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जूट क्षेत्र को 1,500 करोड़ रुपये के नुकसान का अनुमान

Last Updated- December 11, 2022 | 10:46 PM IST

मौजूदा सत्र में खाद्यान्न के भंडारण के लिए जूट से बनी बोरियों का जरूरी मात्रा में उत्पादन नहीं हो पाने से जूट क्षेत्र को करीब 1,500 करोड़ रुपये का अनुमानित नुकसान हुआ है।
जूट के प्रमुख उत्पादक राज्य पश्चिम बंगाल की सरकार और केंद्र के समर्थन के बावजूद जूट से बनी बोरियों की  4.81 लाख गांठें कम पड़ गईं। ऐसी स्थिति में भंडारण निकायों को प्लास्टिक बोरियों का भी इस्तेमाल करना पड़ गया। अनाज के भंडारण में मुख्यत: जूट से बने बोरों का ही इस्तेमाल होता है।
जूट उद्योग के एक सूत्र ने पीटीआई-भाषा से कहा कि नवंबर और दिसंबर में जुट मिलें अनाज भंडारण में इस्तेमाल होने वाले जूट बोरों की आपूर्ति ठीक तरह से नहीं कर पाईं। यह कमी बोरों की 4.8 लाख गांठों की रही। इससे जूट क्षेत्र को 1,500 करोड़ रुपये का नुकसान होने का अनुमान है।
केंद्र की मोदी सरकार ने नवंबर में जूट सत्र 2021-22 में पैकेजिंग के लिए जूट से बने बोरों के इस्तेमाल को अनिवार्य करने वाले मानकों को मंजूरी दी थी। इन मानकों के मुताबिक, सारे खाद्यान्नों की पैकिंग जूट के बोरों में की जाएगी जबकि चीनी की 20 फीसदी पैकिंग इन बोरों में करना अनिवार्य होगा। हालांकि तदर्थ सलाहकार समिति ने जूट के बोरों में खाद्यान्न के भंडारण संबंधी मानक को ढीला करने का सुझाव दिया था।

First Published - December 19, 2021 | 11:40 PM IST

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