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Gold Imports: FY26 में सोने का आयात 24% बढ़कर 71.98 अरब डॉलर के रिकॉर्ड हाई पर

वाणिज्य मंत्रालय के आंकड़ों के अनुसार, सोने की कीमतों में बढ़ोतरी के कारण आयात मूल्य बढ़ा है, जबकि मात्रा में गिरावट आई है

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बीएस वेब टीम   
Last Updated- April 17, 2026 | 6:15 PM IST

Gold imports: देश में सोने का आयात वित्त वर्ष 2025-26 में 24 फीसदी बढ़कर अब तक के उच्चतम स्तर 71.98 अरब डॉलर पहुंच गया है। यह वृद्धि मुख्य रूप से कीमती धातु की ऊंची कीमतों के कारण हुई है। वाणिज्य मंत्रालय ने यह जानकारी दी। वित्त वर्ष 2024-25 में सोने का आयात 58 अरब डॉलर रहा था, जबकि 2023-24 में यह 45.54 अरब डॉलर और 2022-23 में 35 अरब डॉलर था।

मात्रा के हिसाब से सोने का आयात घटा

वित्त वर्ष 2025-26 में मात्रा के हिसाब से सोने का आयात 4.76 फीसदी घटकर 721.03 टन रहा, जो वित्त वर्ष 2024-25 में 757.09 टन था। इसी तरह, चांदी का आयात बीते वित्त वर्ष में लगभग 150 फीसदी बढ़कर 12 अरब डॉलर हो गया। मात्रा के लिहाज से यह 42 फीसदी बढ़कर 7,334.96 टन रहा। इन कीमती धातुओं के आयात में वृद्धि से देश का व्यापार घाटा वित्त वर्ष 2025-26 में बढ़कर 333.2 अरब डॉलर पहुंच गया।

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कीमतें बढ़ने से बढ़ा सोने का आयात मूल्य

वाणिज्य मंत्रालय के आंकड़ों के अनुसार, सोने की कीमतों में बढ़ोतरी के कारण आयात मूल्य बढ़ा है, जबकि मात्रा में गिरावट आई है। मंत्रालय ने बताया कि सोने के आयात की कीमत वित्त वर्ष 2025-26 में बढ़कर 99,825.38 डॉलर प्रति किलोग्राम हो गई, जो वित्त वर्ष 2024-25 में 76,617.48 डॉलर प्रति किलोग्राम थी। इसी दौरान आयात मात्रा 757.09 टन से घटकर 721.03 टन रह गई।

स्विट्जरलैंड से आया सबसे ज्यादा सोना

मंत्रालय के अनुसार स्विट्जरलैंड सोने के आयात का सबसे बड़ा स्रोत रहा, जिसकी हिस्सेदारी लगभग 40 फीसदी है। इसके बाद संयुक्त अरब अमीरात (16 फीसदी से ज्यादा) और दक्षिण अफ्रीका (लगभग 10 फीसदी) का स्थान है। सोना देश के कुल आयात का पांच फीसदी से ज्यादा हिस्सा है।

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भारत दूसरा सबसे बड़ा उपभोक्ता

भारत दुनिया में चीन के बाद सोने का दूसरा सबसे बड़ा उपभोक्ता है और इसका उपयोग मुख्य रूप से आभूषण उद्योग में होता है। आंकड़ों के अनुसार, स्विट्जरलैंड से आयात 11.36 फीसदी बढ़कर 24.27 अरब डॉलर हो गया। भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) के अनुसार, चालू खाता घाटा (CAD) दिसंबर तिमाही में बढ़कर 13.2 अरब डॉलर (जीडीपी का 1.3 फीसदी) हो गया, जबकि पिछले वर्ष 2024-25 की इसी अवधि में यह 11.3 अरब डॉलर था।

हालांकि, चालू खाता घाटा अप्रैल-दिसंबर 2025 में घटकर 30.1 अरब डॉलर (जीडीपी का एक फीसदी) रहा, जबकि एक वर्ष पहले इसी अवधि में यह 36.6 अरब डॉलर (जीडीपी का 1.3 फीसदी) था।

(PTI इनपुट के साथ)

First Published : April 17, 2026 | 6:15 PM IST