लंबे समय से खाद्य तेलों में आ रही गिरावट अब थम गई। वैश्विक बाजार में तेजी और घरेलू मांग के कारण अब खाद्य तेल महंगे हो गए हैं। रुपया और कमजोर होने के कारण भी खाद्य तेलों में तेजी आई है। बारिश से तिलहन को नुकसान की आशंका से भी खाद्य तेलों के दाम बढ़ने को सहारा मिला है। पिछले साल त्योहारों की तुलना में इस साल मूंगफली तेल को छोड़कर बाकी खाद्य तेल अभी भी 15 से 20 फीसदी सस्ते हैं।
कारोबारियों के मुताबिक दीवाली तक खाद्य तेलों में तेजी जारी रह सकती है। इसके बाद दाम गिरने की संभावना है। सप्ताह भर में आयातित तेलों में आरबीडी पामोलीन तेल के थोक भाव 100-102 रुपये से बढ़कर 110-112 रुपये, कच्चे पाम तेल के दाम 90-92 रुपये से बढ़कर 98-100 रुपये प्रति लीटर हो चुके हैं।
देसी तेलों में सोया रिफाइंड तेल के दाम 128-130 रुपये से बढ़कर 136-138 रुपये, सरसों तेल के दाम 132-135 रुपये से बढ़कर 138-140 रुपये, मूंगफली तेल के दाम 165-170 रुपये से बढ़कर 175-180 रुपये प्रति लीटर हो गए हैं।
इस दौरान सूरजमुखी तेल के थोक भाव भी 8 से 10 रुपये बढ़कर 155 से 160 रुपये प्रति लीटर हो चुके हैं। उपभोक्ता मामलों के मंत्रालय के मुताबिक देश भर के खुदरा बाजारों में डिब्बाबंदसोयाबीन रिफाइंड तेल 149.10 रुपये, सरसों तेल 167.61 रुपये, मूंगफली तेल 188.65 रुपये और सूरजमुखी तेल 165.18 रुपये प्रति किलो औसत मूल्य के हिसाब से बिक रहा है।
सेंट्रल ऑर्गेनाइजेशन फॉर ऑयल इंडस्ट्री एंड ट्रेड के चेयरमैन सुरेश नागपाल ने बिजनेस स्टैंडर्ड को बताया कि देश में दीवाली के लिए खाद्य तेलों की ज्यादातर थोक खरीदी हो चुकी है। चीन भी माल खरीद चुका है। ऐसे में आगे खाद्य तेल सस्ते होने की संभावना है। दिल्ली खाद्य तेल संघ के सचिव हेमंत गुप्ता ने कहा कि बीते 3-4 महीने में खाद्य तेलों के दाम 30 से 40 फीसदी गिर गए थे।