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वैश्विक दाम गिरने से खाद्य तेल की मांग को मिलेगी रफ्तार

Last Updated- December 11, 2022 | 5:38 PM IST

अंतरराष्ट्रीय कीमत में गिरावट के बावजूद भारत के खाद्य तेल कारोबारियों पर असर कम पड़ा है। कीमत घटने से कठिन जून तिमाही के बाद उद्योग व परिवारों की मांग बढ़ी है।
डिब्बाबंद पाम ऑयल, सोयाबीन, सूरजमुखी, मूंगफली और सरसों के अलावा अन्य घरेलू खाद्य तेलों पर कच्चे पाम ऑयल (सीपीओ), आरबीडी (रिफाइंड, ब्लेंडेड और डिऑडराइज्ड) पाम ऑयल, क्रूड डिगम्ड सोयाबीन ऑयल और क्रूड सनफ्लावर ऑयल के अंतरराष्ट्रीय कीमतों असर पड़ा। इसकी वजह से मार्च के बाद  से इसकी अंतरराष्ट्रीय व घरेलू कीमत शीर्ष पर पहुंच गई और मई-जून से कीमतों में कमी आनी शुरू हुई।
महंगाई का असर घरेलू व औद्योगिक मांग पर पहली तिमाही में पड़ा। वहीं अब खाद्य तेल उद्योग को उम्मीद है कि अंतरराष्ट्रीय कीमत कम होने से घरेलू दाम कम होंगे और त्योहारों के मौसम में इसकी मांग जोर पकड़ेगी।
अदाणी विल्मर में प्रबंध निदेशक और मुख्य कार्याधिकारी अंशु मलिक ने कहा कि अंतरराष्ट्रीय दाम कम होने से खाद्य तेल दिग्गज भी उसी राह पर चलेंगे।  मलिक ने बिजनेस स्टैंडर्ड से कहा, ‘यह स्वाभाविक और चक्रीय प्रक्रिया है कि अंतरराष्ट्रीय कीमतों का घरेलू बाजार पर असर पड़ता है। हम उसके मुताबिक कदम उठाएंगे, हालांकि मात्रा के बारे में अभी नहीं कहा जा सकता। हमारी कीमतें दो महीने पहले के औसत दाम के अनुरूप होती हैं और तत्काल बढ़ने या घटने का इस पर असर नहीं होता है।’
एनके प्रोटीन्स के मुख्य कार्याधिकारी प्रियम पटेल ने कहा, ‘अप्रैल-जून में कीमत ज्यादा होने के कारण कारोबार कम था और महंगाई के कारण बजट में कटौती हो रही थी। लेकिन पिछले 15-30 दिनों में तेज सुधार हुआ है और अंतरराष्ट्रीय कीमत कम होने से उसी अनुपात में घरेलू दाम कम हुए हैं। इसकी वजह से मध्यावधि के हिसाब से मांग बढ़ेगी।’
बहरहाल पटेल के मुताबिक घरेलू दाम पर असर बहुत ज्यादा नहीं है।
उन्होंने कहा, ‘पाम ऑयल की कीमत 25-30 रुपये लीटर कम हुई है तो कॉटनसीड ऑयल की कीमत 10 रुपये लीटर कम हुई है और मूंगफली तेल की कीमत 5 रुपये लीटर घटी है। कीमत कम होने और अगस्त से अक्टूबर तक त्योहार होने के कारण हम सॉफ्ट और हार्ड दोनों खाद्य तेल की मांग में बढ़ोतरी देख सकते हैं।’
सॉल्वेंट एक्सट्रैक्टर्स एसोसिएशन आफ इंडिया (एसईए) के कार्यकारी निदेशक बीवी मेहता ने कहा, ‘उद्योग की सामान्य धारणा है कि घरेलू और अंतरराष्ट्रीय कीमत में तेजी की वजह से अप्रैल व मई में मांग 50 प्रतिशत कम हुई है। जून में कीमत में गिरावट शुरू हुई है। केवल परिवारों में ही नहीं बल्कि होटल, रेस्टोरेंट और कैटरिंग में भी मांग प्रभावित हुई है।’
मेहता के मुताबिक अंतरराष्ट्रीय दाम में गिरावट का असर दिखने में कुछ वक्त लगेगा। उन्होंने कहा, ‘पाम ऑयल की कीमत घटने का स्थानीय असर दिखने में 15 से 20 दिन लग जाते हैं। वहीं सोयाबीन में 45 दिन लगते हैं. इस  तरह से घरेलू कीमत पर असर इसी के मुताबिक दिखने की उम्मीद की जा सकती है।’

First Published - July 11, 2022 | 11:17 PM IST

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