facebookmetapixel
रेट कट का असर! बैंकिंग, ऑटो और रियल एस्टेट शेयरों में ताबड़तोड़ खरीदारीTest Post कैश हुआ आउट ऑफ फैशन! अक्टूबर में UPI से हुआ अब तक का सबसे बड़ा लेनदेनChhattisgarh Liquor Scam: पूर्व CM भूपेश बघेल के बेटे चैतन्य को ED ने किया गिरफ्तारFD में निवेश का प्लान? इन 12 बैंकों में मिल रहा 8.5% तक ब्याज; जानिए जुलाई 2025 के नए TDS नियमबाबा रामदेव की कंपनी ने बाजार में मचाई हलचल, 7 दिन में 17% चढ़ा शेयर; मिल रहे हैं 2 फ्री शेयरIndian Hotels share: Q1 में 19% बढ़ा मुनाफा, शेयर 2% चढ़ा; निवेश को लेकर ब्रोकरेज की क्या है राय?Reliance ने होम अप्लायंसेस कंपनी Kelvinator को खरीदा, सौदे की रकम का खुलासा नहींITR Filing 2025: ऑनलाइन ITR-2 फॉर्म जारी, प्री-फिल्ड डेटा के साथ उपलब्ध; जानें कौन कर सकता है फाइलWipro Share Price: Q1 रिजल्ट से बाजार खुश, लेकिन ब्रोकरेज सतर्क; क्या Wipro में निवेश सही रहेगा?Air India Plane Crash: कैप्टन ने ही बंद की फ्यूल सप्लाई? वॉयस रिकॉर्डिंग से हुआ खुलासा

केंद्र सरकार, रिफाइनरी व ग्राहकों की बढ़ेंगी मुश्किलें

Last Updated- December 12, 2022 | 3:42 AM IST

ब्रेंट क्रूड की कीमत 70 डॉलर प्रति बैरल से ऊपर चल रही है जिससे भारतीय रिफाइनरियों, उपभोक्ताओं और केंद्र सरकार पर मंडराते संकट का संकेत मिलता है।  
शुक्रवार को ब्रेंट क्रूड 72 डॉलर प्रति बैरल से ऊपर पर कारोबार कर रहा था। तेल की कीमत में यह तेजी कोविड-19 टीकाकरण कार्यक्रम के सफल क्रियान्वयन के बाद बड़ी अर्थव्यवस्थाओं के फिर से खुलने से साल के आगामी महीनों में मांग में तेजी की उम्मीद के कारण आया। यह सर्वाधिक प्रचलित बेंचमार्क है जिसपर वैश्विक कच्चा तेल कारोबार का करीब 75 फीसदी जुड़ा है।
कच्चे तेल की मांग को लेकर विश्लेषकों का आकलन फिलहाल 9.4 करोड़ बैरल प्रतिदिन का है जो महामारी के पूर्व के स्तरों से 60 लाख बैरल प्रतिदिन कम है। मांग को भूनाने वाले पेट्रोलियम निर्यातक देशों का संगठन एवं अन्य (ओपेक+) हैं जो दाम में और अधिक वृद्घि करने के लिए कच्चे तेल के उत्पादन में कटौती कर रहे हैं।
भारत में डेलॉइट (ऊर्जा, स्रोत और उद्योग) के लीडर देवाशीष मिश्रा ने कहा, ‘जैसे जैसे वैश्विक आर्थिक रिकवरी जोर पकड़ रही है तेल कीमतों में इजाफा हो रहा है और ओपेक देशों के द्वारा कृत्रिम आपूर्ति दबाव के कारण कीमतों बड़ी उछाल आने का बड़ा जोखिम है। कच्चे तेल की मौजूदा कीमतों पर ही खुदरा कीमतों में आग लगी हुई है और भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) ने इंगित किया है कि ईंधन की बढ़ती कीमतों से मुद्रास्फीति में उछाल आएगी और वृद्घि की संभावना प्रभावित हो सकती है। इसी के साथ ही ईंधन कीमतों पर उत्पाद शुल्क और मूल्य वर्धन कर व्यापक तौर पर हमारे सार्वजनिक खर्च को सहारा देते हैं।’
भारतीय रिफाइनरियां क्रूड के भारतीय बास्केट में नजर आने वाली कीमत पर कच्चा तेल खरीदती हैं। यह भारतीय रिफाइनरियों में प्रसंस्कृत कच्चा तेल के खट्टे गे्रड (ओमान और दुबई औसत) और मीठे ग्रेड (ब्रेंट डेटेड) की मिश्रित कीमत है।
यह सामान्यतया ब्रेंट से मामूली (5 से 10 फीसदी) सस्ता होता है लेकिन कीमत वृद्घि के समान पथ पर बढ़ता है। उपभोक्ताओं के लिए मोटे तौर पर कच्चे तेल की कीमत में हरेक डॉलर की वृद्घि पर पेट्रोल और डीजल की कीमतों में 30-35 पैसे की वृद्घि होती है। कई राज्यों में पेट्रोल की कीमत 100 रुपये प्रति लीटर से अधिक है।
विश्लेषकों को केंद्र की ओर से तेल कंपनियों पर और अधिक दबाव बनाए जाने की उम्मीद है। अगले वर्ष कई प्रमुख राज्यों में विधानसभा चुनाव होने वाले हैं जिनको ध्यान में रखते हुए उन्हें ईंधन की कीमत वृद्घि पर नियंत्रण रखने के लिए कहा जा सकता है।

 
 

First Published - June 14, 2021 | 12:08 AM IST

संबंधित पोस्ट