facebookmetapixel
रेट कट का असर! बैंकिंग, ऑटो और रियल एस्टेट शेयरों में ताबड़तोड़ खरीदारीTest Post कैश हुआ आउट ऑफ फैशन! अक्टूबर में UPI से हुआ अब तक का सबसे बड़ा लेनदेनChhattisgarh Liquor Scam: पूर्व CM भूपेश बघेल के बेटे चैतन्य को ED ने किया गिरफ्तारFD में निवेश का प्लान? इन 12 बैंकों में मिल रहा 8.5% तक ब्याज; जानिए जुलाई 2025 के नए TDS नियमबाबा रामदेव की कंपनी ने बाजार में मचाई हलचल, 7 दिन में 17% चढ़ा शेयर; मिल रहे हैं 2 फ्री शेयरIndian Hotels share: Q1 में 19% बढ़ा मुनाफा, शेयर 2% चढ़ा; निवेश को लेकर ब्रोकरेज की क्या है राय?Reliance ने होम अप्लायंसेस कंपनी Kelvinator को खरीदा, सौदे की रकम का खुलासा नहींITR Filing 2025: ऑनलाइन ITR-2 फॉर्म जारी, प्री-फिल्ड डेटा के साथ उपलब्ध; जानें कौन कर सकता है फाइलWipro Share Price: Q1 रिजल्ट से बाजार खुश, लेकिन ब्रोकरेज सतर्क; क्या Wipro में निवेश सही रहेगा?Air India Plane Crash: कैप्टन ने ही बंद की फ्यूल सप्लाई? वॉयस रिकॉर्डिंग से हुआ खुलासा

धातु फर्मों के लिए बढ़ेंगे निर्यात मौके!

Last Updated- December 11, 2022 | 9:03 PM IST

रूस और यूक्रेन के बीच चल रहे टकराव से भारतीय धातु कंपनियों के लिए निर्यात के मौके पैदा हो सकते हैं। दुनिया में धातुओं की आपूर्ति में रूस का दबदबा है। क्रिसिल रिसर्च के मुताबिक प्राथमिक एल्युमीनियम की वैश्विक आपूर्ति में रूस और यूरोप की संयुक्त रूप से हिस्सेदारी करीब 10 फीसदी है। रूस इस्पात के मामले में 13 फीसदी हिस्सेदारी के साथ दूसरा सबसे बड़ा निर्यातक है। तनाव बढऩे से आपूर्ति घटने की आशंका है, जिसकी भरपाई के लिए भारत समेत अन्य निर्यातक देश आगे आ सकते हैं।
क्रिसिल रिसर्च की निदेशक हेतल गांधी ने कहा कि रूस करीब 3 से 3.3 करोड़ टन इस्पात का निर्यात करता है। गांधी ने कहा, ‘अगर टकराव और बढ़ा और उससे आपूर्ति में अवरोध पैदा हुए तो इस कमी की भरपाई भारत जैसे अन्य निर्यातक देशों द्वारा किए जाने के आसार हैं। ऐसे में निर्यात संभावनाएं बढऩे से लघु अवधि में भारतीय इस्पात विनिर्माताओं को फायदा मिलने के आसार हैं।’
खबरों के मुताबिक यूक्रेन के मुख्य इस्पात विनिर्माता शहर मरियूपोल में गुरुवार को बमबारी हुई। जिंदल स्टील ऐंड पावर के प्रबंध निदेशक वी आर शर्मा ने कहा, ‘मरियूपोल में बहुत सी इस्पात विनिर्माण इकाइयां हैं, जो मुख्य रूप से बिलेट, स्लैब, हॉट रोल्ड कॉइल का निर्यात करती हैं। वे निर्यात करने की स्थिति में नहीं होंगी, जिससे कई देशों में किल्लत पैदा हो सकती है।’ शर्मा ने कहा, ‘भारत के इस्पात उद्योग को अतिरिक्त मांग पूरी करने के लिए उत्पादन 5 से 10 फीसदी बढ़ाना चाहिए। हमें भारत को ही नहीं बल्कि पूरे विश्व को उत्पाद उपलब्ध कराने चाहिए।’ स्टीलमिंट के आंकड़ों के मुताबिक यूक्रेन ने वर्ष 2021 में करीब 15.26 लाख टन इस्पात का निर्यात किया था।
आर्सेलरमित्तल निप्पॉन स्टील इंडिया के मुख्य विपणन अधिकारी रंजन धर ने कहा कि इस्पात के दो मुख्य निर्यातक रूस और यूक्रेन पहले से ही तुर्की, पश्चिम एशिया और यूरोप को निर्यात करते आए हैं। धर ने भारतीय मिलों के लिए निर्यात के मौकों के बारे में कहा कि फिलहाल कुछ कहना मुश्किल है, लेकिन अगर इन बाजारों को रूस एवं यूक्रेन से आपूर्ति नहीं होगी तो आपूर्ति के लिए भारत स्वाभाविक पसंद बन सकता है। हालांकि उन्होंने कहा कि यह इस चीज पर भी निर्भर करेगा कि भारत में अतिरिक्त क्षमता उपलब्ध है या नहीं। धर ने कहा, ‘इस समय भारत में मांग बहुत अच्छी है। हम हमेशा की तरह सबसे पहले घरेलू मांग पूरी करने पर ध्यान देंगे।’ गैर-अलौह धातुओं में इस भू-राजनीतिक संकट का एल्युमीनियम पर सबसे ज्यादा असर पडऩे के आसार हैं।
गांधी ने कहा, ‘रूस पर प्रतिबंधों से उसका धातु उत्पादन प्रभावित होगा। इसके अलावा रूस यूरोप को गैस की आपूर्ति करता है। अगर यह आपूर्ति प्रभावित हुई तो पहले से ऊंची ऊर्जा की कीमतें और बढ़ेंगी। इससे यूरोपीय स्मेल्टरों को एल्युमीनियम के उत्पादन में और कटौती करनी होगी।’ यह कम लागत वाले घरेलू एल्युमीनियम विनिर्माताओं के लिए सकारात्मक हो सकता है। आपूर्ति की चिंताओं और ऊर्जा की अधिक लागत से एल्युमीनियम, तांबे, जस्ते और सीसे जैसी गैर-अलौह धातुओं की कीमतों में निकट अवधि में बढ़ोतरी के आसार हैं।

First Published - February 25, 2022 | 10:58 PM IST

संबंधित पोस्ट