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Gold-Silver Outlook: सोने-चांदी को इन 5 वजहों से मिल रही मजबूती! बड़ी गिरावट खरीदारी का मौका

जियो-पॉलिटिकल तनाव, केंद्रीय बैंकों की खरीद और औद्योगिक मांग से गोल्ड-सिल्वर को मजबूत सपोर्ट

Published by
आशुतोष ओझा   
Last Updated- May 12, 2026 | 3:48 PM IST

Gold-Silver Outlook: दुनियाभर की अर्थव्यवस्थाओं में हलचल और जियो-पॉ​लिटिकल अनिश्चितताओं के बीच सोना और चांदी एक बार फिर निवेशकों के लिए अहम एसेट क्लास बने हुए हैं। हालांकि निकट अवधि में दोनों की कीमतों में उतार-चढ़ाव देखने को मिल सकता है, लेकिन लंबी अवधि का आउटलुक अब भी मजबूत बना हुआ है। टाटा म्युचुअल फंड ने अपनी रिपोर्ट में कहा कि मध्यम और लंबी अवधि में सोने का आउटलुक सकारात्मक बना हुआ है। जबकि, चांदी की लंबी अवधि की ग्रोथ स्टोरी मजबूत नजर आ रही है।

सोना-चांदी के 5 मजबूत आधार

रिपोर्ट के मुताबिक, हालिया उतार-चढ़ाव के बावजूद कीमती धातुओं (सोने-चांदी) में निवेश का फंडामेंटल मजबूत बना हुआ है। सोने-चांदी को मजबूती देने वाले कोर ड्राइवर्स समाप्त नहीं हुए हैं, और वे लॉन्ग टर्म डिमांड का आधार बने हुए हैं।

1. केंद्रीय बैंकों की खरीदारी: दुनिया भर के केंद्रीय बैंक लगातार सोना खरीद रहे हैं और पिछले 10 वर्षों में उनकी खरीद लगभग दोगुनी हो चुकी है।
2. जियो-पॉ​लिटिकल तनाव: बढ़ते जियो-पॉ​लिटिकल तनाव सोने को सुरक्षित निवेश विकल्प के रूप में मजबूत बना रहे हैं।
3. हाई ग्लोबल डेट: वैश्विक स्तर पर बढ़ते सरकारी और कॉरपोरेट कर्ज भी हार्ड एसेट्स की मांग को बढ़ा रहे हैं।
4. ब्याज दरों में कटौती: ब्याज दरों में भविष्य में गिरावट की संभावना भी सोने के लिए सकारात्मक मानी जा रही है।
5. डॉलर डायवर्सिफिकेशन: डॉलर डायवर्सिफिकेशन भले ही धीरे-धीरे हो, लेकिन सही दिशा में सहायक बना हुआ है।

Gold: बड़ी गिरावट को निवेश का मौका

फंड हाउस की रिपोर्ट का कहना है कि नियर टर्म में सोने की कीमतों में कंसॉलिडेशन देखने को मिल सकता है। इसकी वजह अमेरिका में लंबे समय तक ऊंची ब्याज दरें बने रहने की संभावना, मजबूत डॉलर और बॉन्ड यील्ड में तेजी है। शॉर्ट टर्म में सोने में करीब (±)5 प्रतिशत तक की वॉलेटिलिटी देखने को मिल सकती है। वहीं, अमेरिका-ईरान तनाव और युद्धविराम से जुड़ी खबरें भी कीमतों को प्रभावित कर सकती हैं। हालांकि भारतीय निवेशकों के लिए रुपये में कमजोरी सोने की घरेलू कीमतों को सहारा दे सकती है, जिससे अंतरराष्ट्रीय बाजारों की तुलना में भारत में गिरावट सीमित रह सकती है।

रिपोर्ट का कहना है कि मीडियम और लॉन्ग टर्म में सोने का आउटलुक पॉजिटिव बना हुआ है। किसी भी बड़ी गिरावट को निवेश के अवसर के रूप में देखना चाहिए। मौजूदा समय सोने को लंबी अवधि के नजरिए से पोर्टफोलियो में रखने के लिए बेहतर नजर आ रहा है। इसके अलावा अमेरिकी प्रशासन और फेडरल रिजर्व के बीच संभावित नीतिगत मतभेद डॉलर पर दबाव बना सकते हैं, जो सोने को अतिरिक्त सपोर्ट दे सकता है।

Silver: चरणबद्ध तरीके से निवेश करें

टाटा म्युचुअल फंड का कहना है कि चांदी की कीमतों में इंड​​स्ट्रियल मेटल्स के साथ उतार-चढ़ाव बना रह सकता है। चीन की मजबूत मांग नियर टर्म में कीमतों को सपोर्ट दे सकती है, लेकिन कमजोर वैश्विक आर्थिक आउटलुक मीडियम टर्म में मांग को सीमित कर सकता है।

सोलर इंस्टॉलेशन में कमी और बड़े पैमाने पर लॉन्ग पोजिशन की बिकवाली से सप्लाई की तंगी कुछ कम हुई है। इसके बावजूद मानना है कि चांदी की लंबी अवधि की ग्रोथ स्टोरी मजबूत बनी हुई है। रिपोर्ट में निवेशकों को सलाह दी गई है कि वे चांदी में चरणबद्ध यानी स्टैगर्ड तरीके से निवेश करें, क्योंकि यह मेटल स्वभाव से काफी वॉलेटाइल है।

अप्रैल में क्या हुआ?

अप्रैल के दौरान बाजार में अपेक्षाकृत कम वॉलेटिलिटी देखने को मिली। इक्विटी बाजारों में निवेशकों का भरोसा लौटने से सोना और चांदी पर दबाव बना, लेकिन मजबूत ETF निवेश, कमजोर डॉलर और मार्च की भारी गिरावट के बाद हुई खरीदारी ने कीमतों को सहारा दिया।

सोलर एनर्जी और इलेक्ट्रिक वाहन सेक्टर से मजबूत इंड​स्ट्रियल डिमांड ने चांदी की कीमतों को समर्थन दिया। वहीं वैश्विक गोल्ड ETF में मजबूत निवेश देखा गया, जिसमें यूरोप सबसे आगे रहा। स्ट्रेट ऑफ होर्मुज बंद होने की आशंकाओं ने यूरोपीय निवेशकों की चिंता बढ़ाई थी।

चांदी की मांग और चीन का दबदबा

रिपोर्ट के अनुसार 2026 लगातार छठा साल हो सकता है जब चांदी की मांग सप्लाई से ज्यादा रहेगी। चांदी की खपत का बड़ा हिस्सा औद्योगिक उपयोग से आता है, जो 2021 से लगातार बढ़ रहा है। चीन में साल 2026 की पहली तिमाही में चांदी की मांग 8 साल के हाई पर पहुंच गई, जबकि वहां का घरेलू स्टॉक तेजी से घटा है। चीन वैश्विक चांदी रिफाइनिंग क्षमता का 60-70 प्रतिशत कंट्रोल करता है।

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अप्रैल के आखिर में चीन ने रिफाइनिंग प्रतिबंध लागू करने शुरू किए, जिससे वैश्विक सप्लाई चेन पर दबाव बढ़ सकता है। मजबूत मांग और सप्लाई की कमी लंबी अवधि में चांदी की कीमतों को समर्थन देती रहेगी।

गोल्ड-सिल्वर रेशियो में सुधार

पिछले महीने गोल्ड-सिल्वर रेशियो में अच्छी रिकवरी देखी गई और यह 62 के ऊपर पहुंच गया, जो सोने के बेहतर प्रदर्शन को दर्शाता है। उम्मीद है कि भू-राजनीतिक तनाव के चलते सोने की मांग बढ़ने से यह अनुपात 68 तक जा सकता है।

रिपोर्ट बताती है कि चांदी का इस्तेमाल दो तरह से होता है। पहला, इसे सोने की तरह सुरक्षित निवेश माना जाता है। दूसरा, इसका उपयोग सोलर पैनल, इलेक्ट्रिक वाहन, 5G नेटवर्क और सेमीकंडक्टर जैसे उद्योगों में बड़े पैमाने पर होता है। फिलहाल युद्धविराम और मैन्युफैक्चरिंग से जुड़ी अनिश्चितताओं की वजह से इंड​स्ट्रियल डिमांड पर थोड़ा असर पड़ा है, लेकिन निवेश के तौर पर चांदी की मजबूती बनी हुई है। यह दबाव अस्थायी है और लंबे समय में चांदी की मांग और कीमतों में मजबूती बनी रह सकती है।

First Published : May 12, 2026 | 3:48 PM IST