कच्चे तेल के वैश्विक दाम में तेजी से तेल विपणन कंपनियों (ओएमसी) की एथनॉल मिश्रण कार्यक्रम में दिलचस्पी और बढ़ सकती है। बहरहाल उद्योग जगत के सूत्रों का कहना है कि एथनॉल निर्माताओं की अपनी सीमा है कि वे कम नोटिस पर कितनी आपूर्ति बढ़ा सकते हैं। साथ ही उनकी क्षमता और कच्चे माल की आपूर्ति भी नियत है।
फरवरी के अंतिम सप्ताह में रूस के यूक्रेन पर हमले के बाद से तेल की कीमतें तेजी से बढ़ रही हैं। मध्य एशियाई देशों में यह डर तेजी से फैला है कि ऊर्जा दिग्गज रूस द्वारा तेल व गैस की आपूर्ति में व्यवधान आ सकता है। यह यूक्रेन से टकराव या पश्चिमी देशों के प्रतिबंध दोनों वजहों से होने की संभावना है।
पश्चिमी देशों के प्रतिबंधों ने अब तक ऊर्जा के कारोबार को बाहर रखा है। वहीं रूसी तेल उत्पादों के पूर्ण प्रतिबंध की संभावना से अंतरराष्ट्रीय तेल के दाम नई ऊंचाई की ओर अग्रसर हो रहे हैं।
तेल मंत्रालय के पेट्रोलियम प्लानिंग ऐंड एनॉलिसिस सेल (पीपीएसी) के मुताबिक सोमवार को भारत द्वारा खरीदे जाने वाले क्रूड ऑयल बॉस्केट (जिसमें ओमान, दुबई से खरीद और ब्रेंट क्रूड शामिल है) की कीमत 7 मार्च को 126.36 डॉलर प्रति बैरल पहुंच गई। भारत में 4 महीने पहले जब पेट्रोल व डीजल की कीमतें स्थिर की गई थीं, तब इसकी कीमत 81.5 डॉलर प्रति बैरल थी।
इस बढ़ोतरी से उम्मीद जगी है कि एथनॉल की आपूर्ति मौजूदा प्रतिबद्धता के स्तर से बढ़ाई जाएगी, जिससे ओएमसी की लागत में कुछ कमी आ सकेगी।
बहरहाल उद्योग जगत के सूत्रों ने कहा कि योजना से ज्यादा बढ़ी हुई मांग पूरी करना चुनौती होगी, खासकर ऐसे समय में जब एथनॉल बनाने के लिए कच्चे माल के रूप में गन्ने का ज्यादातर इस्तेमाल होता है। दिसंबर 2021 में शुरू होने वाले 2021-22 एथनॉल आपूर्ति सीजन में भारत की एथनॉल उत्पादन क्षमता (गन्ने और खराब अनाज दोनों से) करीब 4.5 से 5 अरब लीटर थी। ओएमसी ने 4.16 अरब लीटर आपूर्ति के लिए रुचिपत्र जारी किया था। इस स्तर के हिसाब से देखें तो इस्तेमाल न हो पाने वाली क्षमता इस समय बहुत मामूली है।
अप्रैल 2022 से नवंबर 2022 के बीच 0.5 से 0.7 अरब लीटर उत्पादन की नई क्षमता जोड़ी गई, जो नई परियोजनाओं और पुरानी परियोजनाओं के विस्तार के माध्यम से की गई है। यह क्षमता गन्ने और अनाज दोनों से एथनॉल बनाने में बढ़ी है। लेकिन कारोबार से जुड़े सूत्रों का कहना है कि फिलहाल अभी पूरी क्षमता से उत्पादन शुरू नहीं होगा।
इसके अलावा कच्चे माल (गन्ना आधारित) की आपूर्ति भी व्यवधान है। उद्योग के एक वरिष्ठ अधिकारी ने कहा, ‘गन्ने का रस उपलब्ध नहीं है क्योंकि पेराई का सत्र अब खत्म होने को है। ऐसे में एथनॉल उत्पादन के लिए बी हैवी और सी हैवी मोलैसिस पर निर्भरता है। हां, अनाज आधारित एथनॉल उत्पादन के मामले में कच्चे माल की उपलब्धता की समस्या नहीं है।’
भारत ने 2025 तक पेट्रोल के साथ 20 प्रतिशत एथनॉल मिलाने की योजना बनाई है।