चालू खरीफ सीजन में कपास का रकबा बढ़ने की खबरों के बावजूद कपास के दाम तेजी से बढ़ रहे हैं। पिछले एक महीने में कपास के भाव करीब 29 फीसदी बढ़ चुके हैं। कपास का शेष स्टॉक कम होने और फसल खराब होने की आशंका के चलते कीमतें लगातार बढ़ रही है। बढ़ती कीमतों पर लगाम लगाने के लिए मल्टी कमोडिटी एक्सचेंज (एमसीएक्स) ने कॉटन कारोबार पर सख्ती करना शुरु कर दिया है।
कपास की कीमतें लगातार बढ़ रही हैं। वायदा बाजार में कपास के दाम चालू महीने के शुरुआती 10 दिनों में करी ब 9 फीसदी बढ़ चुकी है। एमसीएक्स पर अगस्त वायदा कॉटन की कीमतें बढ़कर 48770 रुपये प्रति गांठ (एक गांठ में 70 किलोग्राम) हो गई। एमसीएक्स पर एक अगस्त को कॉटन वायदा की कीमत 44790 रुपये प्रति गांठ और चार जुलाई 37,650 रुपये प्रति गांठ बोली जा रही थी । वायदा बाजार के साथ हाजिर बाजार में भी कपास के भाव तेजी से बढ़े हैं।
हाजिर बाजार में कपास के दाम बढ़कर 45,500 रुपये प्रति गांठ पहुंच गए।
देश में कपास का रकबा बढ़ने के बावजूद कीमतों में तेज बढ़ोतरी हो रही है। बाजार में इसकी वजह सटोरियों की कपास वायदा में बढ़ती सक्रियता को मानी जा रही है। इस बात को ध्यान में रखते हुए वायदा एक्सचेंज की तरफ से सख्त कदम उठाए जाने लगे हैं। कॉटन की कीमतों में आई इस तेजी पर लगाम लगाने के लिए एमसीएक्स ने कॉटन वायदा को लेकर नए नियम जारी किये हैं। जिसके तहत अगस्त सीरीज के लिए नए नियम सोमवार से लागू हो गए हैं। नए नियमों के तहत डेली प्राइस लिमिट को 4 फीसदी से घटाकर दो फीसदी कर दिया गया है। वहीं अतिरिक्त मार्जिन को 6 फीसदी से बढ़ा कर 11 फीसदी कर दिया गया है।
बाजार जानकारों के मुताबिक कपास की कीमतों में हो रही तेज बढ़ोतरी की वजह बेहतर मांग और आपूर्ति में संभावित कमी है।
एसएमसी की कमोडिटी विशेषज्ञ वंदना भारती के मुताबिक कॉटन वायदा की कीमतें लगातार बढ़ रही है। कपड़ा उद्योग की ओर से बेहतर मांग और बारिश के कारण कपास की फसल को नुकसान होने की खबरों से कीमतों को मदद मिल रही है। तमिलनाडु में कताई मिलों द्वारा उन विक्रेताओं से कपास आयात करने के लिए किसी नए अनुबंध पर हस्ताक्षर करने की संभावना नहीं है जो अंतर्राष्ट्री य कपास संघ (आईसीए) के सदस्य हैं क्यों कि नियम और शर्ते एकतरफा हैं, जो खरीदारों के हितों के खिलाफ हैं। मिलों के पास कपास का शेष स्टॉक कम है, जबकि मंडियों में नई फसल की आवक सितंबर- अक्टूबर में ही शुरू होगी । जिससे कॉटन के कीमतों में अभी और बढ़ोतरी होती नजर आ रही है।
देश में कपास का रकबा तो पिछले साल से बेहतर है लेकिन महाराष्ट्र और गुजरात जैसे राज्यों में फसल खराब होने की खबरें भी आ रही है। ओरिगो ई मंडी के सहायक महाप्रबंधक तरुण सत्संगी के मुताबिक भाव ऊंचे हैं और आपूर्ति में कमी है, जिसकी वजह से कपास के भाव ऊंचे ही बने रहेंगे। कमजोर आपूर्ति के कारण भाव में साल भर तेजी रही थी ।
भारत के साथ चीन में उत्पादन कम होने और चीन व अमेरिका में स्टॉक बढ़ाए जाने की वजह से मांग में तेजी आएगी, जिसके कारण इस साल भी कपास के भाव चढ़े रहने का अनुमान है यानी किसानों को उनकी फसल का बेहतर दाम मिलेगा ।
देश में अगले फसल वर्ष में तो कपास का उत्पादन बढ़ने के आसार हैं मगर फसल वर्ष 2021-22 में इसकी पैदावार कम रहने की आशंका जताई गई है। कॉटन असोसिएशन ऑफ इंडिया के मुताबिक 2021-22 में देश में कपास का उत्पादन गिरकर 315.32 लाख गांठ (1 गांठ में 170 किलो ) रहने का अनुमान है, जबकि 2020-21 में देश में 323.63 लाख गांठ कपास का उत्पादन हुआ था । वैश्विक उत्पादन में भी कमी होने का अनुमान व्यक्त किया जा रहा है। कॉटलुक ने अपने नवीनतम अपडेट में अमेरिका और ब्राजील में कम उत्पादन की वजह से 2022-23 के लिए वैश्विक कॉटन उत्पादन के अनुमान को 6,24,000 टन घटा कर 25.7 मिलियन मीट्रिक टन कर दिया है। सूखे की वजह से अमेरिका में उत्पादन थोड़ा कम रहने की आशंका है।
अमेरि का में कॉटन का उत्पादन 3.1 मिलियन मीट्रिक टन रहने का अनुमान है जो कि पूर्व के अनुमान 3.5 मिलियन मीट्रिक टन से कम है। भारत और चीन में कॉटन का उत्पादन क्रमशः 6 मिलियन मीट्रिक टन और 5.8 मिलियन मीट्रिक टन पर स्थिर रहने का अनुमान है। वहीं वियतनाम से मांग में कमी की वजह से 2022-23 में वैश्विक खपत के अनुमान को 1,50,000 टन घटा कर 25 मिलियन मीट्रिक टन कर दिया गया है।
केंद्रीय कृषि एवं किसान कल्याण मंत्रालय की हालिया रिपोर्ट के मुताबिक 5 अगस्त तक देशभर में 121.12 लाख हेक्टेयर रकबे में कपास की बोआई हो चुकी है। पिछले साल 5 अगस्त तक देश में कपास का रकबा 113.5 लाख हेक्टेयर ही था यानी पिछले साल के मुकाबले इस साल कपास का रकबा करीब सात फीसदी अधिक है।