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मांग घटने व लागत बढ़ने से फंसा हीरा उद्योग

Last Updated- December 11, 2022 | 5:00 PM IST

कच्चे माल की कीमत बढ़ने और पश्चिम के देशों में मंदी की धारणा बनने की वजह से सूरत का हीरा उद्योग स्थिर घरेलू और अंतरराष्ट्रीय मांग के हिसाब से तैयारी कर रहा है। यूरोप, अमेरिका, चीन और हॉन्गकॉन्ग के बाजारों में या तो सुस्ती है, या महंगाई बढ़ने के साथ स्थिरता की स्थिति है, जिसकी वजह से इस उद्योग की मांग में 5 प्रतिशत की कमी आई है। 
हीरा के व्यवसायी आने वाले त्योहारों के दौरान अक्टूबर से दिसंबर तक मांग तेज होने को लेकर सुनिश्चित नहीं हैं, क्योंकि स्थानीय खरीदार कन्फर्म ऑर्डर नहीं दे रहे हैं।पिछले डेढ़ महीने में कच्चे हीरे की कीमत में 10 से 15 प्रतिशत बढ़ोतरी हुई है। हीरे की तराशी करने वाली सूरत की लक्ष्मी डायमंड के साथ जुड़े बकुल गजेरा ने कहा कि रूस में मुख्यालय वाली खनन दिग्गज अलरोसा पर अमेरिका द्वारा प्रतिबंध लगाए जाने से आपूर्ति घटी है।
अलरोसा में रूस सरकार की आंशिक हिस्सेदारी है और मात्रा के हिसाब से 40 प्रतिशत और मूल्य के हिसाब से 30 प्रतिशत वैश्विक हीरे की आपूर्ति यह कंपनी करती है। अमेरिकी वित्त मंत्रालय ने अप्रैल 2022 में इस पर प्रतिबंध लगा दिया था।

गजेरा ने कहा, ‘पश्चिम के बाजारों में मंदी, चीन का बाजार न खुलने से मांग में गिरावट आई है। घरेलू मोर्चे पर भी देखें तो त्योहारी ऑर्डर अब तक आ जाते हैं और इसका कुछ असर पड़ सकता है।’ 
क्रिसिल रेटिंग ने अनुमान लगाया है कि वित्त वर्ष 2022-23 में भारत के हीरा उद्योग के राजस्व में 15-20 प्रतिशत यानी 19-20 अरब डॉलर की गिरावट आ सकती है। क्रिसिल रेटिंग में मुख्य रेटिंग अधिकारी सुबोध राय ने कहा, ‘कच्चे हीरे की कीमत में उतार-चढ़ाव को अमूमन तराशे गए हीरों के साथ जोड़ दिया जाता है, लेकिन मांग में कमी की वजह से तराशे गए हीरों की कीमत कच्चे हीरे के मुताबिक नहीं है। इसकी वजह से भारत के तराशी उद्योग के मुनाफे में इस वित्त वर्ष के दौरान 75 से 100 आधार अंक यानी 4 से 4.25 प्रतिशत की कमी आ सकती है। इसी के मुताबिक ब्याज कवरेज भी कमजोर हो सकता है।’

सूरत के प्रमुख हीरा कारोबारी कीर्ति शाह ने कहा कि अगर मौजूदा स्थिति बनी रही और घरेलू बाजार में मांग नहीं बढ़ती है तो मांग में 5 से 8 प्रतिशत की कमी आ सकती है। 
अप्रैल-जून 2022 के दौरान कच्चे हीरे सहित भारत के रत्न एवं आभूषण का आयात अमेरिकी डॉलर के हिसाब से 8.79 प्रतिशत और रुपये के हिसाब से 13.97 प्रतिशत बढ़ा है। ऐसा जाना जाता है कि विश्व में हर 10 में से 9 हीरे की तराशी सूरत में होती है, जहां 6000 से ज्यादा तराशी इकाइयां हैं जहां करीब 10 लाख कर्मचारी काम करते हैं और यहां का सालाना कारोबार 21 से 24 अरब डॉलर या 1.6 से 1.7 लाख करोड़ रुपये है।  

उद्योग को बोत्सवाना की खदान से उम्मीद है। माना जा रहा है कि यहां जल्द काम शुरू हो जाएगा। वहां की खदानों से कच्चा हीरा भारत में 4 से 6 महीने में पहुंचेगा, लेकिन यह आयात पर 10 प्रतिशत असर डाल सकता है। 
 

First Published - August 8, 2022 | 11:30 AM IST

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