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घट गई कपास की उत्पादकता

Last Updated- December 11, 2022 | 9:15 AM IST

कपास की खेती के लिए जेनेटिकली मोडिफॉयड बीटी कॉटन के 90 फीसदी इस्तेमाल के बावजूद कपास की उत्पादकता में पिछले साल के मुकाबले 27 किलोग्राम प्रति हेक्टेयर की कमी आयी है।
वर्ष 2007-08 के दौरान भारत में कपास की उत्पादकता 553 किलोग्राम प्रति हेक्टेयर थी जो वर्ष 2008-09 में घटकर 526 किलोग्राम प्रति हेक्टेयर हो गयी है। जबकि पिछले साल कपास की खेती के लिए मात्र 66 फीसदी हिस्सों में बीटी कॉटन का इस्तेमाल किया गया था।
जेनेटिकली मोडिफॉयड होने के कारण बीटी कॉटन को जीवाणुओं से सुरक्षित माना जाता है, लेकिन देश के कई हिस्सों में बीटी कॉटन में भी जीवाणु लगने से फसल खराब होने की खबर है। इन सबके बावजूद भारत कपास उत्पादन में इस साल भी विश्व में दूसरे स्थान पर कायम है।
विश्व में कपास का सबसे अधिक उत्पादन इस साल भी चीन में हुआ है। हालांकि चीन में भी पिछले साल के मुकाबले लगभग 50 लाख बेल (1 बेल = 170 किलोग्राम) की गिरावट आयी है। भारत में इस साल पिछले साल के मुकाबले 20 लाख बेल की गिरावट के साथ कुल उत्पादन 290 लाख बेल है तो अमेरिका इस साल भी पिछले साल की तरह 220 लाख बेल कपास उत्पादन के साथ तीसरे स्थान पर है।
मुंबई के माटुंगा स्थित केंद्रीय कपास प्रौद्योगिकी अनुसंधान संस्थान के वैज्ञानिकों के मुताबिक इस साल कपास उत्पादन के लिए 90 फीसदी हिस्सों में बीटी कॉटन के इस्तेमाल के कारण उत्पादन में बढ़ोतरी की उम्मीद थी, लेकिन देश के उत्तरी भाग से लेकर दक्षिणी भाग तक कपास की फसल में कीड़े लगने से उत्पादकता में कमी दर्ज की गयी।
हालांकि वैज्ञानिकों का यह भी कहना है कि बारिश कम होने की वजह से कपास के बीज पूर्ण रूप से अपने आकार को नहीं प्राप्त कर सके। इसका प्रभाव यह हुआ कि कपास चुनाई के दूसरे चरण में मात्र 30-40 फीसदी की प्राप्ति हो पायी। जबकि पिछले साल दूसरे चरण की चुनाई के दौरान 60 फीसदी तक कपास की प्राप्ति हुई थी। 
चीन में कपास की उत्पादकता 1265 किलोग्राम प्रति हेक्टेयर है तो अमेरिका में 985 किलोग्राम प्रति हेक्टेयर। विश्व में कपास की औसत उत्पादकता 785 किलोग्राम प्रति हेक्टेयर है। जबकि भारत में यह मात्र 526 किलोग्राम प्रति हेक्टेयर है।

First Published - May 6, 2009 | 10:55 PM IST

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