चार दिनों तक गैराज में खड़े रहने वाले ट्रक और हल्के मालवाहक वाहन फिर से राष्ट्रीय राजमार्ग पर सरपट दौड़ने लगे हैं।
इन दिनों देश के भर में लगभग 40 लाख ट्रक और 15 लाख से अधिक हल्के मालवाहक वाहनों का पहिया एक दिन के लिए भी नहीं रुक रहा है। यही कारण है कि पिछले साल नवंबर-दिसंबर में जहां रोजाना 52.5 लाख टन माल की ढुलाई होती थी, वह अब बढ़कर रोजाना 56 लाख टन हो गई है।
पिछले तीन महीनों के मुकाबले जहां ट्रांसपोर्टरों का कारोबार 10 फीसदी बढ़ा है वहीं किराये में अधिकतम 5 फीसदी की बढ़ोतरी दर्ज की गयी है। ट्रांसपोर्ट का काम करने वाले ओपी अग्रावाल कहते हैं, ‘वित्त वर्ष 2007-08 में ट्रांसपोर्टरों ने 4.75 लाख करोड़ रुपये का कारोबार किया था।
लेकिन पिछले साल अगस्त के बाद से कारोबार में लगभग 15-18 फीसदी की गिरावट दर्ज की गई। हालांकि इस साल फरवरी से कारोबार में बढ़ोतरी शुरू हुई है और हमें उम्मीद है कि अगले चार महीनों में घाटे पूरी भरपाई हो जाएगी।’
उन्होंने बताया कि चालू वित्त वर्ष के दौरान ट्रांसपोर्टरों ने 5.25 लाख करोड़ रुपये का कारोबार करने का लक्ष्य रखा है। रोजाना ढुलाई का लक्ष्य 60 लाख टन का है। ऑल इंडिया मोटर कांग्रेस के अध्यक्ष हरचरन सिंह लोहारा ने कहा, ‘हर क्षेत्र की गाड़ियों को रोजाना काम मिल रहा है, लेकिन किराए में 3-5 फीसदी की तेजी है।’
डीजल के दाम में लगातार दो बार (2-2 रुपये की) की कटौती से इसकी कीमत में प्रति लीटर 10 फीसदी से अधिक की गिरावट आई है। ट्रांसपोर्टर रमेश गुलाटी ने बताया कि फिलहाल लुधियाना से कोलकाता के लिए 15 टन वाले ट्रक का किराया 35,000 रुपये है जबकि गत नवंबर-दिसंबर के दौरान यह किराया 31,000-32,000 रुपये था।
चक्कों का जलवा
पिछले 3 महीनों में कारोबार में 10 फीसदी इजाफा
माल ढुलाई बढ़कर हुई 56 लाख टन रोजाना
किराये में आई 3-5 फीसदी की तेजी
डीजल की कीमत घटने से भी हुआ फायदा