फलों से बनने वाले फिजी ड्रिंक्स महंगे पड़ सकते हैं। गुजरात के अथॉरिटी फॉर एडवांस रूलिंग (एएआर) ने नियम दिया है कि ऐसे उत्पादों पर 28 प्रतिशत वस्तु एवं सेवा कर (जीएसटी) के साथ 12 प्रतिशत मुआवजा उपकर लगेगा।
एएआर याची के तर्क से सहमत नहीं हुआ कि फलों पर आधारित पेय पर सिर्फ 12 प्रतिशत जीएसटी लगाया जाना चाहिए। यह नियम मोहम्मद हसनभाई कबलाई की ओर से याचिका पर सुनवाई के बाद आया है, जिसमें अनुरोध किया गया था कि उनके प्रस्तावित ‘ऐपल कोला फिजी’ और ‘माल्ट कोला फिजी’ पेयों पर उचित जीएसटी लगाया जाना चाहिए। उन्होंने कहा कि दोनों पेय सेब के रस से बने पेय होंगे और दूसरे में माल्ट का फ्लेवर जोड़ा जाएगा।
जीएसटी शुल्क ढांचे के तहत फ्रूट पल्प या फ्रूट जूस आधारित पेयों पर 12 प्रतिशत जीएसटी लगता है। वहीं दूसरी तरफ एरेटेड वाटर और कार्बोनेटेड ड्रिंक्स पर 28 प्रतिशत जीएसटी के साथ 12 प्रतिशत उपकर लिया जाता है। याची का कहना था कि प्रस्तावित पेय फलों के रस पर आधारित पेय हैं और उसने भारतीय खाद्य सुरक्षा व मानक प्राधिकरण (एफएसएसएआई) के नियमों का हवाला दिया। उसने तर्क दिया कि ये पेय कार्बोनेटेड पेय नहीं हैं। इसमें इसी तरह के एक उत्पाद को लेकर उच्चतम न्यायालय के नियम का हवाला दिया गया और कहा गया कि उनका उत्पाद कॉर्बोनेटेड नहीं है, बल्कि इसे कॉर्बनडाई ऑक्साइड के साथ प्रसंस्कृत किया जाता है, जिससे कि फलों के रस को संरक्षित करने में मदद मिलती है। इस तरह के उत्पाद रेडी टु सर्व उत्पाद होते हैं, जिन पर 12 प्रतिशत कर लगता है।
बहरहाल एएआर ने जीएसटी परिषद के फैसले का हवाला दिया, जिसमें इस तरह की वस्तुओं को कॉर्बोनेटेड बेवरिज विद फ्रूट जूस की श्रेणी में रखा गया है और इस पर 28 प्रतिशत जीएसटी के साथ 12 प्रतिशत उपकर लगता है। एकेएम ग्लोबल में पार्टनर-टैक्स संदीप सहगल ने कहा कि एएआर ने कानूनी सिद्धांत पर जोर दिया जिसकी परिभाषा का अलग मकसद हो सकता है।