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इस साल देश में रिकॉर्ड ग्वार उत्पादन का है अनुमान

Last Updated- December 11, 2022 | 4:11 PM IST

लम्बे समय बाद एक बार फिर से ग्वार खबरों में आना शुरू हो गया है। पिछले एक महीने से ग्वार के दाम बढ़ रहे हैं। निर्यात मांग बढ़ने की उम्मीद के भरोसे किसानों को लग रहा है कि ग्वार एक बार फिर मुनाफे की फसल साबित होगी। बेहतर बोआई के कारण इस बार रिकॉर्ड पैदावार होने की भी संभावना जताई जा रही है। जो ग्वार की कीमतों को दबाव में ऱखने वाली है।

उतार-चढ़ाव भरे बाजार में ग्वार में हल्की तेजी आती दिख रही है जो ग्वार के किसानों और कारोबारियों को लम्बे समय के बाद खुश होने का एक मौका दे सकती है। ग्वार गम के दाम 9000 रुपये प्रति क्विंटल के पार पहुंच गए तो ग्वार सीड 5000 रुपये प्रति क्विंटल के के करीब हैं। हाजिर बाजार में ग्वारगम की कीमत बढ़कर 9100 रुपये और ग्वार सीड के दाम बढ़कर 4828 रुपये प्रति क्विंटल हो गए। कमोडिटी एक्सचेंज एनसीडीईएक्स पर ग्वारगम वायदा का अक्टूबर अनुबंध की कीमतें बढ़कर 8890 रुपये और नवंबर अनुबंध की कीमतें 9425 रुपये प्रति क्विंटल हो गई, जबकि ग्वार सीड के अक्टूबर अनुबंध की कीमत 4777 रुपये और नवंबर अनुबंध की 4891 रुपये प्रति क्विंटल हो गई। 

एमएमसी सिक्योरिटीज की रिपोर्ट के मुताबिक ग्वारगम की निर्यात मांग के कारण ग्वार गम और ग्वारसीड वायदा की कीमतों में की उछाल देखने को मिल रहा है, लेकिन उत्पादन क्षेत्र में बढ़ोतरी के कारण आगामी सीजन के लिए बेहतर उत्पादन अनुमान से कीमतों में नरमी का रुझान है। राजस्थान कृषि मंत्रालय से प्राप्त ताजा आंकड़ों के मुताबिक राजस्थान में 24 अगस्त तक ग्वार की बोआई पिछले साल के 20.48 लाख हेक्टयर की तुलना में 51 फीसदी बढ़कर 30.79 लाख हेक्टेयर हो गया। पिछले खरीफ सीजन में राजस्थान के अंदर कुल 23.94 लाख हेक्टेयर क्षेत्र में ग्वार की बोआई हुई थी जबकि पिछले पांच साल का औसत बोआई क्षेत्र 30.75 लाख हेक्टेयर है। कृषि मामलों के जानकारों का कहना है कि ग्वार की बोआई लगभग पूरी हो चुकी है लेकिन कुछ इलाकों में देर तक बोआई होती है इसलिए इस साल ग्वार का राजस्थान में रकबा बढ़कर 32 लाख हेक्टेयर तक पहुंचने की उम्मीद है।

राजस्थान खाद्य पदार्थ व्यापार संघ के अध्यक्ष बाबू लाल गुप्ता के मुताबिक इस बार राजस्थान में खरीफ फसलों की बंपर उत्पादन होने की संभावना है, ग्वार की अच्छी बोआई हुई है जिसके कारण रिकॉर्ड पैदावार होने की उम्मीद है। ग्वार का रकबा 32 लाख हेक्टेयर के ऊपर पहुंच सकता है। बीकानेर अनाज मंडी के पूर्व चेयरमैन पुखराज चोपडा कहते हैं कि पिछले साल की अपेक्षा इस बार बोआई ज्यादा हुई है, फसल भी अच्छी है, फली में बीज आना शुरू हो गया है, सब कुछ सही रहा तो इस साल ग्वार की रिकॉर्ड पैदावार हो सकती है। फिलहाल विदेशों से मांग औसत ही चल रही है निर्यात मांग बढ़ी तो कीमतें बढ़ेगी, नहीं तो पैदावार अधिक होने के कारण ग्वार में तेजी आना मुश्किल है।

चोपड़ा के मुताबिक इस समय औसतन 28-30 हजार टन मासिक ग्वारगम का निर्यात हो रहा है, जबकि पिछले साल हर महीने का औसतन निर्यात 20 हजार टन था। कीमतों में हल्की तेजी है लेकिन इसको स्थाई नहीं समझना चाहिए क्योंकि मांग में खास तेजी नजर नहीं आ रही है। दूसरी तरफ बाजार से जुड़े लोगों का मानना है कि इस बार निर्यात मांग जबर्दस्त रहने वाली है क्योंकि रूस यूक्रेन युद्ध के कारण रूस की तरफ से कच्चे तेल का निर्यात प्रभावित हुआ है। इस कमी को पूरा करने के लिए अमेरिका अपने क्षेत्र में तेल उत्पादन बढ़ाने के लिए बंद पड़े तेल कुओं को दोबारा शुरू करेगा, जिसके चलते ग्वार गम की मांग बढ़ेगी और 8-9 सालों बाद एक बार फिर ग्वार में तेजी आएगी। जबकि कुछ कारोबारियों का कहना है कि जब से युक्रेन और रूस के बीच युद्ध के कारण रूस को निर्यात किया जाने वाला ग्वार रुक गया है, इसके साथ ही रूस की तरफ से पेमेंट भी रुका हुआ है।

देश में ग्वार का सालाना औसत उत्पादन 50 लाख क्विंटल होता है लेकिन पिछले वर्ष देशभर में करीब 45 लाख क्विंटल ग्वार का उत्पादन हुआ था जिसमें से राजस्थान में करीब 35 लाख ग्वार पैदा हुई थी। इस बार ग्वार उत्पादक राज्य राजस्थान, गुजरात और मध्य प्रदेश में फसल अच्छी होने से माना जा रहा है कि देश में ग्वार का उत्पादन 60 लाख टन तक पहुंच जाएगा।

First Published - August 29, 2022 | 8:18 PM IST

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