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शादियों के मौसम में सोने में चमक कम

Last Updated- December 10, 2022 | 10:35 PM IST

भारत में शादी ब्याह का मौसम नजदीक है, उसके बावजूद स्थानीय खुदरा गहना बेचने वाले को चुनौती का सामना करना पड़ रहा है।
इसकी वजह है कि जब तक कीमतों में गिरावट नहीं आती तब तक ग्राहकों की कमी से जूझना ही पड़ेगा। स्टॉकिस्टों को गहनों की नई डिजाइन, उसकी कटिंग और सोने की पॉलिश करने के साथ ही हीरे के गहने बनाने के लिए 45 दिनों की जरूरत होती है।
शादी-ब्याह के मौसम आने से दो महीने पहले से ही सारी तैयारियां शुरू हो जाती है जिससे खुदरा गहना बनाने वालों के लिए भी एक ट्रेंड की शुरुआत हो जाती है। वर्ल्ड गोल्ड काउंसिल (डब्ल्यूजीसी) भारत के प्रबंध निदेशक अजय मित्रा का कहना है कि मौजूदा साल की पहली तिमाही में सोने के आयात की मांग में 30-40 फीसदी की कमी आई।
उनका मानना है कि स्क्रैप ज्वेलरी को पुनरावर्तित करने के काम में बढ़ोतरी जरूर हुई है लेकिन यह मांग की खाई को कम नहीं कर सकती है। डब्ल्यूजीसी के एक आंकड़े के मुताबिक वर्ष 2008 की पहली तिमाही में भारत में सोने की मांग में पिछले साल की समान अवधि के 202.2 टन की अवधि के मुकाबले 50 फीसदी की कमी आई और यह 102.1 टन रही।
झावेरी बाजार के एक खुदरा गहना कारोबारी का कहना है कि इस साल जनवरी और फरवरी महीने में सोने का आयात बिल्कुल भी नहीं हुआ जबकि पिछले साल इसी अवधि में यह क्रमश: 23 और 21 टन रहा है।
निवेशकों को वैश्विक वित्तीय बाजार की अस्थिरता के बावजूद वे सोने में निवेश करना चाहते हैं क्योंकि दुनिया का सबसे बड़ा सोना के लिए एक्सचेंज ट्रेडेड फंड, एसपीडीआर गोल्ड ट्रस्ट ने 29 मार्च को 1,127.44 टन पर एक नई ऊं चाई हासिल की और अगले दिन भी यही स्तर बना रहा।
दिसंबर और फरवरी महीने में ग्राहकों ने अपनी खरीदारी को टाल दिया। इसी वजह से लक्जरी से जुड़े सामान जिसमें हीरे के गहने, घड़ी, धूप के चश्मे की बिक्री में नाटकीय स्तर पर गिरावट आई। एक खुदरा कारोबारी का कहना है कि अप्रैल से शुरू होने वाला शादी के मौसम में कारोबार मंदा ही रहेगा।
मित्रा को यह उम्मीद है कि पिछले सालों की तरह की दक्षिण भारत में सोने का त्योहार जिसे अक्षय तृतीया कहते हैं, वह इस साल 28 साल अप्रैल को आ रहा है और इस अवसर पर सोने की मांग में बढ़ोतरी होनी चाहिए।वैश्विक बाजारों में पिछले दो महीनों में सोने की कीमतें 900 डॉलर प्रति औंस से अधिक रही हैं।
लेकिन, वैश्विक आर्थिक मंदी से डॉलर में भारतीय रुपये की तुलना में अतिरिक्त मजबूती आई जिससे भारतीय रुपया 51 के स्तर से ऊपर चला गया। हालांकि बाद में रुपये में सुधार हुआ। भारत में खपत के लिए आयात किए जाने वाले सोने की कीमत डॉलर में होती है और रुपये में किसी तरह की गिरावट आने से सोना घरेलू बाजार में महंगा हो जाता है।
इस कारण सोना हाजिर और वायदा बाजार में 15,000 रुपये प्रति 10 ग्राम के स्तर से ऊपर बना हुआ है। परिणामस्वरूप, निवेशकों को इस परिसंपत्ति वर्ग में नए निवेश के लिए सोचना पड रहा है।

First Published - April 1, 2009 | 10:45 PM IST

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