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बीपीसीएल के निजीकरण की राह में ईंधन के दाम की बाधा

Last Updated- December 12, 2022 | 12:01 AM IST

भारत पेट्रोलियम कॉर्पोरेशन लिमिटेड (बीपीसीएल) का विनिवेश ईंधन के दाम की कठिनाई की वजह से प्रभावित हो रहा है। इस मामले से जुड़े अधिकारियों के मुताबिक अप्रत्यक्ष प्रशासित मूल्य व्यवस्था बीपीसीएल के संभावित क्षमतावान खरीदारों पर असर डाल रही है।
तेल मंत्रालय के एक वरिष्ठ अधिकारी ने कहा कि सार्वजनिक क्षेत्र की तेल विपणन कंपनियां (ओएमसी) पेट्रोल, डीजल और रसोई गैस (एलपीजी) की बिक्री में नुकसान उठाती हैं, जो देश के 3 प्रमुख लोकप्रिय पेट्रोलियम उत्पाद हैं। अधिकारी ने कहा, ‘कच्चे तेल की कीमतें कम होने पर कंपनियां बाद में इस नुकसान की भरपाई कर सकती हैं।’
दिल्ली में पेट्रोल का खुदरा मूल्य करीब 105 रुपये लीटर और डीजल का 94 रुपये लीटर है।  तेल कंपनियां इस समय घाटे का बोझ उठा रही हैं और उनका मौजूदा विपणन मुनाफा 3-4 रुपये प्रति लीटर कम हो गया है। वहीं 884.50 रुपये प्रति सिलिंडर (14.2 किलो) पर तेल विपणण्न कंपनियों को करीब 100 रुपये प्रति सिलिंडर नुकसान हो रहा है। कीमतों में नरमी के बावजूद इस समय इन पेट्रोलियम उत्पादों को सबसे महंगे भाव पर बेचा जा रहा है।
देश में वाहन ईंधन की कीमत का बड़ा हिस्सा राज्य व केंद्र के कर के रूप में जाता है। दिल्ली में 1 अक्टूबर को जब पेट्रोल 101.89 रुपये प्रति लीटर और डीजल 90.17 रुपये प्रति लीटर था, कर छोड़कर पेट्रोल की कीमत 41.63 रुपये और डीजल की कीमत 42.58 रुपये प्रति लीटर थी। प्रभावी रूप से खरीदार वाहन ईंधन का दोगुने से ज्यादा दाम दे रहे हैं, जो केंद्र व राज्यों के कर की वजह से है।
पेट्रोल व डीजल की कीमत आधिकारिक रूप से विनियमित कर दी गई है, वहीं केंद्र सरकार सरकारी कंपनियों पर नजर रखती है, जिससे कीमतों पर नियंत्रण रहे। बीपीसीएल के संभावित नए खरीदार से कहा जाएगा कि उसे अनाधिकारिक नियमन का पालन नहीं करना होगा।
लेकिन केंद्र सरकार एलपीजी की कीमतों का नियमन जारी रखना चाहती है और बीपीसीएल के नए प्रवर्तक को ऐसे नियम का पालन अनिवार्य होगा।
इस मामले से जुड़े तेल मंत्रालय के अधिकारियों ने बिजनेस स्टैंडर्ड से कहा कि वे भारत गैस के एलपीजी की कीमत नियंत्रण में रखने को इच्छुक हैं। तेल मंत्रालय के अधिकारी ने कहा, ‘बीपीसीएल को जो भी खरीदेगा, ुसे केंद्र सरकार द्वारा घरेलू गैस की तय कीमत का पालन करना होगा, जो सब्सिडी के पात्र उपभोक्ताओं के लिए तय किया जाएगा। भारत गैस की घरेलू बाजार में बड़ी हिस्सेदारी है और ग्राहक कीमतों को को लेकर संवेदनशील हैं।’
केंद्र सरकार ने दिसंबर 2015 में उन लोगों की रसोई गैस सब्सिडी बंद कर दी थी, जिनकी सालाना कर योग्य आमदनी 10 लाख रुपये से ऊपर है। उसके अलावा शेष लोग रसोई गैस सब्सिडी के सैद्धांतिक रूप से पात्र हैं।  लेकनि मौजूदा कीमतों के दौर में देश में रसोई गैस पर सब्सिडी के लिए कोई बजट नहीं है और तेल कंपनियों के बढ़ी लागत का बोझ उठाना पड़ रहा है।
अधिकारी ने कहा, ‘भारत गैस के पात्र ग्राहकों को सब्सिडी जारी रहेगी और नए खरीदार को लाभार्थियों के लिए प्रभावी कीमत बहाल रखनी होगी। इस रह से अगर इंडेन और एचपी गैस 900 रुपये में सिलिंडर बेचती हैं तो इस श्रेणी के ग्राहकों को निजीकरण के बाद भी भारत पेट्रोलियम को भी इसी दर पर सिलिंडर देना होगा।’
वेदांता, अपोलो ग्लोबल और आई स्क्वारेड कैपिटल ने बीपीसीएल में हिस्सेदारी लेने में रुचि दिखाई है।

First Published - October 24, 2021 | 11:45 PM IST

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