रूस-यूक्रेन युद्ध के कारण देश में सूरजमुखी तेल का संकट पैदा गया था। जिससे इसके दाम भी बढ़ गए थे। दाम बढ़ने के कारण इस साल किसान सूरजमुखी की खेती करने के प्रति प्रोत्साहित हुए और खरीफ सीजन में इसकी खूब बोआई की। जिससे इस साल सूरजमुखी का उत्पादन न सिर्फ लक्ष्य से ज्यादा बल्कि बीते 8 साल में खरीफ सीजन में सबसे ज्यादा होने का अनुमान है।
केंद्रीय कृषि एवं कृषक कल्याण मंत्रालय द्वारा जारी वर्ष 2022-23 के लिए पहले अग्रिम अनुमान के मुताबिक देश में खरीफ सीजन में 1.40 लाख टन सूरजमुखी का उत्पादन होने की संभावना है। जो वर्ष 2021-22 के 1.12 लाख टन सूरजमुखी उत्पादन से 25 फीसदी ज्यादा है। इसके साथ ही सरकार द्वारा निर्धारित 1.30 लाख टन के लक्ष्य से भी करीब 8 फीसदी अधिक है।
उत्पादन बढ़ने की मुख्य वजह इस साल सूरजमुखी की बोआई ज्यादा होना है। इस साल खरीफ सीजन में 2.01 लाख हेक्टेयर क्षेत्रफल में सूरजमुखी की बोआई हुई थी, जो पिछले खरीफ सीजन में 1.52 लाख हैक्टेयर में हुई बोआई से करीब 31 फीसदी अधिक है। सूरजमुखी की 85 फीसदी खेती कर्नाटक में होती है। इस खरीफ सीजन में कर्नाटक में सूरजमुखी की बोआई में करीब 56 फीसदी वृद्धि हुई।
सूरजमुखी का उत्पादन बढ़ने के बारे में अखिल भारतीय खाद्य तेल व्यापारी महासंघ के अध्यक्ष शंकर ठक्कर कहते हैं कि रूस-यूक्रेन युद्ध के बाद सूरजमुखी तेल के दाम बढ़ने लगे थे और इसके भाव 180 रुपये किलो तक चले गए थे। भाव बढ़ने के कारण किसानों ने आगे भी दाम अच्छे मिलने की उम्मीद में सूरजमुखी की ज्यादा बोआई की। जिससे लक्ष्य से भी ज्यादा सूरजमुखी पैदा होने का अनुमान है।
देश में सूरजमुखी तेल की खपत की पूर्ति आयात पर निर्भर है। चालू तेल वर्ष (नवंबर-अक्टूबर ) में अगस्त तक 16.38 लाख टन कच्चा सूरजमुखी तेल आयात हो चुका है। पिछली समान अवधि में यह आंकडा 15.96 लाख टन था। देश में हर साल 22 से 25 लाख टन कच्चा सूरजमुखी तेल आयात होता है।