वर्तमान आर्थिक मंदी से बेरोजगार हुए लोगों को वन विभाग से राहत मिल सकती है। अगर वन प्रबंधन में निवेश किया जाए तो इस क्षेत्र में 1 करोड़ नई नौकरियों का सृजन हो सकता है।
20 मार्च को समाप्त हुए वर्ल्ड फॉरेस्ट वीक की समाप्ति के अवसर पर संयुक्त राष्ट्र खाद्य एवं कृ षि संगठन ने ‘स्टेट ऑफ द वर्ल्ड्स फॉरेस्ट्स 2009’ नामक रिपोर्ट में कहा कि आर्थिक उथल पुथल और पर्यावरण परिवर्तन की दोहरी चुनौतियों को देखते हुए वैश्विक हित में वनों का प्रबंधन बहुत आवश्यक हो जाता है।
अंतरराष्ट्रीय मजदूर संगठन (आईएलओ) के हालिया अध्ययन से संकेत मिलते हैं कि पूरी दुनिया में बेरोजगारों की संख्या 2007 के 17.9 करोड़ की तुलना में 2009 में बढ़कर 19.8 करोड़ हो सकती है और अगर स्थिति ज्यादा खराब हुई तो बेरोजगारों की संख्या 23 करोड़ तक पहुंच जाएगी।
बहरहाल अगर वानिकी क्षेत्र में निवेश को बढ़ावा दें तो इस क्षेत्र में नौकरियों की अपार संभावनाएं हैं। वन प्रबंधन और कृषि वानिकी, जंगलों में आग लगने को रोकने के लिए प्रबंधन, आने जाने के रास्तों के प्रबंधन, शहरी हरित क्षेत्रों का विकास जैसे तमाम क्षेत्र हैं, जहां अपार संभावनाएं हैं।
इस तरह की गतिविधियां कमोवेश स्थानीय जरूरतों की मांग के मुताबिक चलाई जा सकती हैं, जिसमें श्रम की उपलब्धता, सामाजिक आर्थिक और जैविक स्थितियों तथा कौशल स्तर के मुताबिक काम किया जा सकता है। एफएओ द्वारा जारी एक वक्तव्य में अमेरिका सहित कुछ देशों के वानिकी संबंधित आर्थिक प्रोत्साहन योजनाओं के बारे में बताया गया है।
भारत के संदर्भ में खासकर राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी योजना के बारे में जिक्र किया गया है, जिसमें इस क्षेत्र में अपार संभावनाएं हैं। इसमें कहा गया है कि वैश्विक आर्थिक संकट का असर देखें तो वानिकी के क्षेत्र पर भी इसका कम समय के लिए असर पड़ा है।
लकड़ी और इसके उत्पादों की मांग कम हो गई है और हाउसिंग क्षेत्र के धराशायी होने का व्यापक असर है। साथ ही धन की कमी का नकारात्मक असर वन आधारित उद्योगों और वन प्रबंधन के क्षेत्र पर भी पड़ा है।
रिपोर्ट में कहा गया है, ‘एक सामान्य सी बात है कि कुछ सरकारें पहले की महत्वाकांक्षी हरियाली के लक्ष्यों को कम या अपनी मूल नीतियों में तब्दीली कर सकती हैं और वे अपना ध्यान जलवायु परिवर्तन और वानिकी जैसे मुद्दों से हटाकर मंदी से निपटने में लगा सकती हैं।’