वस्तु एवं सेवा कर (जीएसटी) परिषद ने नई दिल्ली में आयोजित अपनी 46वीं बैठक में कपड़े पर जीएसटी की दर मौजूदा 5 फीसदी से बढ़ाकर 12 फीसदी करने के निर्णय को टाल दिया है। केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने आज कहा कि यह मामला जीएसटी दर को तर्कसंगत बनाने पर विचार करने वाले मंत्रिसमूह के पास भेज दिया गया है।
उन्होंने कहा कि गुजरात के वित्त मंत्री ने दरें नहीं बढ़ाने के लिए पत्र लिखा था। कपड़ा उत्पादों पर शुल्क वृद्धि के फैसले को टालने का निर्णय लिया गया है। कपड़ा उत्पादों पर पहले की तरह 5 फीसदी की ही दर से शुल्क लगेगा। उन्होंने कहा कि कई बैठकों में कपड़े पर व्युत्क्रम शुल्क ढांचे में सुधार पर चर्चा की गई है और इस मसले पर फिर से विचार किया जाएगा।
कन्फेडरेशन ऑफ ऑल इंडिया ट्रेडर्स (कैट) जैसे उद्योग एवं कारोबारी निकायों ने इस निर्णय का स्वागत किया है। कैट ने कहा कि इससे लाखों कपड़ा व्यापारियों को राहत मिली है जो पिछले एक महीने से तनाव में थे। कपड़े की तरह जूते-चप्पलों पर भी जीएसटी दर बढ़ाने के निर्णय को टालना चाहिए था।
शार्दूल अमरचंद मंगलदास ऐंड कंपनी में पार्टनर रजत बोस ने कहा, ‘कोरोना की तीसरी लहर की आशंका के बीच कपड़ा उत्पादों पर जीएसटी दर में वृद्घि टालने का निर्णय स्वागत योग्य कदम है। सरकार ने उद्योगों की चिंता पर ध्यान दिया जो अच्छी बात है।’
हालांकि विश्लेषकों और सरकारी अधिकारियों ने कहा कि व्युत्क्रम शुल्क ढांचे में संशोधन से राज्यों के लिए जीएसटी राजस्व बढ़ाने के कुछ रास्ते बंद हो सकते हैं। एक वरिष्ठ सरकारी अधिकारी ने कहा, ‘आखिरकार जीएसटी परिषद एक राजनीतिक निकाय है। कई दौर की चर्चा और उद्योग का विश्लेषण करने के बाद सितंबर में दरें बढ़ाने का निर्णय किया गया था।’
डेलॉयट इंडिया में पार्टनर एमएस मणि ने कहा, ‘कपड़ा उत्पादों पर जीएसटी दर वृद्घि को टालने से इस क्षेत्र के कई उत्पादकों को लाभ मिलेगा, खास तौर पर एसएमई और एमएसएमई को लेकिन व्युत्क्रम शुल्क ढांचे की समस्या का समाधान निकालना भी जरूरी है।’ जूता-चप्पल उद्योग भी भविष्य में कपड़े की तरह दर वृद्घि वापस लिए जाने की उम्मीद कर सकता है।
लखनऊ में 18 सितंबर को आयोजित जीएसटी परिषद की बैठक में जूते-चप्पलों और कपड़ों पर व्युत्क्रम शुल्क ढांचे को दुरुस्त करने का निर्णय किया गया था। इसके साथ ही 1 जनवरी, 2022 से जूते-चप्पल और कपड़ों पर जीएसटी 5 फीसदी से बढ़ाकर 12 फीसदी करने का निर्णय किया गया था।
सीतारमण से जब यह पूछा गया कि जूते-चप्पलों पर जीएसटी दर में बढ़ोतरी कायम रहेगी या नहीं, तो उन्होंने कहा कि इस बारे में कोई नया निर्णय नहीं लिया गया है।
गुरुवार को बजट पूर्व बैठक में तमिलनाडु के वित्त मंत्री पी त्यागराजन और राजस्थान के तकनीकी शिक्षा मंत्री सुभाष गर्ग ने भी जीएसटी दर में बढ़ोतरी वापस लेने की मांग की थी। पश्चिम बंगाल के पूर्व वित्त मंत्री अमित मित्रा और तेलंगाना के उद्योग मंत्री केटी रामाराव ने पहले भी केंद्र से कपड़ों पर जीएसटी बढ़ाने का निर्णय वापस लेने की अपील की थी।