूड 99 डॉलर के ऊपर निकल गया है। केडिया एडवाइजरी के अनुसार, युद्ध शुरू होने के बाद से तेल की कीमतें करीब 50 प्रतिशत तक बढ़ चुकी हैं।
हालांकि, रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि भारतीय रिफाइनिंग कंपनियों की स्थिति अपेक्षाकृत बेहतर रह सकती है। इसकी वजह यह है कि भारत की रिफाइनरियां डीजल जैसे उत्पाद ज्यादा बनाती हैं, जिनकी मांग और मार्जिन बेहतर है। साथ ही, भारत कुछ हद तक मिडिल ईस्ट के तेल की जगह दूसरे स्रोतों से तेल ले रहा है, जिससे दबाव कम हो सकता है।
रिपोर्ट में एक संभावना यह भी जताई गई है कि अगर अमेरिका, इजरायल और ईरान के बीच बातचीत शुरू होती है और होर्मुज जलडमरूमध्य खुला रहता है, तो तेल की कीमतें गिरकर 80 डॉलर प्रति बैरल तक आ सकती हैं।