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त्योहारी मांग निकलने से खाद्य तेल की कीमतों में आई तेजी

Last Updated- December 11, 2022 | 1:52 PM IST

लंबे समय से खाद्य तेलों में आ रही गिरावट अब थम गई है। वैश्विक बाजार में तेजी और घरेलू मांग के कारण अब खाद्य तेल महंगे हो गए हैं। रुपया और कमजोर होने के कारण भी खाद्य तेलों में तेजी आई है। बारिश से तिलहन को नुकसान की आशंका से भी खाद्य तेलों के दाम को सहारा मिला है। पिछले त्योहारी सीजन की तुलना में इस साल मूंगफली तेल को छोड़कर बाकी खाद्य तेल अभी भी 15 से 20 फीसदी सस्ते हैं। कारोबारियों के मुताबिक दीवाली तक खाद्य तेलों में तेजी जारी रह सकती है। इसके बाद दाम गिरने की संभावना है।

सप्ताह भर में आयातित तेलों में आरबीडी पामोलीन तेल के थोक भाव 100-102 रुपये से बढ़कर 110-112 रुपये, कच्चे पाम तेल के दाम 90-92 रुपये से बढ़कर 98-100 रुपये प्रति लीटर हो चुके हैं। देसी तेलों में सोया रिफाइंड तेल के दाम 128-130 रुपये से बढ़कर 136-138 रुपये, सरसों तेल के दाम 132-135 रुपये से बढ़कर 138-140 रुपये, मूंगफली तेल के दाम 165-170 रुपये से बढ़कर 175-180 रुपये प्रति लीटर हो गए हैं। इस दौरान सूरजमुखी तेल के थोक भाव भी 8 से 10 रुपये बढ़कर 155 से 160 रुपये प्रति लीटर हो चुके हैं।

उपभोक्ता मामलों के मंत्रालय के मुताबिक देश भर के खुदरा बाजारों में डिब्बाबंद (packed) सोयाबीन रिफाइंड तेल 149.10 रुपये, सरसों तेल 167.61 रुपये, मूंगफली तेल 188.65 रुपये और सूरजमुखी तेल 165.18 रुपये प्रति किलो औसत मूल्य के हिसाब से बिक रहा है।

सेंट्रल ऑर्गेनाइजेशन फॉर ऑयल इंडस्ट्री एंड ट्रेड (कूइट) के चेयरमैन सुरेश नागपाल ने बिजनेस स्टैंडर्ड को बताया कि भारत में खाद्य तेलों के दाम अंतरराष्ट्रीय बाजार पर काफी निर्भर करते हैं। बीते कुछ दिनों में अंतरराष्ट्रीय बाजार में खाद्य तेलों के दाम बढे हैं। इसकी वजह चीन से मांग निकलना है। अंतरराष्ट्रीय तेजी का असर घरेलू खाद्य तेलों पर भी पड़ा और बीते 5 से 6 दिनों में ही घरेलू बाजार में खाद्य तेलों के दाम 6 से 8 रुपये लीटर बढ़ चुके हैं।

नागपाल कहते हैं कि घरेलू तेल महंगे होने की एक वजह त्योहारों के कारण मांग बढ़ना भी है। बारिश से खरीफ तिलहन फसलों को नुकसान और सरसों की बोआई में देरी की आशंका के कारण भी खाद्य तेलों में तेजी को समर्थन मिला है।

अखिल भारतीय खाद्य तेल व्यापारी महासंघ के अध्यक्ष शंकर ठक्कर कहते हैं कि त्योहारी मांग के साथ ही डॉलर के मुकाबले रुपया और कमजोर होने से भी खाद्य तेलों खासकर आयातित तेलों में तेजी आई है क्योंकि कमजोर रुपये से आयात महंगा पड रहा है। रूस—यूक्रेन के बीच फिर तनाव बढ़ने से सूरजमुखी के तेल महंगा हो रहा है। कारोबारियों को इसका आयात घटने का खटका है।

दिल्ली खाद्य तेल संघ के सचिव हेमंत गुप्ता ने कहा कि  बीते 3—4 महीने में खाद्य तेलों के दाम 30 से 40 फीसदी गिर गए थे। ऐसे में निचले स्तर पर मांग निकलने से इनकी कीमतों में सुधार हुआ है।

आगे  गिर सकते हैं खाद्य तेलों के दाम

नागपाल कहते हैं कि देश में दीवाली के लिए खाद्य तेलों की ज्यादातर थोक खरीदी हो चुकी है। चीन भी माल खरीद चुका है। ऐसे में आगे खाद्य तेल सस्ते होने की संभावना है। ठक्कर ने कहा कि दीवाली तक तो खाद्य तेलों में तेजी बरकरार रह सकती है। दीवाली बाद मांग कमजोर पड़ने से खाद्य तेलों के दाम गिर सकते हैं, बशर्ते रुपया डॉलर के मुकाबले और ज्यादा मजबूत न हो जाए। साथ ही रूस—यूक्रेन में तनाव और ना बढ़ जाए।

First Published - October 11, 2022 | 4:59 PM IST

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