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चीनी की तेजी बिगाड़ न दे चुनावी जायका

Last Updated- December 11, 2022 | 12:21 AM IST

सरकार के लगातार प्रयासों के बावजूद चीनी की कीमतें तीन सालों के अधिकतम स्तर पर पहुंच गई हैं।
चीनी के मूल्य में हुई बढ़ोतरी से मांग और आपूर्ति के बीच का फर्क स्पष्ट नजर आता है। देश के सबसे बडे चीनी उत्पादक राज्य उत्तर प्रदेश में चीनी की एक्स-फैक्ट्री कीमतें 2,400 रुपये प्रति क्विंटल के स्तर पर पहुंच गई जो शनिवार को बंद हुए भाव से तीन प्रतिशत अधिक है।
भारत के शीर्षस्थ चीनी उत्पादक राज्य महाराष्ट्र में हाजिर कीमतें 3.2 फीसदी बढ़ कर 2,378 रुपये प्रति क्विंटल हो गईं। पिछले शुक्रवार को सरकार ने सरकारी एजेंसियों द्वारा 10 लाख टन चीनी के आयात पर 60 प्रतिशत का आयात शुल्क माफ कर दिया था। इससे अनुमान लगाया जा रहा था कि चीनी की कीमतों में नरमी आएगी लेकिन हुआ इसके ठीक विपरीत।
भारतीय चीनी मिल संघ (इस्मा) के नवीनतम आकलनों के मुताबिक 30 सितंबर को समाप्त हो रहे सीजन के दौरान देश में चीनी का उत्पादन चार साल में सबसे कम 145 लाख टन होने का अनुमान है। पिछले सीजन में 265 लाख टन चीनी का उत्पादन हुआ था और इस सीजन में उससे 45 प्रतिशत कम उत्पादन का अनुमान है।
गन्ने का रकबा घटने और रिकवरी में 10 प्रतिशत से अधिक की कमी आने से चीनी उत्पादन में कमी आई है। बहरहाल ओपनिंग स्टॉक 80 लाख टन और कच्ची चीनी के 15 लाख टन के आयात के बाद इस सीजन में कुल उपलब्धता का अनुमान 240 लाख टन है, जबकि खपत 225 लाख टन रहने का अनुमान है।
आईएसएमए को भी उम्मीद है कि अगले साल के उत्पादन में सुधार होगा, क्योंकि किसानों को समय से भुगतान मिलने के कारण वे बुआई की ओर आकर्षित होंगे। चीनी के उत्पादन में आई कमी की वजह से कीमतों पर असर पड़ा। दिल्ली में औसत खुदरा मूल्य 27 रुपये प्रति किलो है। पिछले साल के अक्टूबर महीने के बाद से इसकी कीमतों में 35 प्रतिशत की बढ़ोतरी हुई है।
चीनी की कीमतों में बढ़ोतरी से सरकार काफी चिंतित हुई, क्योंकि थोक मूल्य सूचकांक में चीनी का भारांक 3.62 प्रतिशत है। यह सीमेंट (1.73 प्रतिशत), गेहूं (1.38 प्रतिशत) से ज्यादा है और केवल लोहा और स्टील के संयुक्त भारांक 3.64 प्रतिशत से कम है।
बहरहाल उद्योग जगत के लोगों का मानना है कि इस बार किसानों को गन्ना की कीमतों का भुगतान समय से हुआ है, इसलिए वे गन्ना उत्पादन को छोड़कर अन्य खाद्यान्न के उत्पादन पर विचार नहीं करेंगे। चीनी की कीमतों में बढ़ोतरी दरअसल गन्ने की कीमतों में बढ़ोतरी के साथ-साथ हुई है।
आईएसएमए के अध्यक्ष समीर सोमैया ने पिछले महीने कहा था कि हम चीनी की कीमतों को गन्ने की कीमत से अलग नहीं कर सकते हैं। उत्तर प्रदेश में गन्ने की कीमतों में 15 रुपये प्रति क्विंटल की बढ़ोतरी हुई है और अब यह 140 रुपये प्रति क्विंटल हो गया है।
चुनाव आयोग भी माना
चुनाव आयोग ने सरकार को खुले सामान्य लाइसेंस के तहत शून्य शुल्क पर कच्ची चीनी के आयात की अनुमति दे दी है। इस बारे में अधिसूचना शीघ्र ही जारी कर दी जाएगी। वाणिज्य सचिव जी के पिल्लै ने आज संवाददाताओं को यह जानकारी दी। खुले सामान्य लाइसेंस के तहत शून्य शुल्क पर चीनी आयात करने पर निर्यात उत्तरदायित्व नहीं रहता।
अग्रिम लाइसेंस योजना के तहत कच्ची चीनी का आयात करने पर निर्यात का कुछ उत्तरदायित्व रहता है।उन्होंने कहा कि कच्ची तथा रिफाइंड चीनी के आयात पर शुल्क को समाप्त करने का फैसला किया गया है। इस बारे में चुनाव आयोग की मंजूरी पहले ही ले ली गई है।
उन्होंने कहा कि वित्त मंत्रालय चीनी पर सीमा शुल्क समाप्त करने संबंधी अधिसूचना शीघ्र ही प्रकाशित करेगा। उन्होंने कहा कि प्राथमिक रूप से यह कदम चीनी की कीमतों में स्थिरता के लिए उठाया गया है जिनमें तेजी का रुख दिख रहा है।
सरकारी कोशिश
फरवरी 2009: सरकार ने निर्यात की शर्त पर शुल्क मुक्त कच्ची चीनी के आयात की अनुमति दी
मार्च 2009: चार महीने के लिए स्टॉक और टर्नओवर सीमा लागू
मार्च 2009:अप्रैल-जून तिमाही के लिए बाजार बिक्री कोटा 54 लाख टन किया गया, जबकि पिछले साल का कोटा 52 लाख टन था
अप्रैल 2009: 10 लाख टन रिफाइंड चीनी के आयात पर 60 प्रतिशत शुल्क कम किया गया, कच्ची चीनी पर निर्यात की शर्त को वैकल्पिक बनाया गया

First Published - April 14, 2009 | 4:08 PM IST

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