केंद्रीय बिजली, नवीन और नवीकरणीय ऊर्जा मंत्री आरके सिंह ने कहा कि केंद्र इस साल संसद के मॉनसून सत्र में बिजली अधिनियम 2003 में संशोधन पेश करने की योजना बना रहा है।
उद्योग मंडल फिक्की द्वारा आयोजित इंडिया एनर्जी ट्रांजिशन सम्मेलन, 2022 को संबोधित करते हुए सिंह ने कहा ‘इस संधोशन में दो-तीन अतिरिक्त प्रावधान होंगे, जिनमें से एक है अक्षय ऊर्जा खरीद दायित्वों पर जुर्माना बढ़ाना। मांग बढ़ गई है और वर्तमान में बाजार कोई मसला नहीं है। हमारे उत्पाद के आकार में वृद्धि की वजह से बाजार और अधिक ऊर्जावान होने जा रहा है।’ उन्होंने कहा कि भारत भंडारण के साथ अक्षय ऊर्जा 6.5 से सात रुपये में बेच सकेगा और उस दर पर भी चौबीसों घंटे अक्षय ऊर्जा की मांग रहेगी। सिंह ने कहा कि सरकार भंडारण के दाम कम करेगी तथा भंडारण क्षमता में और इजाफा करेगी। कुल मिलाकर भविष्य की हमारी बोलियां चौबीसों घंटे ऊर्जा में तब्दील हो जाएंगी।
बिजली अधिनियम में संशोधन को दो साल से अधिक का समय हो चुका है। केंद्र ने अप्रैल 2020 में बिजली विधेयक, 2003 में संशोधन का मसौदा पेश किया था और राज्यों से अपनी टिप्पणी प्रस्तुत करने के लिए कहा। प्रमुख संशोधनों में सब्सिडी वाली बिजली दरों को समाप्त करना भी शामिल है, जिसे सब्सिडी के प्रत्यक्ष लाभ हस्तांतरण (डीबीटी) से तब्दील करना है। इसके अलावा औद्योगिक उपभोक्ताओं पर क्रॉस-सब्सिडी का बोझ कम करना, नए अनुबंध प्रवर्तन प्राधिकरण और मौजूदा राज्य बिजली विनियामक आयोगों (एसईआरसी) के लिए नई चयन प्रक्रिया भी शामिल है।