मध्य प्रदेश में सरकारी एजेंसियों को गेहूं की बिक्री करने के लिए पंजीकरण कराने वाले किसानों की संख्या में 17 फीसदी से अधिक की गिरावट आई है। ऐसा इसलिए हुआ है कि निजी कंपनियां गेहूं की बढ़ चढ़ कर खरीदारी कर रही हैं।
रूस यूक्रेन संकट की वजह से वैश्विक कीमतों में तेजी आई है।
आधिकारिक सूत्रों ने बताया कि पंजीकरण की अंतिम तारीख 10 मार्च तक करीब 19.8 लाख किसानों ने सरकारी एजेंसियों को गेहूं की बिक्री के लिए आवेदन किया था जबकि पिछले वर्ष की समान अवधि में पंजीकरण कराने वाले किसानों की संख्या करीब 24 लाख रही थी।
मध्य प्रदेश में ऐसा लंबे वक्त बाद हो रहा है। केंद्रीय पूल के लिए गेहूं की सरकारी खरीद करने वाला मध्य प्रदेश देश के अग्रणी राज्यों में से एक है। पिछले पांच वर्ष से केंद्रीय पूल में सबसे बड़े योगदानकर्ता के तौर पर मध्य प्रदेश हरियाणा को पछाड़ कर पंजाब के बाद दूसरे स्थान पर काबिज है।
मध्य प्रदेश में खाद्य और सार्वजनिक वितरण के निदेशक दीपक सक्सेना ने बिज़नेस स्टैंडर्ड को भोपाल से फोन पर कहा, ‘पंजीकरणों में कमी आने की वजह से हम अपने खरीद लक्ष्य को अब 1.28 करोड़ टन से कम कर 1 करोड़ टन करने रहे जा रहे हैं। यदि कीमतें मौजूदा दर पर बरकरार रहती हैं तो आगे इसमें और कमी आ सकती है।’
सक्सेना ने कहा कि पंजीकरणों में तेज और अप्रत्याशित गिरावट के लिए दो प्रमुख कारण जिम्मेदार हैं। पहला यह कि सरकार ने सभी आवेदकों को उनके आधार संख्या से सत्यापित करने का निर्णय लिया है और दूसरा तथा अहम कारण है मंडी कीमतों में अचानक से आई तेजी। सक्सेना ने कहा, ‘हम 2,015 रुपये प्रति क्विंटल के न्यूनतम समर्थन मूल्य पर गेहूं की खरीद कर रहे हैं जबकि राज्य की विभिन्न मंडियों में पिछले 10 से 15 दिनों से औसत कीमत 2,300 से 2,400 रुपये प्रति क्विंटल के करीब बनी हुई है।’ राज्य सरकार ने इस वर्ष करीब 1.4 करोड़ टन गेहूं के भंडारण की व्यवस्था की है जिसके लिए उसने चना और अन्य फसलों का हटाकर जगह बनाई है, लेकिन अब लगता है कि शायद अतिरिक्त स्थान की आवश्यकता नहीं पड़ेगी।
राज्य की जिन सभी बड़ी मंडियों में फसल की बिक्री की जाती है उनके बाहर ट्रैक्टरों की लंबी लाइनें नजर आ रही हैं।
मध्य प्रदेश के मंदसौर जिले में एक किसान ने कहा, ‘कुछ हफ्तों पहले से गेहूं की बिक्री करीब 2,000 रुपये प्रति क्विंटल हो रही थी लेकिन अब अचानक से कीमतें 2,300 रुपये से 2,500 रुपये तक पहुंच गई है। इस वजह से किसान तेजी से अपनी फसल बेचने पर विचार कर रहे हैं।’ उन्होंने उम्मीद जताई कि यह सिलसिला होली के बाद भी जारी रहेगा क्योंकि तब आवक में वृद्घि होने की उम्मीद है।
रूस यूक्रेन संकट के मद्देनजर कुछ दिनों पहले वैश्विक बाजारों में भारतीय गेहूं की कीमतें 360 डॉलर प्रति टन पर पहुंच गई थी जिसके बाद यह 340 से 350 डॉलर प्रति टन पर बनी हुई है।