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आलू वायदा पर पाबंदी से मुसीबत में हैं किसान

Last Updated- December 07, 2022 | 4:02 PM IST

उत्तर प्रदेश, बिहार, बंगाल और गुजरात के आलू उपजाने वाले किसान आलू के वायदा कारोबार पर लगे प्रतिबंध से परेशान हैं।


किसानों को एक बार फिर अपने आलू बेचने के लिए स्थानीय बिचौलियों पर निर्भर होना पड़ रहा है। बंगाल के तारकेश्वर के एक किसान और कोल्ड स्टोरेज के मालिक अरुप घोष ने बताया, ‘इस वर्ष आलू के किसानों की स्थिति बहुत बुरी है।

जहां एक ओर उत्पादन पिछले साल के मुकाबले 20 प्रतिशत अधिक हुआ है वहीं किसानों को अपना लागत मूल्य भी नहीं मिल पा रहा है।’ उन्होंने बताया इस साल बंगाल में लगभग 90 से 92 लाख टन आलू का उत्पादन हुआ है। बंगाल में कोल्ड स्टोरेज की कुल क्षमता 50 से 55 लाख टन की है। घोष ने कहा, ‘आलू के 50 किलो वाले बैग की कीमत यहां 120 रुपये है जबकि लागत मूल्य 150 रुपये का है।’

आगरा के एक किसान रुस्तम सिंह ने बताया कि इस साल आलू का उत्पादन 15-20 प्रतिशत अधिक होने के बावजूद आगरा के आलू उपजाने वाले किसान रो रहे हैं। उन्होंने कहा, ‘पिछले साल आलू के अच्छे भाव को देखते हुए यहां के किसानों ने ब्लैक से आलू के बीज और खाद खरीद कर खेती की। लेकिन, उन्हें अपना लागत मूल्य भी नहीं मिल पा रहा।

यहां एक 93.7 किलो आलू की एक बोरी की कीमत 200 से 240 रुपये प्रति क्विंटल है।’ राज्य सरकार ने किसानों से आलू खरीदने का काम नैफेड को सौपा था लेकिन सरकारी दर 2 से 2.5 रुपये प्रति किलो का था। सिंह ने बताया कि इतनी कम कीमत मिलने के कारण आगरा के अधिकांश किसानों ने सरकार को आलू बेचना मुनासिब नहीं समझा।

थोड़ी खरीदारी करने के बाद नैफेड ने भी आलू खरीदने का काम रोक दिया। मल्टी कमोडिटी एक्सचेंज (एमसीएक्स) के वाइस प्रेसिडेंट (बिजनेस डेवलपमेंट) संजीत प्रसाद ने कहा, ‘तीन साल पहले जब आलू का वायदा कारोबार एमसीक्स पर शुरू हुआ था तो किसानों के हौसले बुलंद हुए थे क्योंकि बाजार में आलू के अच्छे भाव उपलब्ध थे। आलू के वायदा कारोबार पर लगे प्रतिबंध के बाद किसान अब बिचौलियों पर निर्भर हैं।’

प्रसाद ने कहा, ‘आगरा और बंगाल में क्रमश: 19 और 23 कोल्ड स्टोरेज है। वायदा कारोबार पर अचानक लगे प्रतिबंध से किसानों में दहशत सी फैल गई है।’उन्होंने कहा, ‘एमसीएक्स में आलू के वायदा कारोबार को देखते हुए पश्चिम बंगाल, बिहार, उत्तर प्रदेश और गुजरात के किसानों ने पिछले वर्ष की तुलना में इस वर्ष आलू के उत्पादन क्षेत्र को बढ़ाया था। यही वजह है कि इस साल आलू की बंपर फसल हुई है।

जिन किसानों ने वायदा कारोबार के भरोसे अधिक उत्पादन किया था आज की तारीख में वे कहीं नहीं हैं। स्थिति यह है कि अभी आलू के खरीदारी नही मिल रहे हैं।’ पश्चिम बंगाल के एपीएमसी के आंकड़ों के मुताबिक आलू के भाव में लगातार गिरावट आ रही है। उत्तर प्रदेश में आलू की कीमत 295 रुपये प्रति क्विंटल पर आ गई थी। इस वर्ष देश में 1,153.0 लाख टन आलू का उत्पादन हुआ है जो पिछले साल के मुकाबले 30 फीसदी अधिक है।

First Published - August 8, 2008 | 11:13 PM IST

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