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सोने की कीमत बढऩे की उम्मीद

Last Updated- December 15, 2022 | 7:50 AM IST

संस्थागत निवेशकों से बढ़ती मांग और खुदरा उपभोक्ताओं द्वारा सुरक्षित दांव के तौर पर खरीदारी की वजह से ज्वैलरों और विश्लेषकों को इस कैलेंडर वर्ष में सोने के भाव में कम से कम 12 फीसदी तेजी आने की उम्मीद है। खासकर अमेरिका में खुदरा उपभोक्ताओं द्वारा इस धातु में निवेश बढ़ाए जाने की संभावना है, जहां नवंबर में राष्ट्रपति चुनाव होना है।
24 जून को 48,380 रुपये की ऊंचाई छूने के बाद मौजूदा समय में 48,041 रुपये प्रति 10 ग्राम पर कारोबार कर रहा सोना इस कैलेंडर वर्ष के अंत तक 54,000 रुपये प्रति 10 ग्राम तक पहुंच जाने की संभावना है। सोने की रुपये में वैल्यू बढऩे से वैश्विक रुझान पर असर पड़ेगा। कोविड-19 महामारी से प्रभावित वैश्विक अर्थव्यवस्था के लिए सोना सुरक्षित दांव साबित हुआ है। चीन और अन्य देशों के बीच तनाव बढऩे से भी इस धातु में निवेश को बढ़ावा मिला है।
सोना ऐसा एकमात्र परिसंपत्ति वर्ग है जिसने इस कैलेंडर वर्ष की पहली छमाही में 23 फीसदी का प्रतिफल दिया है और पिछले एक साल के दौरान 41.6 फीसदी का प्रतिफल दिया। जनवरी 2017 से सोने के निवेशकों की पूंजी 72.6 फीसदी तक बढ़ी है।
चेन्नई की रिटेलर एनएसी ज्वैलर्स के प्रबंध निदेशक अनंत पदमनाभन ने कहा, ‘बुनियादी आधार मौजूदा समय में सोने की कीमतों के पक्ष में है।’ उन्होंने कहा कि अमेरिका में डॉनल्ड ट्रंप प्रशासन ने वहां वृद्घि की रफ्तार मजबूत बनाने के लिए कई कार्यक्रमों की घोषणा की है। ये प्रयास राष्ट्रपति द्वारा आगामी चुनाव को देखते हुए अपनी लोकप्रियता बढ़ाने के लिए किए गए हैं। इससे डॉलर पर दबाव बना रह सकता है और सोने की चमक बढ़ सकती है।
पदमनाभन ने कहा, ‘इसके अलावा, चीन और शेष दुनिया के बीच भू-राजनीतिक तनाव बढऩा भी आर्थिक मंदी से सुरक्षा के तौर पर सोने के पक्ष में साबित हुआ है। इस वजह से हमें सोने की कीमतें कैलेंडर वर्ष 2020 के अंत तक 54,000 रुपये प्रति 10 ग्राम पर पहुंच जाने की संभावना है।’
हालांकि दुनियाभर में बढ़ रही बेरोजगारी की दर चिंता का मुख्य कारण है।
सोने की कीमतें अमेरिका में भारी निवेश और उपभोक्ता मांग की वजह से बढ़ रही हैं। कंसल्टेंसी फर्म मेटल फोकस की एक रिपोर्ट से पता चलता है कि सोने की आपूर्ति इस साल 5 प्रतिशत तक घट जाएगी।

First Published - June 29, 2020 | 12:49 AM IST

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