facebookmetapixel
रेट कट का असर! बैंकिंग, ऑटो और रियल एस्टेट शेयरों में ताबड़तोड़ खरीदारीTest Post कैश हुआ आउट ऑफ फैशन! अक्टूबर में UPI से हुआ अब तक का सबसे बड़ा लेनदेनChhattisgarh Liquor Scam: पूर्व CM भूपेश बघेल के बेटे चैतन्य को ED ने किया गिरफ्तारFD में निवेश का प्लान? इन 12 बैंकों में मिल रहा 8.5% तक ब्याज; जानिए जुलाई 2025 के नए TDS नियमबाबा रामदेव की कंपनी ने बाजार में मचाई हलचल, 7 दिन में 17% चढ़ा शेयर; मिल रहे हैं 2 फ्री शेयरIndian Hotels share: Q1 में 19% बढ़ा मुनाफा, शेयर 2% चढ़ा; निवेश को लेकर ब्रोकरेज की क्या है राय?Reliance ने होम अप्लायंसेस कंपनी Kelvinator को खरीदा, सौदे की रकम का खुलासा नहींITR Filing 2025: ऑनलाइन ITR-2 फॉर्म जारी, प्री-फिल्ड डेटा के साथ उपलब्ध; जानें कौन कर सकता है फाइलWipro Share Price: Q1 रिजल्ट से बाजार खुश, लेकिन ब्रोकरेज सतर्क; क्या Wipro में निवेश सही रहेगा?Air India Plane Crash: कैप्टन ने ही बंद की फ्यूल सप्लाई? वॉयस रिकॉर्डिंग से हुआ खुलासा

कच्चे तेल के दाम 7 साल के उच्च स्तर पर

Last Updated- December 11, 2022 | 9:56 PM IST

बेंचमार्क तेल के दाम मंगलवार को वर्ष 2014 के बाद से अपने शीर्ष स्तर तक पहुंच गए, क्योंकि मध्य पूर्व की खाड़ी में हमलों के बाद आपूर्ति में संभावित रुकावट के कारण पहले से ही कम आपूर्ति वाले परिदृश्य और बिगाड़ दिया है।
ब्रेंट क्रूड वायदा के दाम 1.02 डॉलर या 1.2 प्रतिशत बढ़कर 87.50 डॉलर प्रति बैरल (9 बजकर 24 मिनट पर, ग्रीविच मीन टाइम) हो गए, जबकि यूएस वेस्ट टेक्सास इंटरमीडिएट (डब्ल्यूटीआई) क्रूड का वादा भाव 1.36 डॉलर या 1.6 प्रतिशत उछलकर 85.18 डॉलर प्रति बैरल हो गया। सोमवार को कारोबार नरम रहा, क्योंकि यह अमेरिका का सार्वजनिक अवकाश का दिन था। मंगलवार को दोनों बेंचमार्क अक्टूबर 2014 के बाद से अपने शीर्ष स्तर तक पहुंच गए।
यमन के हैती समूह द्वारा संयुक्त अरब अमीरात (यूएई) पर हमला करने, ईरान-गठबंधन समूह और सऊदी अरब के नेतृत्व वाले गठबंधन के बीच संघर्ष बढऩे के बाद इस सप्ताह आपूर्ति की चिंता बढ़ गई है। ड्रोन और मिसाइल हमले शुरू करने के बाद, जिससे ईंधन के ट्रकों में विस्फोट हुआ और तीन लोग मारे गए, हैती आंदोलन ने चेतावनी दी है कि वह और अधिक केंद्रों को लक्ष्य बना सकता है, यूएई ने कहा है कि उसनेइन आतंकवादी हमलों का जवाब देने का अधिकार बचा रखा है।
यूएई तेल फर्म एडीएनओसी ने कहा कि उसने अपने मुसाफाह ईंधन डिपो में एक घटना के बाद अपने स्थानीय और अंतरराष्ट्रीय ग्राहकों को उत्पादों की निर्बाध आपूर्ति सुनिश्चित करने के लिए कारोबारी निरंतरता योजनाओं को सक्रिय कर दिया है। इसके अलावा ओपेक और इसके साथ वाले सदस्य रूस और यूक्रेन के बीच भी तनाव बढ़ रहा है। साथ ही साथ पेट्रोलियम निर्यातक देशों के संगठन (ओपेक) के भीतर कुछ उत्पादक देशों को कम निवेश और कटौती की वजह से तेल निकालने की अपनी स्वीकृत क्षमता के लिए मशक्कत करनी पड़ रही है। उनका रूस और सहयोगियों के साथ हर महीने 4,00,000 बैरल प्रतिदिन जोडऩे के लिए एक  समझौता है।
पीवीएम विश्लेषक तमस वर्गा ने कहा कि आम सहमति यह है कि निकट भविष्य में स्थिति में सुधार नहीं होगा।
 

First Published - January 18, 2022 | 11:19 PM IST

संबंधित पोस्ट