बीते कुछ दिनों से हो रही बारिश के कारण बाजरा की फसल को नुकसान हुआ है। जिससे इसकी कीमतों में आ रही गिरावट थम सकती है।
बीते दो महीने से बाजरा की कीमतों में गिरावट देखी जा रही थी क्योंकि इस खरीफ सीजन में बोआई ज्यादा होने से इसका उत्पादन बढ़ने का अनुमान है।
सरकारी आंकडों के मुताबिक इस साल 69.89 लाख हेक्टेयर में बाजरा की बोआई हुई है, जो पिछले खरीफ सीजन में 63.29 लाख हेक्टेयर में हुई बोआई से 10.42 फीसदी ज्यादा है। सरकार ने इस साल 97.50 लाख टन बाजरा उत्पादन का अनुमान लगाया है, जो पिछले साल के उत्पादन 96.20 लाख टन से 1.35 फीसदी ज्यादा है। लेकिन कारोबारी व जिंस विश्लेषकों के मुताबिक बाजरा उत्पादन में 8 फीसदी वृद्धि हो सकती है। हालांकि बारिश से हुए नुकसान के कारण अब इस वृद्धि में एक-दो फीसदी कमी भी संभव है।
ओरिगो ई-मंडी में वरिष्ठ प्रबंधक (शोध) इंद्रजीत पॉल ने बताया कि हरियाणा, उत्तर प्रदेश और राजस्थान के कुछ बाजरा उत्पादक इलाकों में लगातार बारिश से इसकी फसल को नुकसान हुआ है। जिससे बाजरा उत्पादन अनुमान में एक-दो फीसदी की कमी भी आ सकती है। इस साल बाजरा उत्पादन 8 फीसदी बढने का अनुमान है। पॉल कहते हैं कि बाजरा की बोआई अच्छी होने से इसके दाम लगातार गिर रहे थे। पिछले महीने की तुलना में इस माह मंडियों में भाव 200 रुपये घटकर 1,750 से 1,800 रुपये क्विंटल पर आ चुके हैं। पहले आवक जोर पकड़ने पर भाव और भी गिरने की संभावना थी। लेकिन अब बारिश के कारण बाजरा की कीमतों में गिरावट थमेगी। साथ ही निचले स्तर पर मांग बढ़ने से अगले महीने तक भाव 100 से 150 रुपये क्विंटल सुधर भी सकते हैं। मक्के की नई आवक में देरी और यह बाजरा से काफी महंगा है। इसलिए पोल्ट्री फीड में बाजरा की मांग से इसकी कीमतों में सुधार को बल मिल सकता है।
राजस्थान के बाजरा कारोबारी के जी झालानी ने बताया कि बारिश से बाजरा काला सा पड रहा है। उत्पादन में कमी पर अभी कुछ कहना जल्दबाजी है। लेकिन बारिश का बाजरा की फसल पर नकारात्मक असर से इसकी कीमतों में आ रही गिरावट थमेगी। फिलहाल इसके भाव 50 से 60 रुपये की घट-बढ के साथ 1,700 से 1,800 रुपये प्रति क्विंटल के दायरे में ही बने रहने की संभावना है। ज्यादा बोआई को देखते हुए नुकसान के बावजूद इस साल ज्यादा बाजरा पैदा होगा।
जिंसों की आवक व कीमतों पर नजर रखने वाली एजेंसी एगमार्कनेट के मुताबिक राजस्थान की मंडियों में इस माह अब तक 58 से 60 हजार टन बाजरा की आवक हो चुकी है। पिछले महीने 6 से 8 हजार टन ही आवक हुई थी।